*किसान संघर्ष समिति की 304 वीं किसान पंचायत संपन्न
*एम एस पी को लेकर अनिश्चितकालीन आंदोलन की तैयारी करें किसान*
*किसानों ने ही डटकर मुकाबला कर केंद्र की सरकार को झुकाया*
आज किसान संघर्ष समिति की 304 वीं किसान पंचायत किसान संघर्ष के अध्यक्ष, पूर्व विधायक डॉ सुनीलम की अध्यक्षता में संपन्न हुई।
किसान पंचायत को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय किसान सभा के उपाध्यक्ष हन्नान मौला ने कहा कि कारपोरेट और सांप्रदायिक ताकतों द्वारा मिलकर देश पर फासीवाद को थोपा जा रहा है। उन्होंने कहा कि पहले कारपोरेट अमन शांति की बात करता था लेकिन अब सांप्रदायिक शक्तियों की कठपुतली बनकर रह गया है । उन्होंने कहा कि जिस तरह से किसानों ने दिल्ली को घेरा था, उसी तरह किसानों को राज्य की राजधानियों को घेरना चाहिए।
बिहार से अखिल भारतीय किसान महासभा के रा.महासचिव एवं पूर्व विधायक राजाराम सिंह ने कहा कि केंद्र की सरकार देश में फूट डालो राज करो की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े बिहार में जुड़े किसान संगठनों के कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए कहा कि किसानों को 2024 के लिए निर्णायक तैयारी करनी होगी।
उत्तराखंड से तराई किसान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजिन्दर सिंह विर्क ने कहा कि केंद्र सरकार 380 दिनों में किसानों की एकता नहीं तोड़ पाई लेकिन अब पंजाब में किसानों की एकता तोड़ने का षड्यंत्र फिर से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसान अन्नदाता भी है और मतदाता भी। किसान जिस दिन मतदाता के रूप में एकजुट होकर खड़े हो जाएंगे, उस दिन बड़ी से बड़ी ताकत को हरा सकते हैं।
वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादक केपी मलिक में सरसों पैदा करने वाले किसानों की लूट के आंकड़े बताते हुए कहा कि एक तरफ किसानों को सरसों का उचित दाम नही मिल रहा है वहीं दूसरी तरफ सरसो के तेल के नाम पर पाम आयल परोसा जा रहा है, जो मानव शरीर के लिए अत्यंत घातक है। उन्होंने कहा कि देश के तमाम समूहों ने केंद्र सरकार को चुनौती दी लेकिन वे असफल रहे। केवल किसानों ने ही डटकर मुकाबला कर केंद्र की सरकार को झुकाया है।
राजस्थान से किसान संघर्ष समन्वय समिति के गुरप्रीत सिंह संघा ने कहा कि किसान और किसानी खत्म होने से न केवल किसान खत्म होंगे बल्कि किसानी से जुड़े सभी लोग बर्बाद होंगे । गांव से शहरों की ओर पलायन तेजी से हो रहा है जिससे शहर की व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।
इंदौर से किसान संघर्ष समिति के संयोजक रामस्वरूप मंत्री ने कहा कि गेहूं का समर्थन मूल्य 2125 रुपए प्रति क्विंटल है लेकिन कहीं पर भी इस मूल्य पर किसानों से गेहूं नहीं खरीदा जा रहा है । इंदौर संभाग में गेहूं के भुगतान में विलंब होने के कारण किसानों को मजबूरन सड़कों पर उतरना पड़ा है।
किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष पूर्व विधायक डॉ सुनीलम ने किसान पंचायत को संबोधित करते हुए देश के किसान संगठनों से कर्नाटक चुनाव में भाजपा को हराने की अपील करते हुए कहा कि किसानों को अगले 3 महीने में एमएसपी की कानूनी गारंटी , संपूर्ण कर्जमाफी मुक्ति, फसल बीमा की अदायगी और 5000 रूपये प्रतिमाह की किसान पेंशन देने, कृषि भूमि के अधिग्रहण पर रोक लगाने आदि मांगों के लिए अनिश्चितकालीन, प्रभावशाली आंदोलन चलाने की जरूरत है तभी 2024 के चुनाव को प्रभावित किया जा सकेगा।
भोपाल से अ.भा किसान सभा (अजय भवन) के प्र.महासचिव प्रहलाद दास वैरागी ने कहा कि मध्य प्रदेश की सरकार और केंद्र की सरकार ने कारपोरेट को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से निर्यात नीतियों में संशोधन किया है। पिछले साल किए गए संशोधन से किसानों को कोई लाभ नहीं हुआ।
किसान पंचायत में देशभर में ओलावृष्टि, वृष्टि से नष्ट हुई फसलों का 50 हजार रुपए प्रति एकड़ राजस्व मुआवजा देने, फसल बीमा राशि का शीघ्र भुगतान करने, बिजली बिल माफ करने , दूध, फल, सब्जी, वनोपज की एमएसपी तय करने आदि प्रस्ताव पारित किए।
किसान पंचायत को छत्तीसगढ़ से अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा के तेजराम विद्रोही, संयुक्त किसान मोर्चा के संयोजक एडवोकेट शिवसिंह, भोपाल में किसान जागृति संगठन प्रमुख इरफान जाफरी, रायसेन से किसान नेता मुकेश धाकड़, छिंदवाड़ा से किसान नेता अरविंद उइके, मुलताई से भागवत परिहार आदि ने संबोधित किया।
किसान पंचायत का संचालन किसान संघर्ष समिति की उपाध्यक्ष एड आराधना भार्गव द्वारा किया गया।





