सरल कुमार वर्मा
जम्हूरी सियासत के माफिक गम मौजू मिले मुझको
रहा इंसान हाशिए पर मुस्लिम हिन्दू मिले मुझको
गुजरे फांके में जिनके दिन उनके मसीहा के घर में
डाइनिंग टेबल के ऊपर सजे काजू मिले मुझको
तिमिर के साथ जिधर गए थे उजाले को तराशने वो
उसी रस्ते में रोशनी के कटे बाजू मिले मुझको
जिन्हे तुम ढूंढ़ते फिरते हो मंदिर और मस्जिद में
वो हर बच्चे के चेहरे में हंसते मौजू मिले मुझको
परेशान तुम हो यू कि इश्क में आंसू मिले तुमको
यहां समझा जिन्हे रहबर वो सब डाकू मिले मुझको
दुनिया में जो कुछ है वो सब मेहनत के दम पर है
“सरल” मेहनत को करते कोई न साधु मिले मुझको
सरल कुमार वर्मा
उन्नाव, यूपी
9695164945





