
शैलेन्द्र चौहान
राजस्थान में नए मुख्यमंत्री के चुनाव को लेकर शुरू हुआ विवाद थमने की बजाय लगातार बढ़ता जा रहा है। रविवार को गहलोत समर्थक विधायकों ने इस्तीफे की धमकी दी थी और उन्होंने साफ कर दिया था कि पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट को सीएम के तौर पर स्वीकार नहीं करेंगे। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव लड़ने की तैयारी के बाद से ही नए उत्तराधिकारी को लेकर चर्चा शुरू हो गई थी। इसमें दो नाम प्रमुखता से सामने आए थे। पहला नाम सचिन पायलट का और दूसरा नाम विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी का। हालांकि अब सचिन पायलट के नाम पर गहलोत खेमा मानने को तैयार नहीं है।
अशोक गहलोत कैंप के मंत्री शांति धारीवाल ने सचिन पायलट को गद्दार कहते हुए प्रभारी अजय माकन पर जोरदार हमला किया है। माकन व वरिष्ठ कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे पार्टी के राष्ट्रीय पर्यवेक्षकों के रूप में जयपुर पहुंचे थे। रविवार को वे नए सीएम के चयन के लिए कांग्रेस विधायकों की राय जानने के लिए बैठक करने वाले थे, लेकिन गहलोत समर्थक विधायक नहीं पहुंचे। इस बीच खबर आई कि 92 विधायकों ने इस्तीफा स्पीकर सीपी जोशी को सौंप दिया है।
धारीवाल के घर पर विधायकों की हुई बैठक को अनुशासनहीनता कहे जाने पर जवाब देते हुए धारीवाल ने कहा कि वह 50 साल से कांग्रेस में है, लेकिन उन पर कभी कोई आरोप नहीं लगा है। शांति धारीवाल ने कहा कि माकन, पायलट के पक्ष में विधायकों को एकजुट कर रहे थे, जोकि गद्दार हैं। बीजेपी की शह पर पायलट ने कांग्रेस तोड़ने की कोशिश की। शांति धारीवाल ने कहा, ‘हम लगातार 34 दिन तक होटलों में रहे। आपस में बातचीत करते रहे। 34 दिन बाद जो गद्दारी करने वाले लोग थे जो सरकार गिराना चाहते थे। जिन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहते हुए कहा था कि गहलोत सरकार अल्पमत में है इस्तीफा देना चाहिए। ऐसे व्यक्ति के खिलाफ जब माहौल बना तब सरेंडर किया। लेकिन उन लोगों को जो मानेसर में इकट्ठे हुए (2020 में) और सरकार गिराने का प्रयास करते रहे, आज उनको मुख्यमंत्री बनाने के लिए सेकेट्री जनरल इंचार्ज आ गए हैं। उन पर आरोप है कि वह पक्षपात पूर्ण तरीके से विधायकों से बात कर रहे थे। वह सचिन पायलट के पक्ष में जुड़ने के लिए कह रहे थे। हमारे पास इस बात के सबूत हैं। हम सोनिया गांधी के सिपाही है, उनके हर हुकुम को हमने 50 सालों से माना है। एक बार भी अनुशासनहीनता का आरोप नहीं लगा।’ कांग्रेस विधायक दिव्या महिपाल मदेरणा ने कैबिनेट मंत्री शांति धारीवाल के बयान पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मैं शांति धारीवाल के बयान की निंदा करती हूं। मैं पुष्टि करती हूं कि ऑब्जर्वर कांग्रेस हाईकमान के नाम पर केवल एक लाइन प्रस्ताव पारित करते और उसके बाद प्रत्येक विधायक से एक-एक करके उनकी राय लेते और यही फिर आलाकमान को बताया जाता।
उधर माकन ने बताया कि कांग्रेस विधायक प्रताप खाचरियावास और एस धारीवाल ने हमसे मुलाकात की और तीन मांगें रखीं। एक मांग यह कि 19 अक्तूबर को कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव के बाद नया मुख्यमंत्री चुना जाए और प्रस्ताव को इसके बाद ही अमल में लाया जाए। चूंकि गहलोत स्वयं कांग्रेस अध्यक्ष पद के प्रत्याशी है, इसलिए यह हितों का टकराव होगा, कल यदि वे अध्यक्ष चुने जाते हैं, तो क्या वे इस पर फैसला करेंगे?
दूसरी शर्त यह थी कि गहलोत खेमा विधायक दल की बैठक में आने के बजाए अलग-अलग समूहों में आना चाहता था। इस पर माकन ने कहा कि हमने स्पष्ट किया कि हम प्रत्येक विधायक से अलग-अलग बात करेंगे, लेकिन बैठक में आने की बजाए अलग-अलग गुटों में बात करना स्वीकार्य नहीं है।
तीसरी शर्त यह थी कि नया सीएम उन 102 विधायकों में से चुना जाना चाहिए, जो गहलोत के प्रति वफादार हैं, न कि सचिन पायलट या उनके समूह में से। माकन ने कहा कि ये सारी बातें हम पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को बताएंगे और वह सीएम गहलोत व सभी से चर्चा कर आगे का फैसला करेंगी।
माकन ने यह भी कहा कि कांग्रेस विधायकों ने जोर देकर कहा कि बैठक में पारित होने वाला प्रस्ताव उक्त तीन शर्तों के अनुरूप हो, इस पर हमने कहा था कि कांग्रेस के इतिहास में कभी भी शर्तों के साथ कोई प्रस्ताव पारित नहीं किया गया है। प्रस्ताव में हितों का टकराव नहीं होना चाहिए।
माकन ने बताया कि विधायक दल की बैठक में नहीं आना अनुशासनहीनता है। इसके साथ ही गहलोत खेमे के विधायकों द्वारा रखी गई तीन शर्तों को भी माकन ने इसे ‘हितों का टकराव‘ बताया। कांग्रेस के इतिहास में कभी इस तरह का सशर्त प्रस्ताव पारित नहीं हुआ। एक अधिकृत बैठक में नहीं आना और उसके समानांतर रूप से दूसरी बैठक बुलाना निश्चित रूप से अनुशासनहीनता है। दरअसल राजस्थान कांग्रेस में मचे इस घमासान पर सोनिया गांधी ने नाराजगी जताई थी। कांग्रेस नेता अजय माकन ने बताया था कि उन्हे विधायकों के साथ बातचीत करने का निर्देश दिया गया है। अजय माकन ने कहा कि हमारे साथ आए दूसरे पर्यवेक्षक मल्लिकार्जुन खड़गे भी विधायकों से बात करेंगे। हालांकि विधायकों ने बातचीत से इनकार कर दिया है। गहलोत के समर्थक चाहते हैं कि नए मुख्यमंत्री की घोषणा 19 अक्टूबर तक के लिए स्थगित कर दी जाए।
अजय माकन और मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोमवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से दिल्ली में मुलाकात की और बीते दिन के घटनाक्रम के जानकारी दी। सोनिया गांधी ने दोनों नेताओं से लिखित रिपोर्ट मांगी है। अजय माकन ने कहा कि हम आज रात या कल तक सोनिया गांधी को रिपोर्ट दे देंगे। सोनिया गांधी ने माकन और खड़गे के साथ बैठक में नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि अशोक गहलोत ने ऐसा कैसे कर दिया, गहलोत से यह उम्मीद नहीं थी।
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के समर्थक विधायकों और कांग्रेस अलाकामान के बीच तनातनी जारी है। खबर है कि गहलोत ने इस मामले को लेकर पार्टी नेतृत्व से माफी मांग ली है, लेकिन कथित तौर पर गांधी परिवार राजस्थान में बने सियासी तनाव से खासा नाराज है। दरअसल, कहा जा रहा है कि राज्य में तनाव मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर है। रविवार रात करीब 80 विधायकों ने पायलट के सीएम बनने के खिलाफ एक सुर मिलाए थे।
कांग्रेस को ‘अपमानित’ करने को लेकर गांधी परिवार गहलोत से कथित तौर पर नाराज है। बताया जा रहा है कि राजस्थान सीएम ने केंद्रीय पर्यवेक्षक मल्लिकार्जुन खड़गे से माफी मांग ली है। साथ ही उन्होंने विधायक दल की बैठक के साथ ही विधायकों की अलग मीटिंग बुलाने और उसके बाद हुई बगावत को ‘गलती’ बताया है। खड़गे का मानना है कि गहलोत के मामले में शामिल नहीं होने के दावे के बावजूद उनकी सहमति के बगैर ऐसी बगावत नहीं हो सकती थी। गहलोत ने कहा है, ‘ऐसा नहीं होना चाहिए था।’ साथ ही उन्होंने पूरे सियासी घटनाक्रम से पल्ला झाड़ लिया है। सोमवार को मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ भी सोनिया गांधी से मुलाकात करने पहुंचे। कमलनाथ के दिल्ली आने के बाद राजनीतिक गलियारों में ये अटकलें तेज हो गई कि कमलनाथ को कांग्रेस की कमान सौंपी जा सकती है। बैठक के बाद कमलनाथ ने कहा कि वह न तो नामांकन कर रहे हैं और न ही गहलोत से बात करने जा रहे हैं। उनकी कांग्रेस के अध्यक्ष पद में कोई रुचि नहीं है। वह केवल नवरात्र के लिए दिल्ली आए हैं।
कांग्रेस सूत्रों की खबर है कि कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव के नामांकन की आखिरी तारीख यानी 30 सितंबर तक राजस्थान में यथास्थिति बरकरार रहेगी। उसके बाद कोई कार्रवाई जाएगी। अब कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव में अशोक गहलोत के नामांकन करने की संभावना भी कम है। कांग्रेस नेतृत्व 30 सितंबर के बाद आगे का फैसला करेगा। सूत्रों के मुताबिक, अशोक गहलोत के चेहरे पर पार्टी अगला चुनाव नहीं लड़ना चाहती। सूत्रों का कहना है कि गहलोत के पक्ष में ये गोलबंदी उनके पार्टी अध्यक्ष बनने की संभावना के कारण हुई है। इस पूरे प्रकरण में अशोक गहलोत की छवि न केवल राजनीतिक हल्कों में धूमिल हुई है बल्कि राजस्थान की जनता के बीच भी खराब हुई है। लोग मानते हैं कि यह पूरा नाटक गहलोत की जानकारी में हुआ और यह एक शक्ति प्रदर्शन था जिससे न केवल उनकी बल्कि कांग्रेस आलाकमान की भी किरकिरी हुई। गहलोत मुख्यमंत्री का पद नहीं छोड़ना चाहते। हालांकि राजस्थान विधान सभा के चुनाव अगले वर्ष ही होने हैं। आगे जो भी हो फिलहाल वह नायक से खलनायक तो बन ही गए हैं।
संपर्क : 34/242, सेक्टर-3, प्रताप नगर, जयपुर-302033
मो. 7838897877





