डॉ विनोद कुमार चौधरी
सरकारी स्कूल के एक साधारण शिक्षक ने अपनी धर्मपत्नी के साथ मिलकर अपनी जीवन भर की कमाई, धनसंपदा और पेंशन खर्च करके हल्दीघाटी में महाराणा प्रताप का एक शानदार म्यूजियम बनाया।। राजस्थान की घुमाई करते हुए मुझे भी यह पावन धरती देखने का मौका मिला और बच्चों को भी महाराणा प्रताप की वीर गाथाओं से अवगत करवाया।।
इस म्यूजियम में यह साफ-साफ बताया कि महाराणा प्रताप और मुगलों की लड़ाई हिंदू मुस्लिम की लड़ाई बिल्कुल भी नहीं थी। सबूत के तौर पर, महाराणा प्रताप का सेनापति एक मुस्लिम नौजवान था और जयपुर के राजा सवाई मानसिंह अकबर की तरफ से सेनापति बनकर मुगल सेना की अगुवाई करते हुए महाराणा प्रताप पर चढ़ाई कर रहे थे।।
यहां तक कि महाराणा प्रताप का सगा भाई भी मुगलों की तरफ से महाराणा प्रताप के खिलाफ लड़ा और अंतत: दोनों भाइयों में सँधी हुई और दोनों फिर से एक हुए।।
निसंदेह भारत का इतिहास बहुत विराट और जटिल है, समझने के लिए।। और इसी का फायदा घटिया पॉलिटिकल पार्टीयां, हिंदू मुस्लिम की लड़ाई दंगे लगाने के लिए और 10 पैसे की मीडिया घटिया ज्ञान फैलाने के लिए करती है।
वहां स्कूल के बच्चों से जब बातचीत हुई तो वह लोग भी बेहद अचरज में थे कि अभी तक हमने केवल यही सुना था, कि हिंदू मुस्लिम की लड़ाई और हिंदू धर्म की रक्षा के लिए ही महाराणा प्रताप लड़ रहे थे। परंतु असली लड़ाई मातृभूमि की रक्षा के लिए हो रही थी ना कि धर्म के नाम पर।
इसलिए हमारे महान योद्धाओं की वीर गाथाएं, किसी ढाई पैसे की मीडिया और घटिया नेताओं से सुनने की बजाय; असली इतिहासकारों से सुनी जाए और सही किताबें पढ़ी जाए।। इसके साथ साथ अगर बच्चों को ऐतिहासिक जगह पर घूमने के लिए सरकार छात्रवृत्ति देना चालू करें तो सोने पर सुहागा होगा।।
व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर मैं बेहद चिंतित हूं; क्योंकि आगे आगे ऐसे ऑनलाइन विश्वविद्यालयों की भरमार हो रही है, और असली विश्वविद्यालयों से जानबूझकर प्रोफेसरों को गायब किया जा रहा है।। और मेरा अंदाजा यह है कि भविष्य में सरकारी विश्वविद्यालयों को होटल में तब्दील करके उनसे पैसा कमाने के बारे में बौद्धिक गुलामी के नेता जरूर सोचेंगे, या यूं कहें कि सोच चुके हैं, लेकिन अभी कर नहीं पा रहे हैं।
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डॉ विनोद कुमार चौधरी





