मुनेश त्यागी
आजकल भारतीय समाज के लोगों में हजारों साल से चली आ रही गरीबी, भुखमरी, शोषण, जुल्म, अन्याय, भेदभाव, अज्ञानता, अंधविश्वास, धर्मांधता, तरह-तरह के भगवान और देवी देवताओं के बारे में चर्चा होती रहती है। बहुत सारे अंधविश्वासी और धर्मांध लोग, जनता को इन सब सामाजिक व्याधियों से मुक्ति दिलाने के लिए देवी, देवताओं, भगवान, व्रत, ताबीज, स्नान ध्यान, रोजा, पूजा आदि की बात करते हैं और उनको इन सब व्याधियों और परेशानियों से उनको मुक्ति दिलाने की बात करते हैं। मुक्ति दिलाने का चलन आज हमारे समाज में बहुत जोरों पर है जैसे,,,,,,,,,,,,,,गरीबी से मुक्ति,
,,,,,,,,,, बेरोजगारी से मुक्ति,
,,,स्वर्ग नरक के विचार से मुक्ति,
,,,अशिक्षा और कूशिक्षा से मुक्ति,
,,,,,,,,ऊंच-नीच के विचार से मुक्ति,
,,,,,भूत प्रेत के अंधविश्वास से मुक्ति,
,,,,,,,पुनर्जन्म के अंधविश्वास से मुक्ति,
,,,,,,छोटे बड़े की मानसिकता से मुक्ति,
,,,,,,,,,,देवी देवताओं के झंझट से मुक्ति,
,,,,,,,,,, अत्याचार, जुल्मों सितम से मुक्ति,
,,,,,,,,, जीवन मरण के आवागमन से मुक्ति,
,,,,,,,,भाग्य और किस्मत के विचार से मुक्ति,
,,, शोषण, भ्रष्टाचार, अन्याय, मंहगाई से मुक्ति,
,,, सांसारिक आवागमन के अंधविश्वास से मुक्ति,
,,, अज्ञानता, धर्मांधता और अंधविश्वासों से मुक्ति,
,,,भगवान, गॉड, अल्लाह, खुदा के विचार से मुक्ति,
,,,,,,,,पिछले जन्म के कर्मों के अन्धविश्वास से मुक्ति,
,,,,यज्ञ, हवन, नदी, नालों, तालाब में नहाने से मुक्ति।
किसी भी नागरिक को और मुख्य रूप से भारतीय नागरिक को मुक्ति मिलने से हमारा आशय है गरीबी, भुखमरी, भ्रष्टाचार, महंगाई, शोषण, अन्याय, उत्पीड़न, असमानता, धर्मांधता, अंधविश्वास और श्रध्दांधता से मुक्ति, यानी इन सब समस्याओं से निजात मिले और हमारी सब समस्याओं का समाधान हो। मुक्ति से हमारा यही आशय है। मुक्ति मिलने से, मोक्ष प्राप्त होने या स्वर्ग नरक या इस तथाकथित जीवन मरण से छुटकारा मिलने की मुक्ति से, हमारा कोई मतलब नहीं है।
मोक्ष प्राप्ति या जीवन मरण की तथाकथित मान्यता सबसे बड़ा अंधविश्वास है, सबसे बड़ी धर्मांधता है, इस संसार में सबसे बड़ा धोखा है। जब इस देश के हर एक आदमी को रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुढ़ापे की सुरक्षा का सहारा मिल जाएगा यानी उनकी बुनियादी समस्याओं का पूर्ण रूप से समाधान हो जाएगा, तो उसको तथाकथित भगवान और स्वर्ग नरक और जन्नत और जहन्नुम की मान्यता से भी छुटकारा मिल जाएगा क्योंकि भगवान इस दुनिया में सबसे बड़ा धोखा है, सबसे बड़ा वहम है और वह एक हसीन काल्पनिक कल्पना के अलावा कुछ भी नहीं है। यह मुक्ति पूंजीवादी और सामंती व्यवस्था और धर्मांध और अंधविश्वासी ताकतों के गठजोड़ में संभव नहीं है।
पूरी की पूरी पूंजीवादी व्यवस्था मानवीय शोषण, जुल्म, अन्याय और भेदभाव पर आधारित है, मुनाफा कमाने पर आधारित है। उसका जन समस्या सुलझाने में या जन समस्याएं दूर करने में कोई विश्वास नहीं है। यह सिर्फ और सिर्फ मुनाफा और लाभ कमाने और अपनी सरकार बनाने पर ही आधारित है। पिछले हजारों साल का अनुभव बता रहा है कि अधिकांश लोगों को मोक्ष और मुक्ति के नाम पर ठगा गया है, उन्हें धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से धोखा दिया गया है और उन्हें लगातार मूर्ख बनाया गया है, उन्हें ठगा गया है।
मुक्ति से हमारा अभिप्राय है कि सबको मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा मिले, सबको काम मिले, सबको घर मिले, सबको मुफ्त और आधुनिक इलाज मिले और सब को शोषण, अन्याय, बेरोजगारी, भेदभाव, असमानता, तमाम तरह की गैरबराबरी, महंगाई और भ्रष्टाचार से छुटकारा मिले, सबको ऊंच-नीच और छोटे बड़े की मानसिकता और सोच से मुक्ति मिले। ऐसी मुक्ति केवल और केवल क्रांति द्वारा लाई गई क्रांतिकारी समाजवादी व्यवस्था में ही मुमकिन है। ऐसा केवल किसानों और मजदूरों की सरकार और सत्ता में ही संभव है।
इस मुक्ति को लाने के लिए किसानों, मजदूरों, नौजवानों, छात्रों, महिलाओं, दलितों, sc-st यानी कि मजदूरों और किसानों और तमाम मेहनतकश वर्ग के लोगों को मिलकर शोषण, अन्याय, अभाव, भुखमरी, गरीबी और भ्रष्टाचार पर आधारित इस पूंजीवादी, सामंती और सांप्रदायिक व्यवस्था को बदलना पड़ेगा और इसके स्थान पर आमूलचूल परिवर्तन और क्रांति द्वारा समाजवादी व्यवस्था कायम करनी पड़ेगी। शोषण, अन्याय और मुनाफे पर टिकी हुई लुटेरी पूंजीवादी व्यवस्था इस काम को नहीं कर सकती।
अतः किसानों, मजदूरों और तमाम मेहनतकशों की सरकार ही और उनकी सत्ता ही इस काम को भलीभांति कर सकती है। इसलिए हमारा मुख्य काम यह होना चाहिए कि हम हमारे देश में चल रहे किसानों और मजदूरों के क्रांतिकारी कार्यक्रम और व्यवस्था परिवर्तन के अभियान में विश्वास जाहिर करें और उसमें भागीदारी करें और क्रांति के अभियान को आगे बढ़ाएं और जब तक क्रांतिकारी समाजवादी समाज की स्थापना नहीं हो जाती, तब तक इस संघर्ष को जारी रखें। तभी जाकर उन्हें हजारों साल पुरानी इन अमानवीय और अमानुषतापूर्ण सामाजिक और बौद्धिक पतनशीलता और व्याधियों से मुक्ति मिल सकती है।
इसके अलावा मुक्ति का और कोई मार्ग नहीं है। धर्म पर आधारित होकर या जनविरोधी पूंजीवादी, सामंती और सांप्रदायिक व्यवस्था पर यकीन और विश्वास करके मुक्ति को नहीं पाया जा सकता। मुक्ति केवल समाजवादी क्रांतिकारी व्यवस्था में ही मिल सकती है। इसलिए हमारे समाज को आज सबसे ज्यादा क्रांतिकारी अभियान को मजबूत और सफल बनाने की है और समाज और देश में क्रांतिकारी समाज व्यवस्था कायम करने की है।





