अग्नि आलोक
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साहब का एंबुलेंस मास्टर स्ट्रोक- Behind the scenes

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साहब अपने खास अधिकारियों से -“काफी दिनो से मेरी महानता का कोई किस्सा मीडिया में नही आया। वो पानी की बोतल डस्टबिन में डालने वाला किस्सा भी अब पुराना हो गया है। कुछ नया धमाका करना पड़ेगा।”

सभी लोग सर झुका कर पांच मिनट सोचने लगे।

तभी साहब बोल पड़े -“अरे नालायको, तुम लोगो से ना हो पाएगा। मैंने ही सोच लिया है। इस बार मैं अपना काफिला रोककर एंबुलेंस को रास्ता दूंगा। तुम लोग उसका वीडियो वायरल करवा देना बस। ठीक है?”

“लेकिन एंबुलेंस के लिए तो सभी लोग रास्ता दे देते हैं सर, इसमें महानता कैसी?” बदतमीज सा दिखने वाला एक अधिकारी बोला।

साहब ने उस आधिकारी को गुस्से में देखा। साहब का इशारा पाते ही वहां CBI की एक टीम पहुंची और उस मुंहफट अधिकारी को ले गई। 

“सर आप इसकी बकवास पर ध्यान न दें। एंबुलेंस वाला आइडिया काफी अच्छा है।” एक वरिष्ठ अधिकारी ने बात संभाली।

“ठीक है फिर तुम लोग किसी एंबुलेंस का जुगाड करो और उसको समझा देना कि मेरे रास्ता देने से पहले अपनी एंबुलेंस आगे न बढ़ा ले। साथ में चार छह फोटोग्राफरों को भी ले आओ। मुझे हर एंगल से एंबुलेंस की फोटो चाहिए।”साहब ने अधिकारियों को निर्देश दिए।

कुछ देर बाद एक अधिकारी आकार बोला -“सर बड़ी मुश्किल से एक एंबुलेंस वाले को पकड़ कर लाए हैं। वह तो आने को तैयार ही नहीं था। बोल रहा था कि मरीज को जल्दी हॉस्पिटल ले जाना है, टाइम खराब मत करो। हमने दो तमाचे लगाए तो अकल ठिकाने आ गई। एंबुलेंस के साथ बाहर बैठा है।”

साहब ” ठीक है, फिर चलो मैं अपने काफिले के साथ निकलता हूं। थोड़ी देर बाद उसको मेरे पीछे भेज देना।”

उसके बाद साहब निकल गए। कुछ देर बाद एक खाली सड़क पर एंबुलेंस उनके पीछे हॉर्न बजती हुई आई और साहब के रास्ता देते ही तुरंत आगे बढ़ गई। 

ड्राइवर की इस जल्दबाजी के चक्कर में ना तो ठीक से वीडियो बन पाया और ना ही फोटो खिच पाई। साहब वीडियो को क्वालिटी से नाखुश थे।

फौरन ड्राइवर को फोन करके वापस बुलाया गया। इस बार उसे पूरी स्क्रिप्ट समझाई गई। कैमरे कहां लगे हैं, यह भी बताया गया।

पर वह भी ठहरा एंबुलेंस का ड्राइवर। धीरे चलाना और कैमरे पर फोकस उसने सीखा ही न था। बड़ी मुश्किल से चार रीटेक के बाद परफेक्ट शॉट लिया गया। साहब के वीडियो देखने के बाद ही एंबुलेंस को आगे जाने दिया गया।

तब तक एंबुलेंस में बैठे मरीज की स्थिति काफी नाजुक हो चली थी। ड्राइवर ने पूरी रफ्तार से एंबुलेंस नजदीकी अस्पताल की तरफ बढ़ाई। उसके हॉस्पिटल पहुंचने से पहले ही उसकी एंबुलेंस का वीडियो वायरल हो चुका था।

🚑 एंबुलेंस, राहुल गांधी और महामानव 🚑

अच्छा तो ये बात है … जिसके लिए एंबुलेंस वाली नौटंकी करनी पड़ी !

पर कमजोर स्क्रिप्ट और घटिया एक्टिंग की वजह से एक बार फिर फजीहत हो गई !

दरअसल हुआ यह है कि राहुल गांधी की केरल में पदयात्रा के दौरान लगातार एंबुलेंस का तांता लगा रहता था और एंबुलेंस के सायरन की आवाज़ सुनते ही राहुल स्वयं और साथ चल रहे  हजारों कार्यकर्ता तुरंत रास्ता खाली कर देते थे ।

यहां तक हुआ कि प्रतिदिन इतनी बड़ी तादाद में मरीज लाती – ले जाती एंबुलेंसों को देखकर राहुल गांधी ने खुद कई बार  इस बात का ज़िक्र शाम को अपनी जनसभाओं में भी किया करते थे । 

वाकई भारी जनसमूह के साथ पैदल चल रहे एक नेता द्वारा इस प्रकार एंबुलेंस को सबसे पहले  रास्ता देना नेता के उच्चतम श्रेणी के नागरिक बोध को दर्शाता है । 

बस उसी समय से यह बात खटक रही थी कि राहुल की कमीज़ मेरी कमीज़ से ज्यादा  सफेद कैसे हो सकती है !

और नतीजा कल गुजरात में सामने आया ।

Ramswaroop Mantri

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