मुंबई के वर्ली नाके के पास भिवंडीवाला बिल्डिंग। ये चार मंजिला बिल्डिंग मुंबई की मशहूर BDD चॉल का हिस्सा है। लार्सन और टर्बो ने इसके री-डवलपमेंट के लिए बिड जीती है। ये साउथ बॉम्बे है। बिल्डिंग में रहती हैं, शशिकला माजगांवकर उर्फ बेबी रमेश पाटनकर उर्फ मुंबई की ड्रग क्वीन। मैं सीढ़ियों से ऊपर जाता हूं तो तीसरी मंजिल पर ठीक सामने वाले फ्लैट में गुलाबी-सफेद रंग की साड़ी पहने एक महिला नजर आती हैं। बालों में बेहद करीने से गुलाब का फूल लगा है। माथे पर एक बड़ी लाल बिंदी है।

ये ही बेबी पाटनकर हैं। मुझे बगल के फ्लैट में जाने का इशारा करती हैं। मैं अंदर सोफे पर जाकर बैठ जाता हूं। इस फ्लैट के एक दूसरे कमरे में बेबी का बेटा सोया हुआ है। 6 फीट से ज्यादा हाइट, गांजा पीने से लाल हुईं आंखें। इस पर भी कई मर्डर के आरोप हैं। बेबी आवाज देती हैं और वो सोफे पर ठीक मेरे बगल में आकर बैठ जाता है। सीधे कहता है- ‘मां अभी बात नहीं करेंगी। वेब सीरीज आ रही है, सुप्रीम कोर्ट में केस भी चल रहा है। अभी इंटरव्यू नहीं हो पाएगा।’ ये सच है कि बेबी पाटनकर की जिंदगी पर फिल्ममेकर संजय गुप्ता वेब सीरीज बनाने जा रहे हैं।
जिस नार्कोटिक्स ब्यूरो यानी एनसीबी ने सुशांत सिंह राजपूत केस में रिया चक्रवर्ती को गिरफ्तार किया, उसी का डीआईजी साजी मोहन कभी ड्रग्स का बड़ा कारोबारी था। अभी वह 12 साल से जेल की सजा काट रहा है। और जिस मुंबई पुलिस ने कंगना रनौत के कथित ड्रग कनेक्शन की जांच शुरू की है, उसका ट्रैक रेकॉर्ड समझना हो, तो आपको बेबी पाटणकर के बारे में जानना होगा।
बॉलिवुड को घेरने से नहीं ख़त्म होगा ड्रग्स का धंधा
बेबी पांच साल पहले जब पकड़ी गई, तो उस केस में पहले ही कई पुलिस वाले पकड़े जा चुके थे। कई अफसरों की नौकरी से छुट्टी हो गई थी। यह देश का शायद पहला मामला था, जब पुलिस स्टेशन में बने लॉकर से ड्रग्स बरामद की गई थीं। बेबी के दोस्त और पुलिस वाले धर्मा कालोखे ने इसे अपने लॉकर में रखा था।
बेबी यानी शशिकला पाटणकर की दोस्ती पुलिस से कैसे हुई और ड्रग्स के धंधे में कैसे आई? पांच साल पहले बेबी को गिरफ्तार करने वाले रिटायर्ड एसीपी अवधूत चव्हाण ने बताया, शशिकला का बचपन वरली, कोलीवाडा में बीता। इस इलाके में मारिया नाम का गुंडा रहता था। किसी बात पर बेबी के चार भाइयों का उससे झगड़ा हुआ और उन्होंने मारिया का मर्डर कर दिया। इस केस में चारों को जेल हो गई।
बेटे की गिरफ्तारी के दो महीने के अंतराल में बेबी की मां केशरबाई और पिता पांडुरंग माझगांवकर की मौत हो गई। तब बेबी 6 साल की थी। उसने घर-घर जाकर काम करना शुरू कर दिया, जबकि उसके एक और भाई अर्जुन ने किसी गैराज में नौकरी कर ली। मारिया के मर्डर में अर्जुन गिरफ्तार नहीं हुआ था।
बेबी जब 15 साल की थी, तो उसकी शादी कोलीवाडा के रमेश पाटणकर से हो गई। वह शराबी था और 1991 में रमेश को दिल का दौरा पड़ा और मौत हो गई। इसके बाद बेबी ने पांच साल तक मुंबई की साधना मिल में काम किया। बाद में मिल बंद हो गई। बेबी फिर से घरों में काम करने लगी। इसी बीच, उसके भाइयों की मारिया मर्डर केस में सजा पूरी हो गई और वे वापस आ गए। इसके बाद उसके एक भाई भरत ने भारती से शादी कर ली और वह वरली के सिद्धार्थनगर इलाके में रहने लगा, तो बेबी भी उसके बगलवाले घर में रहने लगी। भरत-भारती के घर में भारती का भाई बल्लू भी रहता था, जो ड्रग्स लेता था।
साल 1996 में जब एक दिन बेबी अपने भाई के घर पर थी, उसके खुद के घर में चोरी हो गई। उसने वर्ली पुलिस में एफआईआर करवाई। कुछ देर बाद उसके घर पुलिस स्टेशन की डिटेक्शन टीम पहुंची। इसमें धर्मा कालोखे भी था। चोरी के बहाने बेबी के घर हुई मुलाकात में धर्मा की बेबी से हद से कुछ ज्यादा नज़दीकियां बढ़ीं। इसलिए बेबी के भाई के साले बल्लू को भी ड्रग्स की अपनी तलब पूरी करने में किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं हुई।
बल्लू पड़ोस में रहने वाले अयूब से ड्रग्स लेता था। अयूब को जब मुंबई से बाहर जाना होता था, तो वह ड्रग्स बेबी के घर में रख देता था। तब बेबी ही उसे बेचती थी। अयूब की साल 1997 में ब्लड प्रेशर बढ़ने से मौत हो गई। अयूब का बचा माल बेबी ने बेचा और फिर उसकी मां से यह पता किया कि वह ड्रग्स कहां से मंगाता था। इसके बाद बेबी अपनी भाभी भारती और उसके भाई बल्लू के साथ वर्ली में ड्रग्स बेचने लगी। वर्ली पुलिस स्टेशन के नज़दीक एंटी नार्कोटिक्स सेल की यूनिट भी है। जब वहां के कुछ सिपाहियों को बेबी के कारोबार का पता चला तो उन्होंने हफ्ता फिक्स करा लिया।
पुलिस वालों और बेबी के रिश्तों का यह मामला कई साल तक छिपा रहा। 9 मार्च, 2015 को जब सतारा पुलिस ने खंडाला में मरीन लाइंस के पुलिसकर्मी धर्मा कालोखे के ठिकाने पर छापा मारा तो वहां से 110 किलो ड्रग मिली। अगले दिन मरीन लाइंस पुलिस स्टेशन में उसके लॉकर से भी 12 किलो ड्रग्स बरामद हुई। धर्मा धरा गया, लेकिन पुलिस स्टेशन के अंदर ड्रग्स मिलने से पूरे देश में हंगामा मच गया। धर्मा ने बेबी पाटणकर का नाम लिया, लेकिन कई दिन तक बेबी किसी को मिली नहीं।

हां, उसकी तस्वीर मीडिया में आने पर उसे सब पहचानने लगे थे। पांच साल पहले मार्च के आखिरी सप्ताह में बेबी एक लग्जरी बस में कुराड से मुंबई आ रही थी। किसी ने उसे देख लिया और मुंबई क्राइम ब्रांच में खबर कर दी। उसे उसी बस में पनवेल से पहले गिरफ्तार कर लिया गया।
जब उससे पूछताछ हुई, तो उसने सिर्फ धर्मा से ही नहीं, पुलिस डिपार्टमेंट में कई और लोगों से भी अपनी दोस्ती जाहिर कर दी। उसने दावा किया कि खंडाला में कालोखे के ठिकाने पर ड्रग्स होने की टिप उसी ने किसी के ज़रिए पुलिस को दी थी। आखिर उसने ऐसा क्यों किया?
तो बेबी पाटणकर ने बताया, खंडाला में 9 मार्च, 2015 को जो ड्रग ज़ब्त की गई, उसे वह कुछ महीने पहले मुंबई लाई थी। कुछ दिन तक उसने इसे वर्ली में अपने घर में रखा। बाद में उसने धर्मा से इसे अपने किसी ठिकाने पर छिपाने को कहा। कालोखे ने इसी शर्त पर यह ड्रग छिपाने का भरोसा दिया कि वह बदले में उसे 25 लाख रुपये देगी। कालोखे ड्रग को कुछ महीने पहले खंडाला ले गया। लेकिन बेबी ने वादे के बावजूद उसे 25 लाख रुपये नहीं दिए।
क्राइम ब्रांच के एक अधिकारी के अनुसार, कालोखे पुणे में किसी प्रॉपर्टी में इस 25 लाख रुपये को निवेश करना चाहता था। बिल्डर को डेढ़ लाख रुपये अडवांस में भी दे दिए थे, लेकिन बेबी की इस वादा खिलाफी की वजह से उसकी पुणे की यह प्रॉपर्टी ख़तरे में पड़ गई थी।
बेबी ने पुलिस को बताया कि उसके बेटे गिरीश ने धमकी दी थी कि अगर अब वह इस धंधे में रही तो वह खुदकुशी कर लेगा। पर धर्मा उस पर ड्रग रैकेट में बने रहने का दबाव बना रहा था। बेबी पर साल 2001 में एक एफआईआर हुई थी, उसके बाद 2014 में वर्ली और वसई में दो एफआईआर दर्ज हुईं। एकाएक उस पर हुई दो एफआईआर से उसका शक कालोखे पर बढ़ गया।
शक इसलिए भी था कि अभी तक मुंबई में बेबी की मंगाई ड्रग्स ही बाजार में सबसे ज्यादा सप्लाई होती थी, लेकिन जब खंडाला में 110 किलो से भी ज्यादा ड्रग को छिपाने के बावजूद मुंबई में ड्रग की सप्लाई बढ़ती रही तो बेबी को लगा शायद कालोखे ने किसी और ड्रग तस्कर को मुंबई के बाज़ार में उतार दिया है।
खंडाला और मरीन लाइंस में जो ड्रग्स ज़ब्त किया गया था, पुलिस का कहना था कि वह एमडी ड्रग थी, लेकिन फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर इस केस में आरोपित पुलिस वालों ने कोर्ट में इसे अजीनो मोटो बताया, जो चाइनीज़ खानों में स्वाद बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। अपने इन पुलिस दोस्तों की मदद से बेबी ने मुंबई, पुणे, लोनावाला, कोंकण में कई बंगले बनवाए। बेबी के 22 बैंक अकाउंट और 1.45 करोड़ की एफडी होने की बात अधिकृत रूप से सामने आई थी। उसने शराब की कुछ दुकानें और आलीशान गाड़ियां भी खरीदी थीं। खास बात यह है कि इस बेबी पाटणकर की किराए की कई गाड़ियां सरकारी विभाग, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में भी चलती थीं।
कई दिन ढूंढा, तब जाकर मिला ड्रग क्वीन का पता
ड्रग्स की दुनिया में लड़कियों-महिलाओं की हिस्सेदारी की बात होती है तो सबसे पहले आने वाले कुछ नामों में मुंबई की ड्रग क्वीन बेबी का नाम भी आता है। मैं बेबी की तलाश में निकला तो उनका एड्रेस तलाशने में ही मुझे कई दिन लग गए। उनका केस लड़ने वाले वकीलों, पुलिसवालों और लोकल पत्रकारों को भी नहीं पता था कि आजकल वे कहां हैं। किसी ने कहा कि सिद्धार्थनगर स्लम में पूछिए, वहां बेबी का साम्राज्य है। वहीं उनसे मुलाकात हो सकती है।

हालांकि मुंबई क्राइम ब्रांच के एक सीनियर ऑफिसर ने बताया कि वर्ली नाके के पास भिवंडीवाला बिल्डिंग में बेबी का परिवार रहता है, वे वहीं मिल सकती हैं। वर्ली नाके से लेफ्ट लेने पर सालों पुरानी चार मंजिला इमारत नजर आती है, इसी का नाम भिवंडीवाला है। इसमें नीचे दुकानें हैं और ऊपर फ्लैट बने हैं।
एंट्री गेट पर एक बुजुर्ग वॉच मैन ड्यूटी दे रहे थे। मैंने पूछा- ‘बेबी पाटनकर यहीं रहती हैं?’ जवाब मिला- ‘हां, क्या आपको मिलने बुलाया गया है?’ मैंने कहा-’मीडिया से हूं, बात हुई है।’ वॉच मैन ने मुझे शक भरी नजरों से घूरा और वहीं रुकने के लिए कहकर खुद ऊपर इजाजत लेने चला गया।
करीब 15 मिनट बाद वो एक महिला के साथ लौटे। इस महिला ने खुद को बेबी की बेटी बताया और कहा- ‘मां अभी तीन-चार दिन नहीं मिल सकतीं।’ मैंने कहा- ‘भोपाल से आया हूं। आप उन तक मेरा मैसेज पहुंचा दीजिए।’ उन्होंने फोन मिलाया, कुछ मिनट दबी आवाज में बातें करती रहीं और फिर साथ ऊपर चलने का इशारा किया।
आपने हिडन कैमरा तो नहीं लगाया…
जैसा मैंने आपको पहले बताया, मैं ऊपर तो चला गया लेकिन बेबी के बेटे ने मुझे साफ मना कर दिया था। तभी मुझे बेबी फिर आती नजर आईं, वे आकर सोफे के सामने वाली कुर्सी पर बैठ गईं। बेबी की उम्र 60 के आस-पास है लेकिन अभी भी वे देखने में 45 साल से ज्यादा की नहीं लगतीं। मैंने उनसे रिक्वेस्ट के अंदाज में कहा- ‘इंटरव्यू न दें, कम से कम बात कर लीजिए।’ वे कुछ सोचने लगीं फिर अचानक कहा- ‘आप कोई कैमरा तो छिपाकर नहीं लाए हैं न?’ मैंने मना किया तो वे मेरे हाथ में मौजूद फोन की तरफ घूरने लगीं। मैंने फोन को टेबल पर रख दिया।
बेबी पाटनकर आजकल मुंबई के वर्ली में भिवंडीवाला बिल्डिंग में रहती हैं। उनकी बिना मर्जी के उनसे मिलना मुमकिन नहीं है। भास्कर से भी उन्होंने बिना कैमरे पर ही आए बात की। इलस्ट्रेशन: गौतम चक्रवर्ती
ऑफ कैमरा ही हमारी बातचीत शुरू हुई, उन्होंने मुझे सवालिया नजरों से देखा। मैंने पूछना शुरू किया, आपको ड्रग क्वीन कहा जाता था? कहते हैं आपके पास से 100 किलो ड्रग्स बरामद हुआ था। उनके चेहरे के एक्सप्रेशन बदल गए, तल्ख होते हुए बोलीं- ‘ये सब बकवास है। मैं इतने सालों से ड्रग्स बेच रही थी तो पुलिस क्या भाड़ झोंक रही थी? मुझे पकड़ा क्यों नहीं? 30 साल में एक बार भी मुझे गिरफ्तार नहीं किया। जिस 100 किलो ड्रग्स की कहानी सुनाई गई वो तो लैब टेस्टिंग में अजीनोमोटो निकली थी।’ कहते-कहते बेबी रुक गईं, फिर इशारे से पानी मंगाया। एक घूंट पानी पिया और बोलीं- ‘मुझे धर्मा कालोखे ने फंसाया है।’
धर्मा कालोखे मुंबई पुलिस में कॉन्स्टेबल था। उसके थाने में मौजूद लॉकर से 12 किलो ड्रग्स बरामद हुआ था। उस समय इसकी कीमत ढाई करोड़ रुपए बताई गई थी। 9 मार्च 2015 को कालोखे को गिरफ्तार किया गया था। कालोखे ने ही पूछताछ में बताया था कि वो ड्रग्स बेबी पाटनकर की है और ये उसे बेबी के बेटे सतीश ने पुणे से लाकर दी है। इस मामले में सतीश भी गिरफ्तार हुआ लेकिन फिलहाल कालोखे और सतीश दोनों ही जमानत पर बाहर हैं।
पुलिस मिली हुई है इसलिए दूसरे पुलिस वाले की जांच नहीं
बेबी कालोखे का नाम लेने के बाद फिर चुप हो गईं थी। मैं कुछ कहता उससे पहले ही वे फिर बोलने लगीं- ‘कालोखे ने सोची-समझी प्लानिंग से मुझे फंसाया। मैंने कभी ड्रग्स का धंधा किया ही नहीं। वो पुलिस वाला था इसलिए दूसरे पुलिस वालों ने उसका साथ दिया। अब वो आराम से सतारा में खेती कर रहा है। उसने करोड़ों की प्रॉपर्टी बना ली। एक पुलिस कॉन्स्टेबल इतनी कमाई कैसे कर सकता है, इसकी जांच कभी किसी ने क्यों नहीं की?’
बेबी ने जैसे ये सवाल मुझसे पूछा था, उनकी सवालिया नजरें मुझे ही घूर रही थीं। मैंने अगला सवाल किया, पुलिस का दावा है कि आपके पास 22 बैंक अकाउंट थे, इनसे 5 करोड़ रुपए का ट्रांजेक्शन हुआ था। आपकी पुणे-मुंबई में करोड़ों की प्रॉपर्टी है, सिद्धार्थनगर स्लम में आपकी 10 बिल्डिंग्स हैं? बेबी ने रूखेपन से जवाब दिया- ‘मेरे पास सब हिसाब-किताब है। मेरा लेन-देन चेक से होता है। प्रॉपर्टी के बिजनेस से ही मैंने कमाई की।’ बोलते-बोलते बेबी खड़ी हो गयीं और बालकनी के करीब जाकर सामने नजर आ रहे सिद्धार्थनगर स्लम की तरफ इशारा करते हुए बोलीं- ‘यहां मेरी 10 बिल्डिंग हैं। एक की कीमत 70 लाख रुपए है। इनके भाड़े से ही तो मेरी कमाई होती है।’
इतना कहकर बेबी मुड़ीं और कमरे से बाहर चली गईं। मैं कुछ समझ पाता इससे पहले उनका बेटा बोला- ‘मां और बात नहीं करना चाहतीं, आप जा सकते हैं।’ मैंने और बात करने की या फिर से मिलने के लिए पूछा तो जवाब मिला कि वेब सीरीज आ जाए शायद तब बात करें। मैं भिवंडीवाला बिल्डिंग से बाहर निकल आया लेकिन, मेरे बाहर आने तक आस-पास मौजूद लोगों की आंखें मेरा पीछा करती रहीं।
शशिकला उर्फ बेबी पाटनकर: दूध बेचने वाली ड्रग क्वीन
बेबी की कहानी किसी मुंबईया फिल्म की कहानी से कम नहीं है। बेबी जब गिरफ्तार हुईं थी तो पुलिस डिपार्टमेंट भी सवालों के घेरे में आ गया था। ये देश का पहला ऐसा मामला था जब थाने के लॉकर से ही ड्रग्स मिली थी। बेबी को गिरफ्तार करने वाले रिटायर्ड एसीपी अवधूत चव्हाण उसकी कहानी सुनाते हैं।
पुलिस की कहानी के मुताबिक, बेबी का बचपन वर्ली और कोलीवाडा में ही बीता। इस इलाके का एक गुंडा था मारिया। मारिया और बेबी के भाइयों का झगड़ा हो गया और इन्होंने मिलकर मारिया का मर्डर कर दिया। जब ये सब हुआ तब बेबी सिर्फ 6 साल की थी। बेबी के 5 भाई थे, 4 को इस केस में जेल हो गई। भाइयों की गिरफ्तारी के बाद बेबी की मां केशरबाई और पिता पांडुरंग माझगांवकर की भी मौत हो गई। उसके पांचवें भाई अर्जुन ने गैरेज में नौकरी की और बेबी घर-घर जाकर साफ-सफाई का काम करने लगीं।
बेबी पाटनकर का जीवन संघर्ष से भरा था। उनके 5 भाई हैं जिनमें से 4 एक मर्डर केस में जेल चले गए। वे जब 6 साल की थीं, उनके माता-पिता की भी मौत हो गई। इसके बाद वे घर-घर जाकर साफ-सफाई का काम करके अपना गुजारा करती थीं। इलस्ट्रेशन: गौतम चक्रवर्ती
बेबी सिर्फ 15 साल की थीं जब उनकी शादी कोलीवाडा के रमेश पाटनकर से हुई। रमेश शराब पीता था और 1991 में उसकी हार्ट अटैक से मौत हो गई। भाई जेल में थे, पति मर चुका था। बेबी ने पांच साल तक मुंबई की साधना मिल में काम किया। मिल बंद हो गई और बेबी फिर से घरों में काम करने लगी। इसी बीच, उसके भाइयों की मारिया मर्डर केस में सजा पूरी हो गई और वे वापस आ गए। उसके एक भाई भरत ने भारती नाम की महिला से शादी कर ली। भारती का एक भाई था बल्लू जो ड्रग्स लेता था और ड्रग पैडलिंग भी करता था।
बेबी की ड्रग की दुनिया में एंट्री
पुलिस की कहानी के मुताबिक साल 1996 में बेबी के भाई के घर में चोरी हो गई। छानबीन के लिए पुलिस आई और बेबी की कॉन्स्टेबल धर्मा कालोखे से मुलाकात हुई। इसी के बाद कालोखे और बेबी की नजदीकी बढ़ीं। बेबी के भाभी का भाई बल्लू, अयूब नाम के आदमी से ड्रग्स खरीदता था। यहीं से अयूब की ड्रग्स बेबी के घर में रखे जाने की शुरुआत हुई। 1997 में अयूब की मौत हो गई।
मुंबई पुलिस में कॉन्स्टेबल धर्मा कालोखे से मुलाकात के बाद ही बेबी पाटनकर ने ड्रग्स तस्करी की दुनिया में कदम रखा। बेबी पुलिस की गाड़ियों में ही ड्रग्स की तस्करी कराती थीं। इलस्ट्रेशन: गौतम चक्रवर्ती
अयूब का बचा माल बेबी ने बेचा और फिर उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा। बेबी ने अपनी भाभी और उसके भाई बल्लू के साथ वर्ली में ड्रग्स बेचना शुरू कर दिया। वर्ली पुलिस स्टेशन के पास एंटी नार्कोटिक्स सेल की यूनिट में भी बेबी ने कालोखे की मदद से हफ्ता फिक्स कर लिया। पुलिस के साथ मिलकर 30 साल तक ड्रग्स की तस्करी का धंधा चलाया। बेबी शुरुआत में मुंबई के कॉलेजों के सामने गांजा, हशीश, ब्राउन शुगर जैसी ड्रग्स बेचा करती थीं। ये ड्रग्स पाकिस्तान बॉर्डर से एंट्री कराकर राजस्थान-मध्यप्रदेश के रास्ते मुंबई लाया जाता था। कॉन्स्टेबल कालोखे ने पुलिस को दिए बयान में माना है कि बेबी कई मौकों पर पुलिस की गाड़ियों से ही तस्करी करती थी।
बेबी का राज कैसे खुला, कालोखे से क्यों हुआ झगड़ा
9 मार्च, 2015 को सतारा पुलिस ने खंडाला में मरीन लाइंस थाने में कॉन्स्टेबल धर्मा कालोखे के ठिकाने पर छापा मारा तो वहां से 110 किलो ड्रग मिली। अगले दिन मरीन लाइंस पुलिस स्टेशन में उसके लॉकर से भी 12 किलो ड्रग्स बरामद हुई। धर्मा ने बेबी पाटनकर का नाम लिया, लेकिन वो फरार हो गई। 22 अप्रैल 2015 को बेबी एक लग्जरी बस में कुराड से मुंबई आ रही थी। पनवेल से पहले बस से उतार कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
बेबी ने पूछताछ में दावा किया कि खंडाला में कालोखे के ठिकाने पर ड्रग्स होने की टिप उसी ने पुलिस को दी थी। बेबी के बयान के मुताबिक ये ड्रग्स वो कुछ ही महीने पहले मुंबई लाई थी। कालोखे ने ये ड्रग्स छिपाने की जिम्मेदारी ली लेकिन, बदले में 25 लाख रुपए मांगे। बेबी ने वादे के बावजूद 25 लाख रुपए नहीं दिए। कालोखे बेबी से इस बात पर नाराज था।
बेबी ने कहा कि उसका बेटा गिरीश उस पर ड्रग्स का धंधा बंद करने का दबाव बना रहा था लेकिन, कालोखे इससे खुश नहीं था। यहीं से दोनों में बात बिगड़ी। बेबी पर साल 2001 में एक FIR हुई थी, इसके बाद 2014 में वर्ली और वसई में उसके खिलाफ 2 और FIR दर्ज की गईं। बेबी को शक हुआ कि कालोखे दबाव बनाने के लिए ऐसा कर रहा है। इसी के चलते उसने ड्रग्स पकड़वा दी।
ड्रग्स नहीं वो तो अजीनोमोटो था
खंडाला और मरीन लाइंस में जो ड्रग्स जब्त किया गया था, पुलिस ने उसे चार्जशीट में MDMA ड्रग्स बताया था। हालांकि कोर्ट में जब फॉरेंसिक रिपोर्ट पेश हुई तो इसमें इस 110 किलो ड्रग्स को अजीनो मोटो बताया गया। इस पर सवाल भी उठे, लेकिन इसके बाद बेबी को 2019 में जमानत मिल गई। पुलिस के मुताबिक बेबी ने मुंबई, पुणे, लोनावाला, कोंकण में कई बंगले बनवाए। बेबी के 22 बैंक अकाउंट और 1.45 करोड़ की एफडी होने की बात भी सामने आई।
बेबी पाटनकर कभी मुंबई की गलियों में दूध बेचा करती थीं। लेकिन, 1980 के दशक में वो मेफेड्रोन ड्रग को मुंबई में लेकर आईं। यहां इस ड्रग को म्याउं-म्याउं नाम मिला। बेबी की गिरफ्तारी के बाद इस केस में क्राइम ब्रांच ने एंटी नारकोटिक्स सेल से जुड़े तत्कालीन पुलिस अधिकारी सुहास गोखले समेत चार और पुलिसकर्मियों को भी गिरफ्तार किया था।
सबूत नहीं मिले इसलिए बेबी की जमानत हुई
बेबी ने बात करने से इनकार कर दिया तो मैंने उनके लॉयर एमएन गांवकर से बात की। उन्होंने बताया कि पुलिस के पास बेबी के खिलाफ कोई सबूत नहीं हैं। गिरफ्तारी के वक्त उनके पास से कोई ड्रग्स बरामद नहीं हुआ था, उन्हें सिर्फ बयानों के आधार पर अरेस्ट किया गया था। उनके खिलाफ बनाए गए केस के मुताबिक पाटनकर और उनके बेटे ने 2014 में 150 किलो मेफेड्रोन इकट्ठा किया था उस वक्त मेफेड्रोन एक प्रतिबंधित दवा नहीं थी। बाद में कोर्ट में वो ड्रग्स निकली भी नहीं।
गैरकानूनी संपत्ति बनाने के सवाल पर बेबी के वकील ने कहा कि इसकी जांच इनकम टैक्स डिपार्टमेंट कर सकता है। बेबी पाटनकर के बारे में मैंने मुंबई के नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के जोनल डायरेक्टर अमित गावटे से पूछा तो उन्होंने कहा कि मैं बेबी पाटनकर को नहीं जानता। उनका केस मेरे पहले का है। मेरे सामने अभी तक उनका कोई मामला नहीं आया।
मुंबई के सीनियर क्राइम रिपोर्टर शिवा देवनाथ कहते हैं मुंबई में गली-गली में ड्रग्स बिक रहा है। लेकिन यह इतना सीक्रेटली होता है कि इन्हें पकड़ना बहुत मुश्किल होता है। मल्टीपल चेन सिस्टम के जरिए ड्रग्स की डिलेवरी हो रही है। इसमें गरीब लड़कियों से लेकर महिलाएं तक शामिल हैं। पैसों के लालच में ये पेडलर बन जाती हैं। कहते हैं बेबी पाटनकर जैसी कई ड्रग माफिया अब सिटी में एक्टिव हैं।





