
सुसंस्कृति परिहार
जम्मू विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रो चन्द्र शेखर की आत्महत्या की खबर चौंकाने वाली है। जम्मू-कश्मीर में तकरीबन आठ प्रतिशत दलित लोग हैं उन पर कभी किसी भी तरह के उत्पीड़न के समाचार नहीं मिलते मुस्लिम बहुल क्षेत्र में वे पंडितों के साथ बराबर मेल जोल से रहते आए हैं।उसी राज्य में 45 वर्षीय एसोसिएट प्रोफेसर डॉ चंद्र शेखर जो उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के मुरादपुर के जलालपुर गांव के रहने वाले थे और 15 वर्षों से जम्मू यूनिवर्सिटी में कार्यरत थे तथा इस समय चंद्र शेखर जम्मू के कनाल रोड स्थित ओल्ड यूनिवर्सिटी कैंपस में अपनी पत्नी व बेटी के साथ रहते थे, ने विश्व विद्यालय में अपने विभाग के कमरे में फंदा लगाकर जान दे दी। वहां सामने बोर्ड पर उन्होंने एक पंक्ति लिखी थी ‘सब सच है क्योंकि कहानी झूठी है।’ इसके नीचे उन्होंने हस्ताक्षर किए और आज की तारीख भी लिखी लेकिन वर्ष 2022 की जगह 2021 लिखा। इसे पुलिस गलती मान रही है। मामले की जांच कर रही पुलिस की माने तो चंद्र शेखर ने इस पंक्ति से यह बताने का प्रयास किया है कि उन पर लगे आरोप झूठे हैं और उन्हें फंसाया गया है। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है और आने वाले दिनों में यूनिवर्सिटी प्रबंधन, विभाग के अन्य शिक्षकों व छात्राओं से भी पूछताछ होगी।
कहा जा रहा है चंद्र शेखर के खिलाफ विभाग की 22 छात्राओं ने हाल ही में यौन शोषण की शिकायत दर्ज करवाई थी। इससे पहले उन पर कभी इस तरह का लांछन नहीं लगा।इस पर यूनिवर्सिटी की आतंरिक कमेटी ने चंद्र शेखर के खिलाफ नाममात्र की विभागीय जांच की और बुधवार को ही उन्हें निलंबित करने का आदेश जारी हुआ था।
उधर डॉ. चंद्रशेखर की मौत को उनके परिवार ने सोची समझी साजिश करार दिया है। उनकी पत्नी का कहना है कि उनको प्रताड़ित किया जाता था। वह एचओडी बनने वाले थे, जो मौजूदा एचओडी आरती बख्शी को बिलकुल पसंद नहीं था। यह खुदकुशी नहीं हत्या है। उनको मरने पर मजबूर किया गया। इसकी उच्च स्तरीय जांच के साथ दोषियों को सजा मिलनी चाहिए। एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. चंद्रशेखर की पत्नी डॉ. नीता का कहना है कि एचओडी आरती बख्शी उनको लगातार तंग करती आ रही थीं। एक बार तो उन्होंने अपना इस्तीफा तक दे दिया था, जिसे वीसी ने फाड़ दिया और कहा था कि ऐसी छोटी-मोटी बातों को लेकर इस्तीफा नहीं देते। भी विभाग में कोई कार्यक्रम होता या फिर सेमिनार होता तो उनके बैठने के लिए सीट तक नहीं होती थी। मैं तो इसे जातपात का नाम भी दूंगी। क्योंकि हम लोग दलित समाज के हैं। कुछ समय पहले की ही बात है। पति को विभाग की एचओडी से हस्ताक्षर कराने थे। इसके लिए उन्हें घंटों इंतजार कराया गया। जिस विभाग में 15 साल सेवाएं दीं, उसी विभाग की एचओडी उनसे कहती हैं कि हस्ताक्षर कराने के लिए पहचान पत्र दिखाओ। छोटे-छोटे अवसरों पर उनको नीचा दिखाने की कोशिश की जाती थी। उन्होंने कहा, ‘मेरे पति खुदकुशी नहीं कर सकते थे। उनको विभाग में तंग किया जा रहा था।
सूत्रों का कहना है कि बर्थडे सेलिब्रेशन में भी प्रो. चंद्रशेखर के साथ बदसलूकी की गई थी। इसके बाद वह इस शिकायत को लेकर यौन उत्पीड़न आंतरिक शिकायत जांच समिति के पास गए थे। लेकिन वहां से भी अच्छा रिस्पांस नहीं मिला। इससे आहत होकर वह अपने कमरे में चले गए थे। चंद्रशेखर की पत्नी डॉ. नीता का कहना है कि 4.30 बजे तो मेरी उनके साथ बात हुई थी। तब उन्होंने बताया था कि आरती मैडम का बर्थडे सेलिब्रेट हो रहा है। इसके बाद वह अपने कमरे में पहुंच जाते हैं। फिर फंदा लगाने के लिए उन्हें पीले रंग की रस्सी भी मिल जाती है। आधे घंटे में उन्हें निलंबित करने का पत्र मिलता है। इसी आधे घंटे में वो रस्सी भी लाते हैं, फंदे पर लटक जाते हैं और मौत हो जाती है। आश्चर्यजनक बात ये है कि आरती बख़्शी 22सितम्बर को रिटायर होने वाली थीं तथा चंद्रशेखर एच ओ डी बनने वाले थे।
पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है। वहीं, इस घटना से यूनिवर्सिटी प्रबंधन व विद्यार्थी सकते में हैं। जम्मू-कश्मीर दलित चेतना मंच और कई छोटे दलित संगठनों, विश्वविद्यालय छात्र और शिक्षक संगठन ने इस मामले की सीबीआई भी आई से जांच की मांग है।अखिल भारतीय ओ बी सी महासभा वा एस सी एस टी संगठन ने पिछले दिनों पिछड़े वर्ग की बच्चियों के साथ बलात्कार मुद्दे पर , अखिल भारतीय स्तर पर सागर मध्यप्रदेश में जबरदस्त ललकार रैली का आव्हान किया था।उसे इस मामले को भी गंभीरता लेना चाहिए क्योंकि इससे पहले भी डी यू के एसोसिएट प्रो रतनलाल को एक टिप्पणी करने पर बुरी तरह से उत्पीड़न झेलना पड़ा था ।यदि विद्वत जनों के साथ इस तरह का व्यवहार हो रहा है तो इसको भी अहम मुद्दा बनाया जाना चाहिए।यह व्यवहार घोर आपत्तिजनक और गैर संवैधानिक है।





