इंदौर। नल जल योजना व ग्रामीण क्षेत्र की सडक़ो और अन्य मुद्दों को लेकर आयोजित की गई साधारण सभा बिना किसी निकाकरण के हंगामे के साथ खत्म हो गई। ग्राम सचिव और दोनों ही पार्टी से जुड़े सरपंच जहां अधिकारियों की हिटलरशाही से परेशान नजर आए, वहीं सरपंचों और अधिकारियों के बीच तूतू मै मै का भी लम्बा दौर चला।
ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए आयोजित की जाने वाली साधारण सभा में भाजपा और कांग्रेस के चुने गए सरपंच और ग्राम सचिव का गुस्सा अधिकारियों पर फूट पड़ा। दोनों ही पार्टियों के नेताओं ने अधिकारियों पर काम नहीं करने और बैठक में बुलाने के बावजूद भी बार बार बैठक निरस्त करने का आरोप लगाया। जिला पंचायत सीईओ वंदना शर्मा के रवैये से परेशान सचिव और सरपंच ने तालाबों के गहरीकरण नहीं किए जाने और नल जल योजना में करोड़ों रुपे खर्च करने के बावजूद भी भौतिक सत्यापन नहीं होने का आरोप लगाया। विधायक जीतू पटवारी (MLA Jeetu Patwari) के प्रतिनिधि व मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के संभागीय प्रवक्ता हरिओम ठाकुर ने बैठक को कचोरी समोसे और चाय की बैठक बताते हुए कहा कि नल जल योजना के तहत 300 करोड़ की राशि जारी की गई, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र में अब भी पानी की समस्या सर उठाए् हैं, जिन सडक़ों पर निर्माण कार्य बताया गया है। वह कच्ची पड़ी हुई है। विभिन्न योजनाओं के पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत ही नहीं किए जा रहे हैं। भाजपा की सरकार के अधिकारी बेलगाम है।
6 साल 35 सरपंचों की जांच, कार्रवाई नहीं
6 साल से सरपंचों के खिलाफ भ्रकष्टाचार के आरोप लगे और जांच में यह सही पाए गए, लेकिन अब तक किसी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की कार्रवाई नहीं की गई है। देपालपुर के िवधायक विशाल पटेल के प्रवक्ता बलराम पटेल ने आरोप लगाया कि सरकारी योजनाओं में पैसा अधिकारियों द्वारा मनमाने तरीके से खर्च किया जा रहा है और योजनाओं के कार्य का भौतिक सत्यापन करने कोई भी जमीनी स्तर पर कार्राई नहीं हो रही है।





