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8 साल पहले मोदी बोले थे- खत्म हो सरपंच-पति संस्कृति:MP में पोस्ट ग्रेजुएट महिला सरपंच, पंचायत की कमान जेठ के हाथों में

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भोपाल

प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने 24 अप्रैल 2015 को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस पर कहा था- कानून ने महिलाओं को अधिकार दिए हैं। जब कानून उन्हें अधिकार देता है, तो उन्हें अवसर भी मिलना चाहिए। इस सरपंच पति (एसपी) संस्कृति को खत्म करें। हकीकत ये है कि मध्यप्रदेश में 9 साल बाद भी महिला प्रधान पंचायतों पर सरपंच पति संस्कृति खत्म नहीं हो पाई है। यहां तक कि पिछले साल जून में जब पंचायतों के चुनाव में महिलाएं जीतकर आईं, तो उनकी जगह पतियों, बेटों व अन्य रिश्तेदारों ने पद की शपथ ली। हालांकि कुछ जगह स्थानीय स्तर पर एक्शन भी लिया गया, लेकिन राज्य सरकार की तरफ से इस ‘प्रथा’ को समाप्त करने में कार्रवाई नहीं की गई।

इस साल पंचायती राज दिवस पर राष्ट्रीय स्तर का कार्यक्रम रीवा में 24 अप्रैल को हो रहा है। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहुंचे हैं।  प्रदेश की कई ऐसी पंचातयों का जायजा जिनकी कमान महिला सरपंच के हाथों में है। कहीं पति तो कहीं दूसरे रिश्तेदार गांव की सत्ता संभाल रहे हैं।

जेठ ने खोला पंचायत का ताला, योजनाएं बताने लगे

राजधानी से महज 10-12 किलोमीटर रायसेन रोड पर आदमपुर छावनी पंचायत। यहां सरपंच समेत 20 पंच महिलाएं हैं। पिछले साल जून महीने में चुनाव के दौरान ये महिलाएं निर्विरोध चुनी गईं, तो यह पंचायत प्रदेशभर में सुर्खियों में रही। वजह थी, यहां की सरपंच 22 साल की कृष्णा रावत हैं। वे पोस्ट ग्रेजुएट हैं। उन्होंने MA की डिग्री हासिल की है। कृष्णा की डेढ़ साल पहले शादी हुई थी। घर में चौका-चूल्हा संभाल रही थीं। जब वे सरपंच बनीं, तो दावा किया गया कि इस पंचायत में पहली बार महिला, अनुभव और युवा जोश तीनों का संगम देखने को मिलेगा। गांव की सरकार बने 10 महीने हो गए हैं। 

19 अप्रैल दिन बुधवार को सुबह 11 बजे जब हम पंचायत कार्यालय पहुंचे, तो यहां ताला लगा था। कुछ देर इंतजार के बाद सरपंच कृष्णा रावत के जेठ प्रशांत ठाकुर पहुंचे। जब मैंने सरपंच से मिलने की बात कही, तो उन्होंने कहा कि आपको क्या काम है? मुझे बता दीजिए। सरपंच मेरी बहू है और घर पर है। हमने परिचय दिया, तो पंचायत का ताला खोला। उन्होंने सरकार की सभी योजनाओं की जानकारी दी। फिलहाल उनका फोकस लाडली बहना योजना है। वे घर-घर जाकर फॉर्म भरवा रहे हैं।

कृष्णा को सरकार की योजनाओं की जानकारी तक नहीं

सरपंच कृष्णा से बात करने के लिए हम प्रशांत के साथ उनके घर गए। जब वे बात कर रही थीं, तब प्रशांत वहां मौजूद नहीं थे, लेकिन कृष्णा की जेठानी जरूर पास आकर खड़ी हो गईं। जब कृष्णा से सवाल किया कि आपकी पंचायत में सरकार की कौन-कौन सी योजनाएं लागू हैं? जवाब मिला कि मुझे इस बारे में जानकारी नहीं है। यह काम तो भैया (जेठ प्रशांत) देखते हैं। दूसरा सवाल- पंचायत में सभी सदस्य (पंच) महिलाएं हैं, पंचायत की बैठक में कौन-कौन से फैसले हो चुके हैं? जवाब मिला कि अभी तक एक भी मीटिंग नहीं हुई है, इसलिए इस बारे में कुछ नहीं बता सकती। एक सवाल के जवाब में उन्होंने स्वीकार किया कि वे पंचायत ऑफिस में कभी-कभी बैठती हैं।

देवरानी से सवाल, जेठानी ने दिया जवाब

जब कृष्णा से पूछा गया कि सरकार ने इस पंचायत को बतौर पुरस्कार राशि देने की घोषणा की थी, क्या यह राशि मिली? जवाब दिया कि मुझे इसकी जानकारी नहीं है। यह कहते हुए उन्होंने नजदीक खड़ी जेठानी की तरफ देखा, तब उन्होंने जवाब दिया कि राशि अभी मिली नहीं है, लेकिन जल्दी ही मिल जाएगी। उसका उपयोग गांव के विकास में करेंगे। बता दें कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पंचायत की कमान महिलाओं को मिलने पर तारीफ की थी। इतना ही नहीं, इस पंचायत को 15 लाख रुपए का पुरस्कार देने का ऐलान किया था। उन्होंने बताया कि सचिव रोज पंचायत कार्यालय आते हैं। जब किसी दस्तोवज में सरपंच के हस्ताक्षर की जरूरत है, तो वे घर आकर करा लेते हैं।

अपना वर्चस्व बचाने के लिए नेता परिवार की महिलाओं को पद दिलाते हैं

अमेरिका की नौकरी छोड़ गांव की तस्वीर बदलने को लेकर सुर्खियों में आई भोपाल के बरखेड़ी अब्दुल्ला गांव की पूर्व सरपंच भक्ति शर्मा कहती हैं कि महिला सशक्तीकरण को लेकर सरकार की मंशा में खोट नहीं है। दरअसल, पुरुष नेता अपने वर्चस्व को बचाने के लिए परिवार की महिलाओं को पद दिलाते हैं। वे समझाती हैं कि देखिए, जब महिला उम्मीदवार घर में रहती है और उनके पति-परिवार या रिश्तेदार चुनाव प्रचार करते हैं, तो वह जनप्रतिनिधि नहीं, रबर स्टैम्प बन जाती है, जबकि ग्रामीण राजनीति की पहली सीढ़ी सरपंच है। ऐसे में पहली जिम्मेदारी सचिव की होती है, जिस सरपंच को उसके अधिकार और नियम-कायदे से अवगत करना चाहिए। यदि वह ऐसा नहीं करते हैं, तो आला अफसरों को सख्त होना पड़ेगा।

अब प्रदेश के अन्य पंचायतों के कुछ दृश्य बताते हैं…

… और महिला सरपंच घूंघट डाले बैठी रही

बात 16 सितंबर 2016 की है। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान की शुरुआत की थी। इस दौरान वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए देशभर के 18 स्थानों से लोग जुड़े थे। इनमें राजगढ़ जिले के पिपल्या कुल्मी गांव को भी चुना गया था। यहां गोबर गैस प्लांट के फायदे बताने के लिए सरपंच कौशल्या बाई तेजरा की प्रधानमंत्री से बात होनी थी। परंतु सरपंच पति दिनेशचंद्र ​तेजरा सरपंच की कुर्सी पर बैठ गए। चौंकाने वाली बात यह है कि अधिकारियों ने कोई आपत्ति नहीं जताई। मोदी ने भी सरपंच पति से ही बात की। महिला सरपंच उनके पीछे घूंघट डाले कुर्सी पर बैठी नजर आईं।

गुना की 235 पंचायतों में सरपंच पतियों का दखल

गुना के तत्कालीन जिला पंचायत सीईओ नियाज खान ने (अक्टूबर 2017 में) पड़ताल कर रिपोर्ट तैयार की थी, जिसमें जिले की 425 पंचायत में से 235 पंचायतों में सरपंच पत्नी के स्थान पर पतियों का दखल पाया गया था। इसमें सरपंच पति पंचायत का कामकाज ही नहीं कर रहे थे, बल्कि पत्नी के हस्ताक्षर तक कर रहे थे। कुछ मामले ऐसे भी मिले, जिनमें पति स्वयं का परिचय सरपंच के रूप में देते थे। राजनीतिक प्रभाव दिखाकर अधिकारी-कर्मचारियों को धमकाते थे।

रिपोर्ट के बाद ही जारी हुआ लाइन ऑफ एक्शन

प्रदेश में महिला सरपंचों के अधिकारों में किसी के दखल को लेकर पहले गुना जिला प्रशासन ने एक्शन लिया था। महिला सरपंचों के कामकाज के लिए गाइडलाइन जारी की है। इसमें कहा गया है कि सरपंच पद पर चुनी गई महिलाओं के पति उनकी जगह काम नहीं कर सकेंगे। अगर उन्होंने दखल देने की भी कोशिश की, तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। यह नियम पति के साथ-साथ सभी रिश्तेदारों पर लागू होगा।

सरपंच पति कैसे कर रहे दादागीरी

छतरपुर : ममोन पंचायत, जहां दबंग आते हैं, तो सरपंच जमीन पर बैठती हैं

छतरपुर की ममोन पंचायत की सरपंच ग्यासी बाई हैं। हाल ही में सरपंच ग्यासी बाई पंचायत के सचिव की शिकायत लेकर स्थानीय सांसद व केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र खटीक से मिलने गई थी। इस दौरान उनके साथ गए ठाकुर तो शिकायत पत्र लेकर सांसद के साथ कुर्सी पर बैठकर बात कर रहे थे, लेकिन सरपंच एक कोने में जमीन पर बैठी थीं। इस दौरान दैनिक भास्कर संवाददाता राजेश चौरसिया ने ग्यासी बाई से बात की तो पता चला कि सरपंच बनने के बाद से पंचायत में कुर्सी पर नहीं बैठने दिया गया, सभी कुर्सियों पर बैठते हैं, जबकि सरपंच जमीन पर। सरपंच के बेटे राकेश कुमार का कहना है कि पंचायत की सरपंच वह जरूर है, पर चलाते गांव के दबंग हैं।

नर्मदापुरम : बनखेड़ी में सरपंच पति ने सचिव की कॉलर पकड़ी

बनखेड़ी जनपद की ग्राम पंचायत खैरुवा में 15 अप्रैल को उदयपुरा शाला भवन में ग्राम सभा रखी गई। इस दौरान सरपंच सुनीता ठाकुर के पति गुड्‌डू ठाकुर और उप सरपंच हेमराज पटेल पहुंचे। दोनों ने सचिव ओमप्रकाश पटेल को धमकाया कि पंचायत में वही होगा, जो वे चाहेंगे। जब ओमप्रकाश ने इनकार कर दिया तो उनके साथ के साथ गाली-गलौज की। इतना ही नहीं, ओमप्रकाश की कॉलर पकड़कर झूमा-झटकी की। आरोप है कि सरपंच पति ने ग्राम सभा कस रजिस्टर फाड़ दिया। पुलिस ने सचिव की शिकायत पर दोनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

सागर : बैठक ले रहे थे पति, सरपंच को नोटिस

देवरी एसडीएम ने 17 मार्च 2023 को इमझिरा सरपंच रुक्मणी पटेल को नोटिस जारी किया। इसमें कहा गया कि सरपंच होने के बाद भी आप किसी भी मीटिंग में उपस्थित नहीं रहतीं। उनकी जगह प्रतिनिधित्व के नाम पर राजाराम पटेल मौजूद रहते हैं। वह कर्मचारियों पर काम कराने के नाम पर दबाव बनाते हैं। हालांकि इस नोटिस के जवाब के बाद उन्हें चेतावनी दी गई थी कि आगे से राजाराम पटेल कार्यालयीन काम में उपस्थित हुए, तो कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, सरपंच को हटाने की कार्रवाई की जाएगी।

सागर में महिला जनप्रतिनिधि की जगह उनके पतियों के बैठक में शामिल होने के मुद्दे को लेकर करीब 7 महीने पहले कलेक्टर ने भी आदेश जारी किया था। कलेक्टर ने कहा था कि यदि सरपंच पति या पंच पति महिला सरपंच व पंच के स्थान पर ग्राम पंचायत और ग्राम सभा की बैठकों में भाग लेते हैं तो तत्काल संबंधित महिला सरपंच और पंच के खिलाफ पद से हटाने की कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी। ऐसी शिकायतों में निर्धारित समयावधि में कार्रवाई नहीं हो पाती है, तो इसके लिए एसडीएम व जनपद पंचायत सीईओ व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह होंगे।

रीवा : यहां तो पंचायत में पुरुष सरपंच के पुत्र का कब्जा

रीवा में महिला सरपंचों के निर्वाचित होने के बाद उनके पतियों या अन्य रिश्तेदारों के शपथ लेने की खबरें आई थीं। एक पंचायत तो ऐसी भी है, जहां पुरुष सरपंच है, लेकिन पंचायत पर उनके पुत्र ने कब्जा कर रखा है। ग्राम पंचायत भलुहा कोठार के सरपंच हैं योगेंद्र शुक्ला। जब से उन्होंने पद संभाला उनके पुत्र पंचायत को अपने अनुसार चला रहे हैं। ग्राम रोजगार सहायक पूनम पांडे ने बाकायदा लिखित में जनपद सीईओ शिकायत की है, जिस पर सरपंच को एक नोटिस दिया।

इसी तरह ग्राम पंचायत जोरौट में 16 अगस्त को ग्राम सभा का आयोजन किया। इसमें सरपंच सावित्री सेन मौजूद तो थीं, लेकिन उनके पति भगवानदीन सेन और पुत्र सुरेश सेन उपस्थित थे। बैठक के दौरान सरपंच पचाप बैठी रहीं। पूरी कार्यवाही उनके पति व पुत्र ने संपन्न कराई। शिकायत कलेक्टर तक पहुंची तो सरपंच को नोटिस दिया गया।

यह है पंचायती राज एक्ट की धारा 38

पंचायतीराज कानून 1994 की धारा 38 – हटाना या निलंबन -राज्य सरकार पंचायती राज संस्था के किसी सदस्य समेत चेयरमैन और डिप्टी चेयरमैन को सुनवाई का मौका देते हुए पद से हटा या निलंबन कर सकती है। इसके लिए इस धारा में विस्तृत व्याख्या की गई है, जिसके तहत सरकार यह कार्रवाई अमल में ला सकती है। इसके तहत अयोग्य घोषित किया जाना भी शामिल है।

Ramswaroop Mantri

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