भारतीय महिला क्रिकेट टीम की दिग्गज पेसर झूलन गोस्वामी का दो दशक लंबा क्रिकेट करियर अब खत्म होने जा रहा है. वो लॉर्ड्स में इंग्लैंड के खिलाफ अपना आखिरी इंटरनेशनल मैच खेल रही हैं. झूलन ने 2002 में 6 जनवरी को इंग्लैंड के खिलाफ ही अपने इंटरनेशनल करियर का आगाज किया था और आखिरी मैच भी उसी टीम के खिलाफ खेल रही हैं. झूलन ने बंगाल के छोटे से गांव चकदा से टीम इंडिया तक का सफर तय किया. हालांकि, यह सफर आसान नहीं रहा. उन्हें कदम-कदम पर संघर्ष करना पड़ा. लेकिन, मन में क्रिकेटर बनने की ऐसी जिद थी कि सपना पूरा हो ही गया.

नई दिल्ली. भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने इंग्लैंड को तीन मैचों की वनडे सीरीज में क्लीन स्वीप कर दिया है. हरमनप्रीत कौर की अगुआई वाली टीम इंडिया ने सीरीज के तीसरे और आखिरी वनडे मैच में मेजबान इंग्लैंड को 16 रन से हराकर सीरीज 3-0 से अपने नाम कर ली. भारत ने इस तरह अपने धाकड़ गेंदबाज झूलन गोस्वामी को जीत से विदाई दी, जो अपना आखिरी इंटरनेशनल मैच खेल रही थीं.
भारतीय टीम ने 23 साल बाद इंग्लैंड को उसके घर में वनडे सीरीज में मात दी है. इससे पहले टीम इंडिया ने 1999 में यह उपलब्धि हासिल किया किया था. भारत की ओर से रेणुका सिंह ने सबसे अधिक 4 विकेट अपने नाम किए वहीं अपना आखिरी मैच खेल रहीं झूलन और राजेश्वरी गायकवाड़ ने दो- दो सफलताएं अर्जित की. इंग्लैंड की टीम 43.4 ओवर में 153 रन पर ढेर हो गई.
इंग्लैंड के 3 बल्लेबाज ही दहाई का आंकड़ा छू सके
170 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी इंग्लिश टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही. मेजबान टीम ने भी नियमित अंतराल पर विकेट गंवाए जिससे एक समय उसका कुल स्कोर 53 रन पर 6 विकेट हो गया. रेणुका सिंह की अगुआई में भारतीय गेंदबाजों ने शानदार प्रदर्शन कर इंग्लैंड को लो स्कोरिंग मुकाबले में हरा दिया. इंग्लैंड के सिर्फ 4 बल्लेबाज ही दहाई का आंकड़ा छू सके.
भारतीय टीम 169 रन पर सिमट गई
इससे पहले भारतीय महिला टीम सिर्फ 169 रन पर सिमट गई थी. टॉस हारकर बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम ने लार्ड्स पर नियमित अंतराल पर विकेट गंवाए और पूरी टीम 45.4 ओवर में ढेर हो गई. ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा ने भारत के लिए 106 गेंद में सर्वाधिक 68 रन बनाए. सलामी बल्लेबाज स्मृति मंधाना ने भी 79 गेंद में 50 रन की पारी खेली. इन दोनों के अलावा सिर्फ पूजा वस्त्रकार (22) ही दोहरे अंक में पहुंच पाई.

झूलन गोस्वामी बंगाल के छोटे से गांव चकदा में ही पली बढ़ीं. घर में सब लड़के क्रिकेट खेलते थे, तो उनका काम गेंद उठाकर देना होता था. ऐसा करते-करते झूलन को भी इस खेल से लगाव हो गया. जब भाई दोपहर में सो जाते थे तो वो अकेले प्रैक्टिस करती थीं. तो इस तरह उनके क्रिकेट खेलने की शुरुआत हुई. हालांकि, गांव के लड़कों को मनाना उनके लिए आसान नहीं था. उन्होंने एक इंटरव्यू में यह बात बताई थी. दरअसल, लड़कों की नजर में झूलन धीमी गेंदबाजी करती थीं. ऐसे में उन्होंने तेज गेंदबाज बनने की ठानी. लेकिन, गांव की लड़की के लिए ऐसा करना आसान नहीं था





