अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

“इंकलाब जिंदाबाद”दुनिया का सबसे क्रांतिकारी नारा

Share

,मुनेश त्यागी

    भारत के इतिहास में मौलाना हसरत मोहानी ने 1921 में “इंकलाब जिंदाबाद” का नारा सबसे पहले दिया था, यानी कि इसकी रचना मौलाना हसरत मोहानी ने की थी। इसके बाद इस नारे का प्रयोग भारत के क्रांतिकारियों और स्वतंत्रता संग्राम के आंदोलनकारियों द्वारा किया गया और इसके बाद यह नारा देश के किसानों मजदूरों नौजवानों का मुख्य नारा बन गया।

    भारत के क्रांतिकारी इतिहास में इंकलाब जिंदाबाद के नारे को प्रयोग करने का सबसे ज्यादा श्रेय हिंदुस्तान समाजवादी रिपब्लिकन एसोसिएशन के सदस्यों को जाता है। इसी नारे को भगत सिंह, बटुकेश्वर दत्त और विजय कुमार ने सबसे पहले 8 अप्रैल 1929 को असेंबली में पर्चा फेंकते वक्त लगाया था और हिंदुस्तान समाजवादी रिपब्लिकन एसोसिएशन के सदस्यों ने भारत के आजादी के आंदोलन और भारत के क्रांतिकारी इतिहास में सबसे पहले इस नारे का इस्तेमाल किया था।

   आज जब हमने इस तथ्य को फेसबुक पर डाला तो बहुत सारे लोगों को विश्वास ही नहीं हुआ। कई सारे लोगों ने सवाल पूछा कि आप यह क्या कर रहे हैं? यह क्या लिख रहे हैं? उनका कहना था कि इस नारे को तो भगत सिंह ने बनाया और लगाया था, ऐसा इतिहास की पुस्तकों में कई विद्यालयों में पढ़ाया जा रहा है। मगर हम उनको यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि इस नारे की रचना मौलाना हसरत मोहानी ने 1921 में की थी। बाद में भगत सिंह और उनके साथियों ने अपने क्रांतिकारी समाजवादी अभियान में और भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में इस नारे का जमकर इस्तेमाल किया और आज यह नारा किसानों, मजदूरों, नौजवानों और दुनियाभर की समाजवादी और क्रांतिकारी ताकतों का सबसे प्रमुख और सर्वश्रेष्ठ क्रांतिकारी नारा बना हुआ है।

     उसके बाद से आज तक यह नारा भारत का के किसानों, मजदूरों, नौजवानों, विद्यार्थियों और संघर्षरत जनता का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाला नारा बना हुआ है। इसका आज भी कोई सानी नहीं है। आज भी भारत के और दुनिया के क्रांतिकारी आंदोलनों में इस नारे का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। इंकलाब जिंदाबाद यानी Long live Revolution।

      हालांकि इंकलाब का नारा सबसे पहले फ्रांसीसी क्रांति में इस्तेमाल किया गया था मगर भारत में “इंकलाब जिंदाबाद” के नारे का इस्तेमाल सबसे पहले 1921 में मौलाना हसरत मोहनी ने किया था और तभी से भारत की क्रांतिकारी और संघर्षरत ताकतों का यह सबसे प्यारा, सम्मानित और क्रांतिकारी नारा बना हुआ है।

      भारत और पूरी दुनिया में क्रांतिकारी शक्तियां और संघर्षरत ताकतें, अपनी बुनियादी समस्याओं को पाने के लिए जो नारा इस्तेमाल करती हैं उनमें सबसे ज्यादा “इंकलाब जिंदाबाद” यानी “Long live Revolution” का नारा ही बुलंद किया जाता है, इसलिए यह नारा आज भी दुनिया का सबसे बुलंद नारा बना हुआ है और जो ताकतें इस नारे को लगाती हैं वे अपने को धन्य समझती हैं, अपने को अहोभाग्य समझती हैं, अपने को क्रांतिकारी समझती हैं और उन्हें जनता भी क्रांतिकारी मानती है। हम भी इस नारे को क्रांतिकारी संघर्षों में लगाने के बाद और यहां फेसबुक पर लिखने के बाद, अपने को धन्य समझ रहे हैं।

     भगत सिंह और उनके साथी, जब उन पर चल रहे मुकदमे को लेकर अदालत में आते थे तो उनके साथी जो दो सर्वप्रमुख नारे लगाते थे, उनमें पहला था “इंकलाब जिंदाबाद” और दूसरा था “साम्राज्यवाद मुर्दाबाद”। भगत सिंह और उनके साथियों को यह श्रेय जाता है कि उन्होंने इस नारे को लोकप्रिय बनाया और इसे साम्राज्यवाद के खिलाफ और साम्राज्यवादी व्यवस्था के विकल्प के रूप में पेश किया।

      “क्रांति और इंकलाब जिंदाबाद”, से हिंदुस्तानी समाजवादी रिपब्लिकन एसोसिएशन के सदस्यों का अभिप्राय था कि एक ऐसी व्यवस्था कायम की जाए जो मार्क्सवादी सिद्धांतों पर आधारित हो, जिसमें किसानों मजदूरों का राज हो, जिसमें  सामाजिक, राजनीति की और आर्थिक आजादी हो और जनता में समता, समानता, बराबरी, भाईचारा और धर्मनिरपेक्षता की भावना हो और पूरी व्यवस्था समाजवादी सिद्धांतों पर आधारित हो और एक ऐसी व्यवस्था जिसमें सबको रोटी, कपड़ा, मकान, सरकारी शिक्षा और मुफ्त स्वास्थ्य, रोजगार और बुढ़ापे की पेंशन का मुकम्मल प्रबंध हो।

    भगत सिंह और उनके साथी एक ऐसे ही समाज का निर्माण करना चाहते थे और ऐसे ही समाज का निर्माण करने के लिए वह शोषण, अन्याय, जुर्म, भेदभाव, ऊंच-नीच, छोटा बड़ा वाली सोच, संस्कृति और मानसिकता को सदा सदा के लिए बदलना चाहते थे, ऐसी सोच और मानसिकता का सदैव के लिए खात्मा करना चाहते थे और एक ऐसा समाज की स्थापना करना चाहते थे जिसमें सबको रोटी मिले, सबको रोजी मिले, सब को घर मिले, सब को रोजगार मिले सबको स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जायें। इसी नारे को अमलीजामा पहनाने के लिए और भारत मां की गुलामी की बेड़ियां तोड़ने के लिए भगत सिंह राजगुरु सुखदेव और दूसरे अनेक साथियों ने आजादी की बलिवेदी दी पर अपने प्राण न्योछावर कर दिए और उनके बहुत सारे साथियों ने जेलों की लंबी-लंबी सजाएं काटीं और जेल से बाहर आकर भी वे लोग यही काम करते रहे, यानी भारत में क्रांति करके समाज में आमूलचूल परिवर्तन करना और सदियों पुराने शोषण, अन्याय, जुल्म गैर बराबरी और भेदभाव का खात्मा करना।

     क्रांति से उनका अभिप्राय एक ऐसी व्यवस्था से था कि जिसमें ना गरीबी हो, ना अमीरी हो, ना भुखमरी हो, ना नग्नता हो, सब सुखी हों, सब खुश हों, पंचायती राज हो और प्राकृतिक संसाधनों पर सारे समाज का विकास हो और उनका प्रयोग सारी की सारी जनता के विकास के लिए और उसकी बढ़ोतरी के लिए, प्रगति के लिए किया जाए।

     भगत सिंह और उनके साथियों के बाद इंकलाब जिंदाबाद का नारा, भारत के किसानों, मजदूरों, नौजवानों, विद्यार्थियों, संघर्षशील जनता और क्रांतिकारी समाज की स्थापना करने वाले लोगों, का मुख्य नारा  बना हुआ है। इसी नारे को भारत की आजादी के आंदोलन में और  जनता में फैलाने, प्रचार-प्रसार करने का काम, हिंदुस्तान समाजवादी रिपब्लिकन एसोसिएशन के सदस्यों के हिस्से में आया और शहीदे आजम भगत सिंह के नेतृत्व में उन्होंने इसका बखूबी इस्तेमाल किया और उसे भारत की जनता का मुख्य नारा बना दिया। इंकलाब जिंदाबाद, समाजवादी समाज और मार्क्सवादी आदर्शों पर आधारित समाज से हमारा यही तात्पर्य है, यही अभिप्राय है। संक्षेप में इंकलाब जिंदाबाद का यही सार है और यही मकसद है।

        आइए, हम भी  शहीदे-आजम भगत सिंह और उनके साथियों का और स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन के बाद किसानों, मजदूरों, सारे मेहनतकशों, छात्रों और नौजवानों, का प्यारा नारा बुलंद करें और इंकलाब यानी क्रांति के नारे को और क्रांति के अर्थ और अभिप्राय को, जनता के बीच में ले जाए और किसानों मजदूरों नौजवानों छात्रों महिलाओं और पूरी जनता के बीच इसका प्रचार प्रसार करें और इस नारे  की तामीर को धरती पर उतारने के अभियान में शामिल हों और इस अभियान को आगे बढ़ाएं, विस्तार दें,,,,,इंकलाब जिंदाबाद, साम्राज्यवाद मुर्दाबाद।

Ramswaroop Mantri

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें