आज 7 अक्टूबर के रोज कोठीदा में कारम बांध स्थल पर कारम बांध संघर्ष और निर्माण समिति द्वारा सभी डूब प्राभावितों की बैठक का आयोजन किया गया था। जिसमे सभी गॉवों से लोग बांध स्थल पर पहुंचे थे।
5 सितंबर को जलसंसाधन मंत्री तुलसी सिलावट जी से इंदौर में मुलाकात में कारम बांध से प्राभावितों के संबंध में चर्चा की थी। उस समय हमने भोपाल में अधिकारियों से विस्थापितों के हक अधिकारों एवं पुनर्वास नीति और भूअर्जन कानून 2013 का पालन नही किया गया है। चर्चा के लिए समय मांगा था। तुलसी सिलावट जी ने जल्द ही समय तय कर चर्चा का आश्वासन दिया था। उनसे बार बार संपर्क करने बाद उन्होंने 29 सितंबर को 11 बजे मिलने का समय तय किया था।
जैसे ही 28 कि शाम 6 बजे हमे खबर मिली तो हम तैयारी कर दीदी के साथ भोपाल के लिए निकल पड़े।
29 सितंबर को 11 बजे भोपाल पहुंच कर 12 हम जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट जी के बंगले पर तुलसी सिलावट से संयुक्त कलेक्टर, डॉ पंकज रजक जी व डावर जी से बांध निर्माण में डूब प्राभावितों के साथ नए भूअर्जन कानून और म. प्र. पुनर्वास नीति का पालन नही किया गया है। बिना पुनर्वास डूब प्राभावितों को धमका कर गांव खाली करवा दिये थे। 14 अगस्त को बांध टूटने पर बांध से नीचे वास गांवो की जमीन एवं फसल बह गई थी। इस सभी मुद्दों पर 29 सितंबर के रोज करीबन 2 घण्टे चर्चा हुई। चर्चा में 12 बिंदुओं पर चर्चा हुई जिसमें तात्कालिक जरूरी कार्य दशहरे के बाद से ही कार्य शुरू कर जो लोग पहाड़ी पर टापरी बनाकर रह रहे है उनको बिजली ,पानी और घर बनाने के लिए कुछ चद्दरें देने की आश्वासन दिया है।
उसके बाद पुनर्वास नीति और भूअर्जन कानून 2013 के अनुसार विस्थापितों के लिए पुनर्वास स्थलों का निर्माण कर सुविधाये देने की भी बात हुई है। जिन विस्थापितों की वन पट्टे की जमीन डूब में गई है उनको भी राजस्व की जमीन की तरह समान मुआवजा देने की बात हुई है।
जिन किसानों की जमीन पर पेड़, कुआ, ट्यूब वेल, पाइपलाइन थी उनका भी मुआवजा देने की बात पर आश्वासन दिया है। विवाहित वयस्क पुत्रों को ही नही बल्कि अविवाहित वयस्क पुत्रों को भी पुनर्वास का लाभ पुनर्वास नीति के तहत मिलना चाहिए।
मत्स्य विभाग के डायरेक्टर श्री भरत जी भी चर्चा के लिए आये थे। उनसे भी चर्चा होकर डूब प्रभावित आदिवासी मछुआरों की सहकारी समितियों का पंजीयन करने का आश्वासन भी दिया है। आज यह सब जानकारी सभी महिला पुरुषों की बांध स्थलपर हुई बैठक दी गई।
अगर समय अवधि में कार्य शुरू नही किया तो हम सब डूब प्रभावित कड़े संघर्ष पर उतरेंगे यह आज निर्णय लिया है। किशन भाई, पटेलपुरा, धर्मेंद्र बडूकिया, ऊँकार बडूकिया, रामचंद्र भाबर, राधेश्याम मोहरे, गोविंद ठाकुर, रूपेंद्रसिंह ठाकुर, द्वारकीबाई, ने बात रखी।अंत मे नर्मदा बचाओ आंदोलन के मुकेश भगोरिया ने भोपाल में अधिकारियों के साथ हुई चर्चा के बारे सभी को जानकारी देकर समझाया ।आज अगली तैयारी की भी बात हुई ही।अगर कुछ दिनों में कुछ राहत देने की का आश्वासन दिया है वह नही दिया जाता है तो हम सब डूब प्रभावित एकसाथ कड़े संघर्ष पर उतरने का आज निर्णय लिया है।
लड़ेंगे! जीतेंगे!!
हामू आखा एक छे! एक छे!!
आदिवासी एकता जिन्दाबाद! जिन्दाबा!!





