अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

दूसरे देशों में जाकर भारतीय मूल के लोगों को सम्बोधित करना ओछी हरकत

Share

राजेन्द्र चतुर्वेदी

प्रार्थी का यह विचार एकदम स्पष्ट है कि दूसरे देशों में जाकर भारतीय मूल के लोगों को सम्बोधित करना ओछी हरकत है।

दुनिया के किसी भी देश का नेता दूसरे देशों में जाकर इस तरह की हरकत नहीं करता।

 ये होता रहा है कि कोई नेता किसी कॉलेज में पहुंच गया, वहां स्टूडेंट्स से बात की, किसी समारोह में शामिल हो गया, उसमें अपनी बात रखी।

ऐसा नेता सभी से रूबरू होता था, न कि सिर्फ भारतीयों से या भारतवंशी लोगों से।

2014 के बाद से जिन देशों में हमने ये हरकत की है, वे देश बड़े दिल वाले हैं।

कल्पना कीजिए कि हमारे देश में किसी दूसरे देश का नेता आए। वह अपने यहां के लोगों का मजमा लगाए और नौटंकी करे, तो उसे हम किस तरह से लेंगे?

क्या वह पूरी कम्युनिटी ही हमारी नजरों में संदिग्ध नहीं हो जाएगी? 

इस बात को आरएसएस को भी सोचना चाहिए, क्योंकि विदेशों में भारतवंशी लोगों की भीड़ जुटाने का काम हिन्दू सेवक संघ ही करता है जो कि आरएसएस की ही विंग है। 

वैसे आरएसएस को तो यह भी सोचना चाहिए कि यदि कोई मुस्लिम सेवक संघ हो और उसका मुख्यालय सऊदी अरब या ईरान में हो और उसके लोग भारत में आकर मुस्लिमों को संगठित करने का काम करें तो आरएसएस की क्या प्रतिक्रिया होगी?

सोचने को तो बहुत कुछ सोचा जा सकता है लेकिन तब, जब हमारी मानसिकता लोकतांत्रिक हो।

सोचा तो तब नहीं गया, जब अमेरिका में जाकर अबकी बार ट्रम्प सरकार का नारा लगाया गया, जो कि भारत की विदेश नीति की लंका लगाना था, तो अब कौन क्या सोचेगा।

फिलहाल वे बड़े दिल के लोग हैं, सो सब सह रहे हैं, जब उनका दिल संकुचित होगा तब हिन्दू सेवक संघ के लोग तमाम देशों में जेलों में दिखेंगे, हर देश के लोग भारतवंशी लोगों पर संदेह करने लगेंगे।

सो जागो मोहन प्यारे

#हरिबोल

Ramswaroop Mantri

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें