मुनेश त्यागी
रूस यूक्रेन युद्ध को लगभग 8 महीने होने वाले हैं, मगर यह युद्ध अभी तक रुकने का नाम नहीं ले रहा है और लगातार बढ़ता ही जा रहा है। यूक्रेन रुस युद्ध को बढ़ाने और भड़काने का काम नाटो और अमेरिका ने किया है। इस युद्ध के लिए अमेरिका सबसे ज्यादा जिम्मेदार है। अब इस युद्ध से लगातार जन धन और संपत्ति की हानि हो रही है।
युद्ध पूंजीवाद के तारणहार हैं। युद्ध पूंजीवाद की सबसे बड़ी चालक शक्ति हैं। दुनिया में युद्ध होते रहें, जहां कहीं युद्ध नहीं हो रहे हैं वहां युद्ध कराए जाएं या युद्ध जैसे हालात पैदा कर दिए जाएं, पूरी की पूरी पूंजीवादी युध्दोन्मादी व्यवस्था के लोग यही चाहते हैं। युद्ध उनकी जीवन रेखाएं यानी लाइफ लाइंस हैं। युद्ध उनका अर्थशास्त्र है। युद्ध होंगे तो युद्ध से प्रभावित देश, हथियार खरीदेंगे। हथियार बिकेंगे तो उनके हथियार उत्पादन में बूम आएगा और हथियार निर्माता इससे अकूत धन और मुनाफे कमाएंगे, युध्दों से उनके खजाने और उनकी धन की थैलियां बढ़ती चली जाएंगी और अधिक विशालकाय रूप धारण कर लेंगी।
ऐसी युद्धोन्मादी नीतियां अपनाकर पूंजीवादी पश्चिमी देश अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, कनाडा आदि पहले पश्चिमी एशिया को बर्बाद कर चुके हैं। वहां उन्होंने झूठ बोल बोल कर दुनिया की जनता को गुमराह करके, झूठे बहाने बनाकर, ईराक पर जन विनाश के हथियारों के रखने के झूठे आरोप लगाकर, इराक और लीबिया को तबाह कर दिया था। बाद में ये सारे बहाने और क्लेम झूठे निकले और गलत साबित हुए।
पिछले काफी दिनों से अमेरिका चीन को घेरने के लिए हिंद महासागर और प्रशांत महासागर में भारत, इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और जापान को लेकर एक क्वाड नामक नया संगठन बना रहा है और अब अमेरिका पूरी दुनिया में चीन को बदनाम करने के लिए, इस नए संगठन को हथियारबंद कर रहा है या इसे हथियार बंद करने की जुगत में लगा रहता है तथा हिंद प्रशांत महासागर के क्षेत्र को अशांत दिखाने की भरसक कोशिश कर रहा है।
अब उसी नीति के तहत यूरोप के पूर्वी भाग में यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध करा दिया। यूक्रेन किसी भी दशा में रूस से युद्ध करने की स्थिति में नहीं था, मगर नाटो के इशारों पर, नाटो के सारे सारे देशों ने एकजुट होकर यूक्रेन को युद्ध में झोंक दिया और इस प्रकार रुस को अपने देश को बचाने के लिए, युद्ध करने के लिए मजबूर कर दिया। अगर अमेरिका के नेतृत्व में नाटो संगठन पूर्वी यूरोप के देशों को नाटो में शामिल ना करता और यूक्रेन को नाटो में शामिल करने के लोक लुभावने सपने न दिखाता तो रुस को चिंता करने की जरूरत नहीं थी, उसे आशंकित होने की जरूरत नहीं थी। मगर नाटो देशों ने अपनी युद्धपिपासा की नीति के कारण, यूक्रेन को नाटो में शामिल करने की कोशिश जारी रखी और इस प्रकार इस नीति ने रुस को आशंकित और भयभीत कर दिया, जिसका परिणाम आज हम युद्ध के रूप में देख रहे हैं।
अब हकीकत यह है कि यूक्रेन को युद्ध का सारा सामान हथियार, गोला, बारूद, टैंक, लड़ाकू विमान और युद्ध का तमाम साजो समान नाटो के समस्त देशों अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, पोलैंड वगैरा-वगैरा देशों से मुहैया कराया जा रहा है। हकीकत यह भी है कि यदि नाटो के देश अमेरिका कनाडा ब्रिटेन जर्मनी फ्रांस आदि यूक्रेन को लड़ाकू विमान युद्ध का साजो सामान टैंक गोला बारूद आदि देना बंद कर दें, तो यूक्रेन एक दिन भी युद्ध को जारी नहीं रख सकता।
हकीकत यह भी है कि अब रूस के साथ युद्ध यूक्रेन नहीं, बल्कि नाटो के तमाम देश लड़ रहे हैं। युद्ध में सारा सामान टैंक युद्ध विमान गोला बारूद, रात्रि में काम करने वाले युद्ध हथियार, सब के सब अमेरिका और नाटो द्वारा यूक्रेन को दिए जा रहे हैं और यूक्रेन के लोगों को नाटो और अमेरिका के लोगों द्वारा प्रशिक्षित किया जा रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि ऐसी परिस्थिति में क्या किया जाए?
अब नाटो द्वारा थोपे गए इस युद्ध को समाप्त करने के लिए रूस और यूक्रेन को युद्ध विराम करना होगा। इसमें अमेरिका और नाटो देशों की कोई भी भूमिका नहीं होगी। यह सारा काम यूक्रेन को करना होगा। यूक्रेन को इन पूंजीवादी युद्धपिपासुओं के प्रभाव से बाहर आकर, अपने देश के संसाधनों को बचाने और जनता पर युद्ध के प्रभाव को रोकने के लिए, नाटो की युद्ध-छाया से बाहर आना होगा। युद्ध नहीं शांति के लिए कदमों का सहारा लेकर युद्ध को खत्म करना ही होगा। क्रीमिया को रूस का भाग मानकर, नाटो में जाने की जिद को छोड़ना होगा।
अब यूक्रेन को युद्धाग्रही पक्ष और रुख छोडना होगा। यहां पर दोनों देशों यूक्रेन और रूस को अपनी जनता और संसाधनों को बचाने के लिए मौत की विभीषिका से बचने के लिए और कोई विकल्प नहीं है। यह काम रूस और यूक्रेन को ही करना होगा। इस युद्ध विराम में युध्दोन्मादी नाटो कोई मदद नहीं करने जा रहे हैं।
अमेरिका और नाटो के तमाम देश युद्धोन्मादी और रक्त पिपासु हैं। वे किसी भी तरह से शांति के पैरोंकार और पक्षधर नहीं हैं। इसमें केवल यूक्रेन को ही समझदारी से पहल करनी होगी और अपनी जनता और अपने संसाधनों को बलि का बकरा बनाने से बचना होगा। अब यूक्रेन को ही शांति के पक्ष में पहल करके पूरी दुनिया को तीसरे युद्ध की आशंका और परमाणु युद्ध के आसन्न खतरों से बचाना होगा।





