राजकुमार जैन
सोशल मीडिया पर अक्सर कई अभिभावक बिटिया के पराई हो जाने के बारे में अति भावुक पोस्ट लिखते और फॉरवर्ड भी करते रहते हैं, इनको पढ़कर मेरे मन में निम्न विचार आये है, कृपया बताइए मैं सही हूँ या गलत :
बिटिया बड़ी हो गई, शादी हो गई, आपने यह सोचकर ही शादी की थी कि अब वो अपना घर संसार बसायेगी, तो अब उसका अपना घर है और उसे उसके अपने घर को अपना घर समझने दें और उसे अपने घर में सुख से रहने दें । भावनात्मक रूप से सबल होने में उसकी मदद करे, उसकी भावनाओं को समझे और उसे अपना घर संसार बसाने में मदद करे, इस तरह की नकारात्मक भावनात्मक बाते कर के उसके मन को कमजोर ना करें ।
बात को समझें और भावनात्मक तर्क ना करें, अब उसका अपना घर है और यह वो सच्चाई है जो उसकी मां, उसकी नानी, उसकी दादी आदि ने स्वीकारने में ना जाने कितने बरस लगा दिए थे ।
और एक बात अपना स्वयम का घर एक ही होता है, मकान कई हो सकते है लेकिन घर तो घर एक ही होता है ।
बिटिया का अपना घर संसार, उसे नई जमीन में जड़ें जमाने दें, इन भावनाओं से भरी बातों को सुनकर वो ना इधर की रह पाती है ना उधर की, उसको समझ नहीं आता कि उसका घर कौनसा है ? वो उधर जमने का प्रयास करती है तो इधर वाले उसे खींचते है और इधर आती है तो वापस उधर जाना ही होता है ।
बेहतर यही होगा कि उसे राजी खुशी अपना निजी घर संसार बसाने दें, इस काम में उसकी मदद करें और जो मदद ना कर सकें तो कम से कम उस पर भावनाओं का दबाव बनाकर उसे कमजोर ना बनाएं ।
मुझे पता है मेरी बात सही तो लगेगी परन्तु आसानी से गले नहीं उतरेगी तो चलिए मुझे बताइए:-
आपकी माँ का घर कौनसा है ?
आपकी दादी का घर कौनसा है ?
आपकी नानी का घर कौनसा है ?
आपकी बुआ का घर कौनसा है ?
सोचिए, विचारिये और अपनी बिटिया को समझाइश दीजिये कि शादी के बाद वो जिस घर में गई है वो ही उसका घर है और जितनी जल्दी वो इस बदलाव (जो कि आज नहीं तो कल घटित होकर रहेगा ही) को मन से स्वीकार कर लेगी उतने ही भावनात्मक दुःख कम होंगे और खुशी बढ़ेगी ।
– राजकुमार जैन





