एस पी मित्तल,अजमेर
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्किार्जुन खडग़े के 30 सितंबर को कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के चुनाव के नामांकन दाखिल कर दिया है। खडग़े गांधी परिवार के अधिकृत उम्मीदवार है। इसलिए राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी प्रस्तावक बने हैं। खडग़े की उम्मीदवारी गांधी परिवार ने तब तय की, जब अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री के पद की खातिर बगावत कर दी। सब जानते हैं कि खडग़े मौजूदा समय में राज्यसभा में कांगेस संसदीय दल के नेता हैं। इस नाते उन्हें प्रति पक्ष के नेता का दर्जा मिला हुआ है। नियमों के मुताबिक प्रतिपक्ष के नेता को केबिनेट मंत्री की सुविधाएं मिलती है। गहलोत ने भले ही मुख्यमंत्री के पद का लालच दिखाया हो, लेकिन खडग़े ने सोनिया गांधी से कह दिया है कि वे प्रतिपक्ष के नेता के पद से इस्तीफा दे देंगे। खडग़े ने कहा कि उनकी वफादारी कांग्रेस के प्रति है। चूंकि गांधी परिवार ने उन्हें बहुत कुछ दिया है, इसलिए जरुरत पडऩे पर वे सत्ता का लालच छोड़ रहे हैं। यहां यह खासतौर से उल्लेखनीय है कि वफादारी के कारण ही खडग़े को पूर्व में लोकसभा में कांग्रेस संसदीय दल का नेता बनाया गया था, लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में खडग़े कर्नाटक से सांसद नहीं बन पए, लेकिन कांग्रेस के प्रति वफादारी को देखते हुए गांधी परिवार ने खडग़े को राज्यसभा का सांसद बनवा कर प्रतिपक्ष का नेता बनाया। खडग़े की वफादारी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बहुचर्चित नेशनल हेराल्ड प्रकरण में भी खडग़े का नाम जुड़ा हुआ है। पिछले दिनों जब ईडी ने दिल्ली स्थित नेशनल हैराल्ड के दफ्तर को सील किया, तब दफ्तर के प्रभारी होने के नाते खडग़े ने ही दफ्तार जाकर सील को हटवाया। कांग्रेस और गांधी परिवार में जो स्थिति खडग़े की है, उसे कही ज्यादा मजबूत स्थिति अशोक गहलोत की थी। पिछले दिनों जितने दिन ईडी ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी से पूछताछ की उतने दिन अशोक गहलोत दिल्ली में रहे। राजस्थान के हजारों लोगों को दिल्ली ले जाकर धरना प्रदर्शन करवाया। लेकिन मुख्यमंत्री के पद की लालसा में गहलोत ने 25 सितंबर को अपनी 40 साल की वफादारी भंग कर दी। यदि 25 सितंबर को गहलोत बगावत नहीं करते तो आज खडग़े की जगह गहलोत कांग्रेस के अध्यक्ष पद के लिए नामांकन करते नअर जाते। खडग़े की जीत में कोई संशय नहीं है, क्योंकि खडग़े गांधी परिवार के उम्मीदवार है, जहां तक शशि थरूर की उम्मीदवारी का सवाल है तो यह सिर्फ विरोध के लिए है। थरूर को कांग्रेस के असंतुष्ट नेताओं का उम्मीदवार माना जा रहा है, लेकिन कांग्रेस में वही होता है जो गांधी परिवार चाहता है। असंतुष्ट नेता माने या नहीं, लेकिन गांधी परिवार की वजह से ही कांग्रेस का वजूद है। यदि गांधी परिवार को अलग कर दिया जाएगा तो कांग्रेस भी खत्म हो जाएगी। शशि थरूर उम्मीदवार बन कर चुनाव प्रक्रिया में अनेक उड़चने डाल सकते हैं। अभी तक भी मतदाता सूची सार्वजनिक नहीं की गई है। कांग्रेस के मुख्य चुनाव अधिकारी मधुसूदन मिस्त्री ने पूर्व में कहा था कि 9 हजार मतदाताओं वाली सूची सिर्फ उम्मीदवारों को ही दी जाएगी। यानी अब शशि थरूर मतदाता सूची लेने के हकदार हो गए हैं।
मेरे लिए पद का कोई महत्व नहीं:
30 सितंबर को राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने दिल्ली में मल्लिकार्जुन खडग़े से मुलाकात की। गहलोत ने यह मुलाकात तब की जब खडग़े कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव में नामांकन दाखिल करने जा रहे थे। मुलाकात के बाद गहलोत ने कहा कि हम सबने मिलकर खडग़े का नाम तय किया है। गहलोत से जब यह पूछा गया कि क्या वे मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे रहे हैं तो उन्होंने कहा कि मैं पिछले पचास वर्षों से किसी न किसी पद पर रहा हंू। इतने वर्षों तक पदों पर रहने से व्यक्ति थक भी जाता है। गहलोत ने कहा कि मेरे लिए पद कोई महत्व नहीं रखता है। मैं चाहता हंू कि खडग़े के नेतृत्व में कांग्रेस देशभर में मजबूत हो। गहलोत ने माना कि 25 सितंबर को जब केंद्रीय पर्यवेक्षक मल्लिकार्जुन खडग़े और अजय माकन जयपुर आए थे, तब उनकी यह जिम्मेदारी थी कि वे विधायक दल की बैठक बुलाते। कांगे्रस में यह परंपरा रही है कि विधायक एक लाइन का प्रस्ताव पास करते हैं। लेकिन मैं ऐसा प्रस्ताव पास नहीं करवा सका। कांग्रेस की पचास वर्षों की इस परंपरा के टूटने पर मैंने सोनिया गांधी से माफी भी मांगी है।





