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शिव दर्शन नगर और शिवनगर में नहीं मनी दिवाली

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बस्ती के लोगो ने मुख्यमंत्री को लिखे पोस्ट कार्ड*

     शिव नगर और शिवदर्शन नगर के रहवासियों के द्वारा शिव नगर और शिवदर्शन नगर को तोड़ने के खिलाफ एवं RE-2 रोड प्रोजेक्ट रद्द करने की मांग करते हुए पोस्ट कार्ड अभियान के तहत मुख्यमंत्री के नाम पोस्ट कार्ड लिखा हैं । 

                                 

इंदौर नगर निगम RE-2 रोड का निर्माण करने जा रहा है, इस रोड को निकालने पर लगभग 650 परिवारों को अपना आशियाना छोड़ना पड़ेगा। यह परिवार पूर्ण रूप से मजदूर परिवार हैं और बेहद ही गरीबी की स्थिति में अपना जीवन यापन करते हैं। लगभग 25 से 30 साल पुरानी यह बसावट हैं। नगर निगम उनका तानाशाही रवैया अपनाते हुए इन बस्तियों को खाली कराने में लगा हुआ है। यह रोड पूरी तरीके से नियमों के विरुद्ध निकाला जा रहा है। अग्रवाल पब्लिक स्कूल से आरटीओ तक जो सड़क निर्माण होगी उसके पास ही में खाली भूमि पड़ी हुई है पर नगर निगम उस खाली जगह पर रोड न निकालते हुए बस्तियों को तोड़ते हुए यह रोड निकाल रहा है। इस रोड की सुनवाई अभी हाई कोर्ट में भी चल रही है और लोग सड़कों पर भी आंदोलन कर रहे हैं। पिछले दिनों महापौर से बातचीत हुई जिसमें उन्होंने आश्वस्त किया है कि वह दोबारा से इस रोड का निरीक्षण करके निर्णय लेंगे पर नगर निगम प्रशासन द्वारा कल ही बस्ती वालों को नोटिस दे दिया गया है कि तुरंत बस्ती खाली करिए *जब पूरा देश दीवाली मना रहा था, तब शिव नगर- शिवदर्शन नगर के मजदूरों के घरों में दिए नहीं जले* क्योंकि नगर निगम ने अपना फरमान जारी कर दिया है कि आप जल्द-से-जल्द अपने घर खाली करिए। ऐसी स्थिति में यह परिवार कहां जाएंगे यह एक सोचने का विषय है। नगर निगम का तर्क है कि हम उन्हें फ्लैट दे रहे हैं, परंतु इस फ्लैट के लिए ₹2 लाख की राशि जमा करा रहे हैं, यह मजदूर दिहाड़ी मजदूर हैं। प्रतिदिन खाने कमाने वाले लोग हैं, ₹2 लाख कहां से लाएंगे। वे इंदौर के शहर वासियों से उनके घर बचाने की अपील कर रहे है।

                           रहवासियों ने बताया कि यह सड़क पूर्णता असंवैधानिक तरीके से गैर-कानूनी ढंग से निकाली जा रही है। पहली बात है कि RE-2 रोड जो निकाला जा रहा है इसी के पास से बायपास सर्विस लाइन लगभग 100 मीटर की दूरी पर होगी। इतने पास एक दूसरा रोड है फिर क्या जरूरत पड़ी के दूसरा रोड बनाया जाए। दूसरा बिंदु है कि जो खाली भूमि पड़ी हुई है क्या उसमें से यह रोड नहीं निकाला जा सकता। यदि यह खाली जमीन से निकाला जाता है तो लगभग 600 परिवार विस्थापित होने से बचेंगे। यह रोड पूर्णता उस इलाके के बड़े-बड़े रियल स्टेट कार्यों को फायदा पहुंचाने के लिए और गरीब मजदूरों को इंदौर शहर से बेदखल करने की इंदौर प्रशासन की रणनीति है। पिछले दिनों इंदौर में कई सारी बस्तियों को तोड़कर इंदौर के बाहर बसाया गया है। भूरी टेकरी, बांगड़दा, गांधी नगर जैसे इलाकों में जो मल्टी में शिफ्ट हुए हैं वह आज भी जन सुविधाओं से वंचित हैं। पोस्ट कार्ड अभियान के द्वारा इंदौर की जनता से अपील की गई कि वह इस बस्ती बचाओ आंदोलन में हमारा साथ दें। नगर निगम द्वारा हमारी इस दिवाली को अंधेरे भरी जिंदगी में बदल दिया है ।।

Ramswaroop Mantri

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