अग्नि आलोक
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तू जो भी देना चाहे देदे मेरे करतार

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शशिकांत गुप्ते

हम खुश हैं,वे मारे गए,आरोपी थे,मामला न्यायालय में विचाराधीन है।
जैसे कर्म करेगा वैसे फल देगा भगवान
ये है गीता का ज्ञान

गीता के उपदेश में संदेश है कि, फल भगवान देगा?
उत्तर प्रदेश में तो युवकों ने ही फैसला कर दिया। ना वकील,ना दलील, ना ही कचहरी, दिन दहाड़े बकायदा वीडियो शूटिंग करते हुए,आरोपियों की इहलिला समाप्त कर दी गई।
गीता के इसी उपदेश को पुलवामा में शहीद छः कम पचास सैनिकों को भी विस्फोटक रसायन के विस्फोट से कर्मों की सजा मिली होगी, जो विवाहित होंगे उनकी अर्धागियों ने भी अपने कर्मो की सजा भोगी होगी,साथ ही अतीत का स्मरण करते हुए,फिल्मी गीत की पंक्तियां गुनगुनाई होगी।
होके मजबूर मुझे उसने भुलाया होगा
ज़हर चुपके से दवा जानके खाया होगा
होके मजबूर…
दिल ने ऐसे भी कुछ अफ़साने सुनाए होंगे
अश्क़ आँखों ने पिये और न बहाए होंगे
बन्द कमरे में जो खत मेरे जलाए होंगे……..

बहुत से नोनिहालों पिता के सुख से वंचित हुए होंगे?
बहुत सी माताओं ने अपने वृद्धावस्था में बेटों के बिछड़ने का दुःख झेला होगा?
अब Accountability मतलब जवाबदेही का प्रश्न उपस्थित हुआ है? जवाबदेही तय होगी यह अनुत्तरित प्रश्न है? सवाल है जिनकी जवाबदारी थी वे तो मौकाया वारदात से पलायन कर गए, ऐसी खबर है?
एक यह शब्द भी बहस में सम्मिलित होगा Credibility मतलब साख? किसकी साख कौन जवाबदार?
इतना ही लिख पाया था कि, सीतारामजी ने समझाया ऐसे संवेदनशील विषय पर कभी भी नहीं लिखना चाहिए।
credibility जैसे शब्दों का लेखन में प्रयोग पाठकों को प्रभावित तो कर देगा,लेकिन credibility इस शब्द का जो हिंदी में अनुवाद है साख यह बहुत ही महत्वपूर्ण शब्द है। लेकिन दुर्भाग्य से सियासत में तो ये शब्द महत्वहीन हो जाता है।
अहम मुद्दा तो यह है कि हम दिन-ब-दिन धार्मिकता की ओर बढ़ रहें हैं।
मंदिरों को विकसित कर रहें हैं।
भारतीयता के विपरित जो नाम है उन्हे बदल रहें हैं।
मंदिरों को विशालकाय स्वरूप प्रदान कर रहें हैं।
धार्मिक कार्यक्रमों को दिव्य भव्य स्वरूप में मनाने में हर तरह सक्षम होते जा रहें हैं।
धार्मिक आयोजनों में आस्थावान लोगों की उपस्थिति लाखों में हो रही है।
इतना कहते हुए सीतारामजी ने कहा अपने को कुछ भी नहीं करना है,सिर्फ निम्न श्लोक का स्मरण करना है।
यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ॥
और खास कर इन पंक्तियों का सदा स्मरण करों
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन
कर्म किए जा फल की इच्छा मत कर ऐ इंसान
जैसे कर्म करेगा वैसे फल देगा भगवान

ये है गीता का ज्ञान
इतना कहते हुए, सीतारामजी कहा उपर्युक्त ज्ञान की बातों में ध्यान लगाओ। आलोचना और व्यंग्य को त्याग दो।

शशिकांत गुप्ते इंदौर

Ramswaroop Mantri

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