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भूमाफिया बॉबी छाबड़ा की300 करोड़ की जमीन का नामांतरण निरस्त,सुराज कॉलोनी का प्रस्ताव

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इंदौर. प्रशासन ने विवादित सर्वानंद गृह निर्माण संस्था की खरीदी गई जमीन के मामले में भूमाफिया रणवीरसिंह छाबड़ा उर्फ बॉबी छाबड़ा और अन्य खरीदारों को झटका देते हुए नामांतरण निरस्त कर दिया है। सीलिंग से प्रभावित यह जमीन धारा.20 की छूट का लाभ देते हुए संस्था सदस्यों व गरीब.कमजोर वर्ग के लोगों को आवासीय प्लॉट के लिए दी गई थी। कलेक्टर ने अपर कलेक्टर को धारा.20 के तहत जांच के आदेश भी दिए हैं। इसमें गड़बड़ी मिलने पर यह जमीन सरकारी घोषित कर यहां सुराज कॉलोनी का प्रस्ताव भेजा जाएगा।

पिपल्याराव भंवरकुआं स्थित इस 9 एकड़ जमीन का बाजार मूल्य करीब 300 करोड़ से ज्यादा है। संस्था अध्यक्ष गुरनाम सिंह धारीवाल ने यह जमीन संस्था सदस्यों व गरीबों को नहीं देते हुए बॉबी सहित अन्य खरीदारों को बेच दी और नामांतरण भी करवा दिए। इस संबंध में सर्वानंद नगर रहवासी संघ की ओर से की गई शिकायत पर तत्कालीन अपर कलेक्टर ने मामले में नोटिस जारी किए थे। मामला राजस्व मंडल तक पहुंचा वहां से अपर कलेक्टर को मामले में कार्रवाई के लिए कहा गया। इस आधार पर अपर कलेक्टर राजेश राठौर ने मामले में विधिवित सुनवाई व जांच कर तत्कालीन तहसीलदार के नामांतरण आदेशों को निरस्त कर दिया। मामले में संस्था अध्यक्ष द्वारा व्ययन शर्तों का उल्लंघन पाया गया।

धारा.20 के उल्लंघन की जांच करेंगे कार्रवाई
कलेक्टर मनीषसिंह के अनुसार इसकी जांच धारा.20 की शर्तों के आधार पर भी करने के निर्देश राठौर को दिए हैं। यदि इसका उल्लंघन पाया गया तो जमीन सरकारी घोषित कर यहां मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान की घोषणा के अनुरूप सुराज कॉलोनी बनाने का प्रस्ताव भेजा जाएगा।

बॉबी समेत इन लोगों ने खरीदी जमीन
वर्ष 2005.06 तक यह जमीन सर्वानंद गृह निर्माण संस्था के नाम दर्ज रही। वर्ष 2006 में आम लोगों को भूमि से जुड़ी शर्तों की जानकारी न होने का लाभ उठाकर रणवीरसिंह पिता इंदरसिंह छाबड़ा उर्फ बॉबी गुरुदीपसिंह छाबड़ा परमजीत सिंह जितेन्द्र धवन सीमा जैन इंद्रजीतसिंह हरदीपसिंह रूप्पल सुधीर तिवारी विपिन शुक्ला सुदामा शर्मा गोविंद बलविंदर सिंह महेश पथरोड आदि ने संस्था की जमीन खरीदी और अवैध रूप से बेचकर नामांतरण भी करवा लिया।यह कीमती भूमि गरीबों और संस्था सदस्यों को आवास उपलब्ध कराने के लिए सीलिंग से सशर्त विमुक्त की गई थी। मास्टर प्लान में इसका उपयोग औद्योगिक बताया गया है।

Ramswaroop Mantri

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