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सेक्स मृत्यु है और मृत्यु बहुत सेक्सी

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पवन कुमार

    _काम और मृत्यु एक ही चीज के दो छोर हैं। काम मृत्यु है और मृत्यु बहुत कामुक है। यह समझना कठिन होगा।_

     अनेक कीड़े हैं जो प्रथम संभोग में ही मर जाते हैं; पहले संभोग में ही उनकी मृत्यु घट जाती है।

अफ्रीका में मकोड़े की एक जाति है जिसमें नर संभोग में ही समाप्त हो जाता है; वह संभोग से जीवित नहीं लौटता।

     मादा पर चढ़े—चढ़े ही उसकी मृत्यु हो जाती है। पहला संभोग ही मृत्यु बन जाता है। और यह बहुत भयानक मृत्यु है, ठीक वीर्यपात करते हुए वह मरता है।

     और जब वह ठीक से मरा भी नहीं है, मृत्यु—पीड़ा से ही गुजर रहा है, तभी मादा उसे खाने लगती है। और जब संभोग पूरा होता है, मादा उसे आधा खा चुकती है।

काम और मृत्यु दोनों परस्पर जुड़े हैं। इसी कारण मनुष्य काम से इतना भयभीत है।

     जो लोग ज्यादा जीना चाहते हैं, जो लंबी उम्र से मोहित होते हैं, वे सदा काम से भयभीत रहेंगे, जीवन काम से बचेंगे। और जो लोग अमर होना चाहते हैं, ब्रह्मचर्य उनका व्रत होगा।

      लेकिन अब तक न कोई अमर हुआ है और न हो सकता है। कारण यह है कि तुम्हारा जन्म ही कामवासना से है।

अगर तुम्हारा जन्म ब्रह्मचर्य से होता तो बात दूसरी थी; तब अमर होना संभव होता। अगर तुम्हारे मां—बाप ब्रह्मचारी होते तो ही तुम अमर हो सकते थे। तुम्हारे जन्म के साथ ही काम प्रवेश कर जाता है।

       तुम काम में उतरी या नहीं, इससे फर्क नहीं पड़ता है; तुम मृत्यु से नहीं बच सकते। तुम्हारा होना ही, अस्तित्व ही काम से शुरू होता है; और काम मृत्यु का आरंभ है। इसी वजह से ईसाई कहते हैं कि जीसस का जन्म कुंवारी मां से हुआ।

केवल यह बताने के लिए कि जीसस कोई मामूली मनुष्य नहीं थे, मृण्मय मनुष्य नहीं थे, वे कहते हैं कि जीसस का जन्म कुंवारी मां से हुआ। यह बताने के लिए कि उन पर मृत्यु का बस नहीं है, यह मिथक गढ़ा गया।

       यह एक बड़े मिथक का हिस्सा है। अगर जीसस का जन्म काम से हुआ होता तो उन पर मृत्यु का बल बना रहता।

 तब वे मृत्यु से नहीं बच पाते; क्योंकि काम के साथ ही मृत्यु चली आती है। इसलिए ईसाई कहते हैं कि वे काम—कृत्य से नहीं पैदा हुए वे काम की उत्पत्ति ही नहीं हैं।

    और चूंकि वे कुंवारी मां से पैदा हुए थे, इसलिए वे सूली के बाद भी पुनजावित हो उठे।

        उन्होंने उन्हें सूली तो दी, पर वे उन्हें मार नहीं सके। वे जीवित रहे; क्योंकि वे काम से पैदा नहीं थे। वे उन्हें नहीं मार सके; कुंवारी मां से पैदा हुए जीसस का मारना असंभव था।

मृत्यु ही असंभव है। जब आरंभ ही नहीं है तो अंत कैसे हो सकता है? यदि वे कुंवारी मां से नहीं पैदा हुए होते तो मृत्यु निश्चित होती, अनिवार्य होती।

        इसलिए पूरा मिथक गढ़ना पड़ता है। अगर तुम कहते हो कि जीसस कुंवारी मां से नहीं जन्मे तो मिथक का दूसरा हिस्सा—पुनर्जीवन—गलत हो जाता है।

     अगर तुम कहते हो कि वे पुर्नजीवत हो गए, कि उन्होंने मृत्यु को झुठला दिया, व्यर्थ कर दिया, कि मृत्यु उन्हें मार नहीं सकी, कि वे उन्हें सूली नहीं दे सके, कि उन्हें सूली देने वाले धोखा खा गए कि वे जीवित रहे, तब तुम्हें मिथक के पहले भाग को कायम रखना होगा।

        मैं मिथक के पक्ष या विपक्ष में कुछ नहीं कह रहा हूं; मैं सिर्फ यह कह रहा हूं कि पूरे मिथक को कायम रखना है। कोई एक हिस्सा अकेला नहीं रह सकता। अगर जन्म के पहले काम है तो मृत्यु भी वहां होगी।®

Ramswaroop Mantri

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