एस पी मित्तल,अजमेर
कोई व्यक्ति पांच सौ ज्यादा दिनों तक चुप रहे और भोजन भी ग्रहण नहीं करे या फिर कोई व्यक्ति तीन दिनों के लिए स्वयं को एक गड्ढे में बंद कर ले तो कानून की नजर में यह अपराध हो सकता है। वहीं ऐसे कृत्यों पर विज्ञान तो भरोसा करता ही नहीं है। विज्ञान का तर्क है कि ऑक्सीजन के बिना कोई भी 10 मिनट भी जीवित नहीं रह सकता है। लेकिन भारत की सनातन संस्कृति के अध्यात्म में ऐसी शक्ति है कि लोग ताज्जुब करते हैं। 30 सितंबर को भोपाल में स्वामी पुरुषोत्तमानंद ने स्वयं को 7 फुट गहरे गड्ढे में बंद कर लिया है। स्वामी की यह भूसमाधि 72 घंटे बाद तीन अक्टूबर को समाप्त होगी। भू समाधि स्थल पर मौजूद भक्तों को उम्मीद है कि स्वामी जीवित बाहर निकलेंगे। स्वामी पुरुषोत्तमानंद इसे अपनी पूजा अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान का तरीका मानते हैं। स्वामी जी जिस गड्ढे में बंद है, उसमें ऑक्सीजन प्राप्त होने की कोई व्यवस्था नहीं है। यानी विज्ञान का तर्क अपनी जगह है।
557 दिन की मौन साधना:
झारखंड स्थित जैन तीर्थ स्थल सम्मेद शिविर की पहाड़ी पर जैन मुनि प्रसन्न सागर महाराज 557 दिनों की घोर मौन साधना कर रहे हैं। मुनि की यह साधना 21 जुलाई 2021 से शुरू हुई थी जो अब 28 जनवरी 2023 को समाप्त होगी। 30 सितंबर तक साधना के 447 दिन हो गए है। इन 447 दिनों में जैन मुनि ने मात्र 40 बार आहार ग्रहण किया है। सब जानते हैं कि जैन मुनि अंजलि भर आहार ही ग्रहण करते हैं, इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि 447 दिनों के चालीस बार में कितना से आहार ग्रहण किया होगा। आहार कब ग्रहण करेंगे इसका निर्णय भी प्रसन्न सागर महाराज स्वयं लेते हैं। विज्ञान में इस बात की कल्पना नहीं की जा सकती कि कोई स्वस्थ व्यक्ति 557 दिनों तक चुप रहे, इतना ही नहीं 557 दिनों में मुश्किल से 55 हजार थोड़ा सा आहार ले, लेकिन भारत की सनातन संस्कृति के अध्यात्म में इतनी ताकत है कि जैन मुनि प्रसन्न सागर महाराज विज्ञान के आकलन को भी फेल कर देते हैं। इन 447 दिनों में गर्मी, सर्दी, बरसात तीनों मौसम गुजर गए हैं, लेकिन जैन मुनि की साधना में कोई व्यवधान नहीं हुआ है, अनेक लोग जैन मुनि की साधना को ईश्वर का चमत्कार मान रहे है, इसलिए सम्मेद शिखर पर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी हुई हे। जैन मुनि के परम शिष्य और केकड़ी (अजमेर) नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष अनिल मित्तल ने बताया कि प्रसन्न सागर महाराज पहले भी महीनों तक एक पैर पर खड़े होने की साधना कर चुके हैं, लेकिन मौजूदा साधना अब तक की सबसे कड़ी साधना है। ऐसे जैन मुनि के दर्शन मात्र से ही मानव कल्याण हो रहा है। मित्तल का कहना है कि जैन मुनि प्रसन्न सागर महाराज ईश्वर का स्वरूप है। जैन मुनि की साधना के बारे में और अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 9928021482 पर अनिल मित्तल से ली जा सकती है।





