पुष्पा गुप्ता
एक दिन मेरा 9 साल का भतीजा मेरे पास आया और मुझसे पूछा : “मुझे बताओ, टमाटर फ्रूट है या वेजिटेबल।
मैंने भी बड़ी लापरवाही से जवाब दे दिया कि,” सब्जी है, इतना भी नहीं पता ।” इतना ही सुनते वह भड़क गया कि “नहीं मैम ने बताया है कि टमैटो फ्रूट होता है।”
भागकर गया और अपनी किताब उठाकर ले आया जिसमें यह लिखा था कि” टमैटो इज फ्रूट आर वेजिटेबल ।(tomato is a fruit or a vegetable)” जिसका आंसर था फ्रूट। इतना देखते ही मेरा तो सर ही चकरा गया।
अरे यह कब हुआ ? हमने तो बचपन में जब पढ़ाई की तो टमाटर को हमेशा 10 सब्जियों के लिस्ट में ही पाया, आलू, टमाटर, मूली, प्याज वगैरह के साथ में।
यह मुआ टमाटर फल कब बन गया? तो मैंने बेटे को समझाया कि “हो सकता है कि तुम्हारी मैडम ने गलत टिक लगा दिया हो फ्रूट वाले ऑप्शन पर, है तो बेटा यह सब्जी ।” इस पर बेटा तुनक गया कि “मेरी मैम कभी गलत नहीं बता सकती ।”
अब तो मेरे सामने भी कोई और रास्ता नहीं बचा था तो मैंने इस दुविधा के घड़ी में सर्वज्ञानी हमारे गूगल महाराज का सहारा लिया । जैसे ही रिजल्ट आउट हुआ मेरी तो आंखें फटी की फटी रह गईl
यह क्या! वास्तव में टमाटर एक फल है । हमारे सुपुत्र तो मारे खुशी के उछल ही पड़े लेकिन मेरा मन अभी यह मानने को तैयार नहीं था की टमाटर एक फल है।
और हो भी क्यों ना, अगर टमाटर फल है तो वह सब्जियों के बीच में क्यों पड़ा रहता है? मैंने टमाटर को कभी किसी फल के ठेले पर नहीं देखा, मैंने उसे हमेशा सब्जियों के ठेले पर ही पाया । मैंने आज तक नहीं देखा कि टमाटर को फलों की श्रेणी में रखते हुए किसी बीमार को अंगूर और केले के साथ में गिफ्ट किया गया हो।
मैंने कभी किसी को टमाटर का जूस पीते नहीं देखा, लोग तो टमैटो सूप पीते हैं । फ्रूट सैलेड या कस्टर्ड में भी टमाटर कभी नहीं होता । टमाटर का और फलों की तरह जैम नहीं, चटनी बनती है। सब कुछ पहले जैसा ही है फिर अचानक यह टमाटर सब्जी की जगह फल कैसे हो गया?
मैं भी सोच सोच कर थक चुकी थी तो मैंने सोचा इस सवाल का जवाब में टमाटर से ही पूछ लेती हूं। मैं तुरंत टमाटर के पास पहुंची और पूछा,” क्यों टमाटर भैया ! तुम फल हो कि सब्जी ?” इस पर टमाटर ठंडी आह भरते हुए बोला, “अब क्या बताऊं, बहन! आपसे क्या छुपाना।
जब तक मैं सब्जियों के ग्रुप में था, मैं भी आम जिंदगी जी रहा था, लेकिन जब से मुझे फ्रूट ग्रुप में शामिल किया गया है, तब से मेरी हालत धोबी के उस कुत्ते की तरह हो गई है जो ना घर का होता है, ना घाट का । मैंने भी बड़े आश्चर्य से पूछा , ” क्यों ऐसा क्या हो गया? अब तो आपके भी सेब, संतरे और अंगूर की तरह जलवे होंगे ?” तो टमाटर ने अपनी व्यथा बताई की, “फ्रूट तो मैं सिर्फ कहने के लिए हूं।
फ्रूट ग्रुप ने मुझे आज तक कभी एक्सेप्ट नहीं किया, ना कभी अपने साथ किसी ठेले पर बैठने देते हैं और ना ही अपनी कोई पार्टी फंक्शन (dishes/पकवान)अटेंड करने देते हैं। फ्रूट ग्रुप में शामिल होने के बाद मेरे भी भाव बढ़ गए, तो लोगों ने मुझे खरीदना ही बंद कर दिया । उसी जगह लोग ₹100 किलो सेब खरीद लेते हैं पर मुझे कोई नहीं खरीदता । लोग आज भी मुझे सब्जियों में ही यूज करते हैं, कोई मुझे सेब, संतरे के साथ किसी के सामने सर्व नहीं करता । फ्रूट या वेजिटेबल के चक्कर में मेरी बड़ी मटियापलीद हो गई है।
इतना कहकर बेचारा टमाटर फफक फफक कर रोने लगा” टमाटर की व्यथा सुनकर मेरा तो मन ही द्रवित हो गया। मैं टमाटर के खोए हुए स्थान को वापस दिलाने के लिए आवाज उठाती हूं :
_नहीं सहेंगे, नहीं सहेंगे ! अब यह अत्याचार ,नहीं सहेंगे ! टमाटर को उसका हक वापस दो!!_





