विजय दलाल
*ऑक्सफेम की रिपोर्ट है किसी समाजवादी या वामपंथी ने नहीं कहा कि इस राज में अमीरी और ग़रीबी के बीच खाई किस कदर बढ़ी है।*
*2017 में देश की महज 1 फीसदी आबादी के पास देश की 70 फीसदी दौलत इकट्ठी हुई, जबकि देश की 67 फीसदी आबादी की दौलत में महज 1 फीसदी का इजाफा हुआ।*
*वर्ष 2018 से 2022 के बीच देश में औसतन 70 करोड़पति रोज बनते रहे, भारत में हर अरबपति एक दशक में अपनी दौलत 10 गुना बढ़ा ले रहा है।*
*वहीं कपड़ा उद्योग का उदाहरण लें भारत का एक औसत श्रमिक या कर्मचारी यदि अपने उधोग के उच्च वेतन प्राप्त अधिकारी के बराबर आमदनी चाहे तो इसके लिए उसे 941 साल यानी उसकी पचास पीढ़ियां लग जाएगी।*

ये सरकार का विकास का गुजराती शायलाक माडल है।*
*इस सरकार को 60 साल में जनता की मेहनत और पैसे से निर्मित सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र को बेच कर पैसा इकट्ठा करना है और निजी क्षेत्र को सौंपना है।*
*सबसे बड़ा देश का श्रमिक वर्ग किसान है 2017 में इस सरकार ने वादा किया था कि किसानों की आय दोगुनी हो जाएगी।*
*2023 आ गया है क्या हुआ?
क्या हुआ गारंटी तो छोड़ो* एमएसपी अभी भी लागत से दूर है। *किसानों को एमएसपी की गारंटी दे देंगे तो एक तरफ तो 80 करोड़ लोगों को मोदी जी के फोटो की छपी थैली में कम से कम 2024 तक के चुनाव जीतने तक तो अनाज बांटना है तो सरकार को ही सबसे पहले किसानों से महंगा अनाज खरीदना पड़ेगा।*
*और फिर अपने प्रिय कार्पोरेट मित्रों को अपने मुनाफे और बढ़ाने के लिए खरीदने के लिए सस्ते में किसानों की उपज और किसानों के कर्जदार होने पर उनकी जमीनें।*
*बड़े पूंजीपतियों के मुनाफे के लिए स्मार्ट शहर योजनाओं के लिए खेती और गांव छोड़कर आया असंगठित सस्ता प्रवासी मजदूर भी तो चाहिए।*
*80 करोड़ गरीब आबादी का लगभग 75 फीसदी हिस्सा गांवों में रहता है।*
*निजी क्षेत्र आम जनता की मेहनत से कमाए धन की बैसाखियों पर खड़ा किया जा रहा है।*
*सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र केवल सिकोड़ा ही नहीं जा रहा है बल्कि पूंजीपतियों को बेचा जा रहा है। आज देशी हैं कल विदेशी होंगे।*
*इस माध्यम से वंचितों के लिए आरक्षण भी छीना जा रहा है। सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र में स्थाई नौकरियां छीन कर आउट सौर्सिंग के माध्यम से हर क्षेत्र में अस्थाई और ठेकेदारी प्रथा जोरों पर है।*
*पूंजी को मुनाफे की लूट के लिए पूरी छूट और श्रम को भीख या गुलामी।*
आज परसाई जी होते तो जरूर कहते आजादी के 74 साल बाद तो *”गणतंत्र तो और ज्यादा ठिठुर रहा है”।*
*मेहनतकश* संयोजक विजय दलाल





