दिव्यांशी मिश्रा
‘दद्दा अपनी पार्टी में मेरी ज्वाइनिंग करा दीजिए!’
‘हमारी पार्टी में ज्वाइनिंग नहीं होती है!’
‘अभी एक महाकरप्ट ने तो आपकी पार्टी ज्वाइन की है!’
‘तुम महाकरप्ट हो… जो तुमको ज्वाइन करा दें…?’
‘हा हा हा…दद्दा मज़ाक नहीं!’
‘हमारी पार्टी में लोग शरण लेते हैं, ज्वाइन नहीं करते!’
‘तो हमको शरण में ले लो!’
‘मुमकिन नहीं!’
‘काहे दद्दा! आपके लिए क्या मुश्क़िल है!’
‘मुश्क़िल है! तुम सोचते बहुत हो!’
‘हम आपके वफ़ादार कार्यकर्ता बन कर रहेंगे! कसम से!’
‘इसीलिए तो हम तुम्हें नहीं लेंगे!’
‘अब क्या हुआ दद्दा!’
‘हमें कार्यकर्ता नहीं चाहिए!’
‘…लो एक नेता को…एक राजनीतिक दल को…कार्यकर्ता नहीं चाहिए…तो फिर क्या चाहिए…?’
‘भक्त!’
‘फिर हम भक्त बन कर रहेंगे दद्दा। वैसे भी हमारा कुछ हो नहीं रहा! यूपीएससी भी नहीं निकल रहा! ख़ाली बेरोज़गार बैठे हैं!’
‘तुमसे न हो पाएगा!’
‘दद्दा एक बार मौक़ा दे कर तो देखिए! फिर कहिएगा!’
‘चलो, एक बार मौका देते हैं तुम्हें! ज्वाइंनिग से पहले तुम्हारी ट्रेनिंग होगी! ट्रेनिंग पास करने पर ही ज्वाइनिंग होगी!’
‘थैंक्यू थैंक्यू दद्दा!’
‘वैसे हमारा जो एक्सपीरियंस है, वह कहता कि तुम किसी काम के नहीं!’
‘दद्दा!!!’
‘मतलब हमारे किसी काम के नहीं!’
ख़ैर, मेरे बहुत ज़िद्द करने के बाद दद्दा ने ट्रेनिंग शुरू की। मेरे साथ एक युवा और भी था। ट्रेनिंग गोपनीय थी। जिसका ब्यौरा यहाँ नहीं दिया जा सकता।
एक महीने बाद हमारी ट्रेनिंग ख़त्म हुई।
ट्रेनिंग ख़त्म होने के बाद दद्दा अपनी नयी-नवेली कार से हमें एक सुनसान जगह पर ले गये।
‘अब तक तुम क्या सीखे हो,उसका एक छोटा-सा टेस्ट होगा!’ रास्ते में दद्दा ने खुलासा किया।
मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर धड़कने लगा। स्पष्ट था कि पास होने पर ही पार्टी में ज्वाइनिंग मिलेगी। कार रुकते ही उन्होंने हम दोनों को उतरने का आदेश दिया। यह शहर से बाहर कोई रिमोट एरिया था। हमारे सामने एक तालाब था। तालाब से मेढ़कों के ज़ोर-ज़ोर से टर्राने की आवाजें आ रही थीं।
‘कुछ सुनाई दे रहा?’ दद्दा ने पूछा।
‘हाँ’
दूसरे लड़के ने भी हामी भरी।
दद्दा ने दूसरा सवाल किया, ‘क्या सुनायी दे रहा?
‘टर्र टर्र!’
‘और तुम्हें!’
‘कट्टर कट्टर!’ दूसरे लड़के ने जवाब दिया।
दद्दा मुस्कुराए। उसकी पीठ थपथपाई। वापस उसको कार में बैठने का आदेश दिया।
फिर मुझसे बोले, ‘बच्चा, तुम फेल हो गए! मैंने तो पहले ही कहा था… तुम से न हो पायेगा…!’👁️





