मुनेश त्यागी
भारतीय रोड ट्रांसपोर्ट मिनिस्ट्री द्वारा पार्लियामेंट में दी गई सूचना के अनुसार पिछले 5 साल में सड़क दुर्घटनाओं में 3 लाख 36 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। सड़क और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने लोकसभा को बताया कि 2021 में 1लाख 54 हजार से ज्यादा लोगों की मौत सड़क दुर्घटना में हुई है।
जब से इस सरकार ने सड़क दुर्घटनाओं में हुई मौतों के आंकड़े जुटाने शुरू किए हैं तब से लेकर आज तक, 2021 में हुई मौतें सबसे ज्यादा हैं। इन दुर्घटनाओं की वजह से हुई मौतों के सबसे बड़े कारण गाड़ी चलाते वक्त मोबाइल से बात करना, शराब पीकर गाड़ी चलाना, ट्रैफिक लाइट का उल्लंघन करना, हेलमेट न लगाना और सीट बेल्ट न लगाना है और टूटी हुई सरकारी सड़कों और सरकारी राज मार्गो की समय से मरम्मत न कराना है। ऐसी खबरें आये दिन सुनने और पढ़ने को मिलती रहती हैं कि गड्ढों में सड़कें हैं।
यह बात भी नोट करने की है कि हमारे देश में प्रतिवर्ष 5 लाख से ज्यादा सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। इनमें से लाखों लोग अपंग हो जाते हैं, उनके हाथ पैर टूट जाते हैं और बहुत सारे लोग अपनी जिंदगी से हाथ धो बैठते हैं। यहीं पर यह बात भी नोट करने वाली है कि सड़क दुर्घटनाओं में सबसे ज्यादा मौतें सिर में आई चोटों की वजह से होती हैं। अगर वाहन चालक हेलमेट का प्रयोग करें तो बहुत बड़ी संख्या में लोग सड़क दुर्घटना में हुई मौतों से बच सकते हैं।
अगर सड़क दुर्घटना में मरने वाले और घायल होने वाली हकीकत के पीछे जाया जाए तो उपरोक्त कारणों के अलावा दुर्घटना होने के मुख्य कारण हैं,,, वाहन चालकों को यातायात के नियमों की जानकारी न होना, तेज गति से और बहुत ही हड़बड़ी में वाहन और गाड़ियां चलाना और गलत साइड से सड़क पार करना। हम अपने जीवन में रोज देख रहे हैं कि सड़क यातायात नियमों का सबसे ज्यादा उलंघन दोपहिया वाहन चालक नौजवान लड़के और लड़कियां करती हैं। इन्होंने तो जैसे कसम खा रखी है कि हमें सड़क नियमों का पालन ही नहीं करना है। इनमें से बहुत सारे दुपहिया वाहन चालक गलत साइड से आते हैं, बिना हाथ दिए मुड़ जाते हैं और रॉन्ग साइड से सड़क पार करते हैं।
इसके लिए जरूरी है कि इन सड़क दुर्घटनाओं की वजह से समाज पर और विशेष रूप से माता-पिता ऊपर बहुत ज्यादा विपरीत प्रभाव पड़ता है। कई मां-बाप तो अपनी इकलौती संतान सड़क दुर्घटनाओं में खो देते हैं और सारी उम्र इस हादसे से उबर नहीं पाते हैं। सड़क दुर्घटनाओं के कारण बहुत सारे परिवार इलाज कराने में आर्थिक रूप से टूट जाते हैं, लुट पिट जाते हैं। हमारा मानना है कि इन सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सबसे पहले मां बाप को आगे आना होगा, यानी कि इन दुर्घटनाओं को रोकने के लिए परिवार स्तर से भी पहल करनी होगी।
मां बाप को अपने बेटे बेटियों को समझाना होगा कि वे किसी भी दशा में सड़क नियमों का पालन करें, सड़क नियमों के विपरीत काम न करें, तेज गति से वाहन न चलाएं, दारू पीकर वाहन न चलाएं और मोबाइल से बात करते समय वाहन को बंद कर दें और एक साइड में खड़ा करके ही बात करें और हर हाल में सीट बेल्ट लगाकर ही गाडी चलायें, रॉन्ग साइड से किसी भी चलती गाड़ी को ओवरटेक ना करें और तमाम वाहन चालको को ड्राइविंग लाइसेंस जारी करते समय हिदायत दी जानी चाहिए कि अगर उन्होंने दो बार से अधिक सड़क परिवहन नियमों का उल्लंघन किया तो, उनका ड्राइविंग लाइसेंस सदा सदा के लिए रद्द कर दिया जाएगा।
यह भी पता चला है कि इतनी बड़ी संख्या में सड़क दुर्घटनाओं में हो रही मौतों से बचने के लिए सरकार सड़क किनारे ट्रॉमा सेंटर की योजना शुरू करने जा रही है जो मोटर दुर्घटना के कारण हुई सभी घटनाओं को कवर करेगा। इसी के साथ साथ यह भी जरूरी है की सरकार ऐसी स्वास्थ्य योजनाएं शुरू करें जिसमें दुर्घटना में घायलों को तुरंत ही स्वास्थ्य की कैशलेस सुविधाएं मिलें और घायलों के इलाज में होने वाली देरी से बचा जा सके और उन्हें तुरंत ही प्राथमिक मेडिकल ऐड मिल जाए।
अब से 10 साल पहले भी ये आंकड़े डराने वाले थे। उस समय सड़क दुर्घटनाओं में प्रतिवर्ष 1,30,000 से ज्यादा आदमी सड़क दुर्घटना में मौत के शिकार हो जाते थे। इसके बाद इन सब से परेशान होकर हमने अपने सभी क्लाइंटों को हिदायत दी कि अगर वे हेलमेट पहने बिना हमारे पास आएंगे तो हम उनका केस नहीं लड़ेंगे। हमारे इस कड़े रुख का सम्मान करते हुए हमारे अधिकांश क्लाइंटों ने दो पहिया वाहन चलाते समय हेलमेट का प्रयोग शुरु कर दिया है और वे इस बात के लिए हमें लगातार धन्यवाद देते रहते हैं और कई कई क्लाइंट तो हमें इसके लिए धन्यवाद का पात्र ठहराते हैं। हम भी यहां पक्के साथ कह सकते हैं कि हमने अपने कड़े रुख की वजह से कई सारे लोगों को दुर्घटनाग्रस्त होने से और दर्दनाक मौतों से बचा लिया है।
उपरोक्त डराने वाले आंकड़ों को देखकर हम तो यही कहेंगे कि वाहन चालक सड़क दुर्घटनाओं से बचने के लिए हेलमेट लगाएं, सीटबेल्ट लगाएं, मोबाइल पर बात करते समय वाहन न चलाएं, शराब पीकर नशे में वाहन ने चलाएं, रॉन्ग साइड से सड़क पार न करें, बहुत तेज गति से, जल्दी में और हड़बड़ी में वाहन न चलाएं, ट्रैफिक लाइट को मनमाने रुप से जंप ना करें और रॉन्ग साइड से सड़क पार न करें, वाहनों को ओवरस्पीड से ना चलाएं, रोंग साइड से गाड़ी को ओवरटेक ना करें और सरकार सभी सरकारी और राष्ट्रीय राजमार्गों का और टूटी हुई सडकों की समय से मरम्मत कराए, जिस कारण लाखों सड़क दुर्घटनाओं से बचा जा सकता है
सरकार इन नियमों का सख्ती से पालन कराएं और इसमें मां बाप और परिवार भी अपने बच्चों पर पर्याप्त ध्यान दें और उन्हें किसी भी दशा में सड़क परिवहन के नियमों का उल्लंघन ना कर देने दें और उन्हें सड़क परिवहन नियमों का पालन करने की शिक्षा दें ताकि उन्हें अनावश्यक रूप से होने वाली सड़क दुर्घटनाओं से बचाया जा सके और अपने परिवार को सड़क दुर्घटना के फल स्वरुप होने वाले आर्थिक बर्बादी और मानवीय क्षति से बचाया जा सके।





