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क्यों थम गया जोशीमठ को कहीं और बसाने का शोर ?

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व्‍योमेश चन्‍द्र जुगरान

जोशीमठ को नए सिरे से सुरक्षित स्थान पर बसाने का शोर थम चुका है और पीपलकोटी पुनर्वास योजना से भी हाथ खींच लिए गए हैं। चमोली जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के ताजा आंकड़े बता रहे हैं कि 3 फरवरी के बाद से जोशीमठ से किसी को भी सुरक्षित स्थान पर ले जाने की जरूरत नहीं समझी गई। कुल 78 परिवारों के 294 लोगों को राहत शिविरों में रखा गया है, जिनमें अधिकांश के मकान असुरक्षित घोषित किए जा चुके हैं। ऐसे मकानों की संख्या 181 बताई गई है। वहीं 863 भवन दरारग्रस्‍त हैं, जिनमें रहने वाले राहत पैकेज की बाट जोह रहे हैं।

राहत या भ्रम

उत्तराखंड सरकार ने राहत और पुनर्वास के लिए पॉलिसी तो घोषित कर दी है, लेकिन इसकी बारीकियां लोगों की समझ से परे हैं। आइए समझते हैं कैसे :

  • सरकार ध्वस्त भवनों के लिए ‘एकमुश्‍त समाधान’ योजना लेकर आई है। यानी ऐसे मकानों के मामले में जमीन के मूल्य सहित एकमुश्त राशि दे दी जाए या अधिकतम 100 वर्ग मीटर की जमीन और मुआवजा देकर समझौता कर लिया जाए।
  • एक विकल्प यह है कि सरकार कहीं और फ्लैट बनाकर दे। ऐसे में यदि क्षतिग्रस्त संपत्ति की कीमत अधिक है तो संपत्ति मालिक को अतिरिक्त राशि का भुगतान कर दिया जाए।
  • जहां तक आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त भवनों का मामला है तो राहत राशि या मुआवजा वगैरह देकर मामले को निपटाया लिया जाए।
  • अभी यह अस्‍पष्‍ट है कि ‘एकमुश्‍त समाधान’ योजना के तहत संपत्ति का आकलन/मूल्यांकन किस प्रकार होगा?
  • फ्लैट कहां बनेंगे और बाकी पीड़ितों को मिलने वाली राहत या मुआवजे का आधार क्‍या होगा?

अब हाल यह है कि सरकार तो आपदा को सामान्‍य बताते हुए चारधाम यात्रा की तैयारियों में लग चुकी है। मुख्यमंत्री भी कह चुके कि जोशीमठ पूरी तरह सुरक्षित है और चारधाम यात्रा को लेकर किसी प्रकार का कोई संशय नहीं है।

फोटो: Midjourney

समस्या कहीं, जांच कहीं

सरकार ने इस जांच नतीजे से भी राहत की सांस ली है कि जोशीमठ के मारवाड़ी इलाके में जेपी कॉलोनी के पास फूटी जलधाराओं और NTPC परियोजना की टनल का पानी अलग-अलग है। मगर इसकी जरूरत क्यों पड़ी?

  • जानकारों का कहना है कि यह सामान्य तथ्य है कि दोनों का कोई आपसी संबंध नहीं है, जिसे जानने के लिए किसी गहन भूगर्भीय मीमांसा की जरूरत भी नहीं है। मगर कुछ लोगों ने इसे जानबूझकर मुद्दा बनाया ताकि NTPC के इस तपोवन-विष्णुगाड प्रॉजेक्‍ट के विरोध की हवा निकाली जा सके और प्रॉजेक्‍ट की टनल के कारण जोशीमठ की भूगर्भीय स्थिति को पहुंची क्षति की वास्तविकता से ध्‍यान हटाया जा सके।
  • 2 जनवरी को जेपी कॉलोनी में फूटे गादयुक्‍त पानी के बाद से ही जोशीमठ के विभिन्‍न हिस्‍सों में भूस्खलन और दरारों की गति तेज हुई थी।
  • अब सरकार वैज्ञानिक जांच में NTPC टनल के पानी को अलग साबित कर 520 मेगावॉट की जल विद्युत परियोजना के पक्ष में तो खड़ी हो गई है, मगर जेपी कॉलोनी में उफनाए पानी का कारण क्‍या है, इस बारे में कोई ठोस सुराग सामने लाने में अभी तक नाकाम रही है। बताया गया है कि 26 जनवरी तक यहां सवा करोड़ लीटर से अधिक पानी का रिसाव हो चुका था, जो अब लगभग थम चुका है।

बाईपास पर बवाल

एक बड़ा मुद्दा हेलंग-मारवाड़ी बाईपास का है जो चारधाम राजमार्ग परियोजना का ही हिस्सा है। छह किलोमीटर लंबा यह मार्ग जोशीमठ के नीचे मारवाड़ी पुल में बदरीनाथ हाईवे से मिल जाएगा। इससे बदरीनाथ धाम की दूरी करीब 22 किलोमीटर कम हो जाएगी। मगर रूट डायवर्ट होने से कारोबारियों के हित प्रभावित होंगे। लिहाजा व्यापारी वर्ग इसकी खुली मुखालफत कर रहा है। ऐसे में सरकार ने काम रोकते हुए सीमा सड़क संगठन को बाईपास के सर्वे के निर्देश दिए हैं। लेकिन लगता नहीं कि वह इस मुद्दे पर अपने कदम पीछे खींचेगी। वहीं व्यावसायिक हितों की दुहाई के साथ व्यापारी वर्ग जितना उद्वेलित होगा, जोशीमठ के वजूद पर उठने वाले विरोधी स्वर उतने ठंडे पड़ते जाएंगे।

Ramswaroop Mantri

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