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अवैध शराब तस्करी और लोगों की मौत के लिए राजनीतिक संपर्क जिम्मेदार ..भोपाल एसी के बाद अलिराजपुर डीईओ ने भी कलेक्टर के नोटिस का जवाब नही दिया…जेल जाएँगे तीन बड़े आबकारी अफसर

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जिन भ्रष्ट आबकारी अफसरों को राजनीतिक संरक्षण, वो कलेक्टर सहित वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशो का पालन नही कर रहे है
                राजेन्द्र के.गुप्ता


भोपाल/अलिराजपुर ।कहते है लच्छेदार भाषण देने की कला में पारंगत होना वर्तमान राजनीति की पहली जरूरत हो गई है । शायद इसलिए उन भ्रष्ट अफसरों को मलाईदार जिलों में पोस्टिंग मिल जाती है, जिनके संबंध राजनीति में सफल राजनेता के गुरु या वरिष्ठ से संबंध है, फिर भले ही वो भविष्य में उनके राजनीतिक पतन का कारण क्यों ना बन जाए ! पर जब तक पतन ना हो जाए समझ में कहा आता है ! मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल हो या गुजरात सीमा से लगा जिला हो, दोनो जिलों में इतने भ्रष्ट आबकारी अफसर पदस्थ है, जिन पर सरकार को मोटे राजस्व का चुना लगाना, शराब तस्करों को मदद करना, इसको बढ़ाना विभागीय जाँच में प्रमाणित हो चुका है। अब अलिराजपुर डीईओ विनय रंगशाही पर मुख्यमंत्री जी के निर्देश अनुसार अवैधानिक शराब विक्रय पर रोक नही लगाने सहित अन्य गंभीर आरोपों के चलते, कलेक्टर सुरभी गुप्ता ने नोटिस जारी किया है । अब देखना ये है की उप निर्वाचन के दौरान साँची शराब तस्करी करने के मामले में भोपाल एसी संजीव दुबे से 10 दिन में जवाब माँगा था, जो वरिष्ठ अधिकारियों को अब तक नही मिला है, ना कार्रवाही आगे बढ़ी है ! उसी तरह अलिराजपुर डीईओ रंगशाही के मामले में भी जवाब नही मिलने की उम्मीद की जा रही है । इन दोनो प्रकरणो से यह प्रमाणित हो रहा है कि, कही ना कही सरकार में शामिल या सरकार में रसूख़ रखने वाले नेता और अफसर पूरे सिस्टम को तहस-नहस कर देना चाहते है, ऐसे भ्रष्ट अफसर वरिष्ठ अफसरों के निर्देशों का मूल्य समाप्त कर देने में लगे है, यह परिपाटी नेताओं के लिए ही कब्र खोदेगी, ये नेताओं को सरकार जाने के बाद में ही समझ में आती है … खबर अभी जारी है …..अब देखना ये है कि अलिराजपुर डीईओ रंगशाही कलेक्टर को तीन दिन में जवाब देते है या भोपाल एसी की तरह अपने वरिष्ठ अधिकारी के आदेश को हवा में उड़ा देते है …..यही कारण है कि उज्जैन, खरगौन और अब मुरैना में हुई मौतों के लिए जितने पुलिस और आबकारी अफसर जिम्मेदार है उतने ही इन जैसे भ्रष्ट अफसरों को संरक्षण देने वाले नेता भी दोषी है । सरकार के जाने के लिए भी ऐसे ही लोग दोषी होते है जो सरकार को गलतफहीम के पालने में झुलाते रहते है ….

*दबंग PS रस्तोगी ने जारी की अनुमति*
सरकार को मोटा आर्थिक चूना लगाने वाले, भ्रष्टाचार में डूबे बेलगाम आबकारी अफ़सरों पर नकेल कसने वाली वाणिज्यिक कर मंत्रालय की दबंग प्रमुख सचिव श्रीमती दीपाली रस्तोगी ने उन तीन आबकारी अफसरों को जेल भेजे जाने का रास्ता खोल दिया है, जिनके यहाँ लोकायुक्त, EOW ने आय से अधिक सम्पत्ति के मामलों में अपराध दर्ज करके, सम्पत्ति जप्त की है । पीएस रस्तोगी के पास डीसी एन.के.जामोद, एसी जगदीश राठी और पराक्रम सिंह चन्द्रावत के विरुद्ध कोर्ट में चालान पेश करने की अनुमति लंबित थी । जिसमें से चन्द्रावत के प्रकरण में आबकारी आयुक्त राजीव चन्द्र डूबे के पास अभिमत के लिए फाईल पिछले छः महीने से पेंडिंग है, जबकि पीएस ने चार सप्ताह में अभिमत भेजने के निर्देश दिए थे, अब इस मामले में रिमांडरभेजा गया है । एसी राठी और डीसी जामोद में से,  राठी के विरुद्ध कोर्ट में चालान पेश करने की अनुमति जारी कर दी गई है । राठी के रिटायरमेंट में एक माह के लगभग अवधि बची है, वही जामोद लगभग 05 माह में रिटायर्ड होने वाले है । शासन द्वारा भ्रष्ट अधिकारियों के विरुद्ध चालान पेश करने की अनुमति नही देने या लम्बे समय तक लंबित रखने के मामलो को लेकर हाईकोर्ट में दाखिल जनहित याचिका में विधि मंत्रालय और जीएडी के पीएस को तलब किया जा चुका है । चन्द्रावत के मामले में भी जीएडी ने पत्र लिखा है अर्थात् इन सभी के विरुद्ध कोर्ट में चालान पेश करने की अनुमति शीघ्र ही जारी करना पड़ेगी और हो सकता है सख़्ती के चलते कोर्ट उन्हें जेल भेज दे, क्योंकि चन्द्रावत के यहाँ 43 प्रतिशत से अधिक आय से अधिक सम्पत्ति मिली है, वो भी तब जब जाँच एजेंसी लोकायुक्त ने चन्द्रावत के द्वारा दी गई सभी जानकारी को मान्य कर लिया है ….

Ramswaroop Mantri

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