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सत्यपाल और असत्यपाल

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डॉ.अभिजित वैद्य

सत्यपाल का अर्थ है सत्य का पालन करनेवाला l ‘सत्यमेव जयते’ स्वतंत्र भारत का बोधवाक्य स्वीकृत किया
गया था l ‘अंत में सत्य की ही जीत होती है’ यह इसका अर्थ है l
महात्मा गांधी जी ने अपनी जीवनी को ‘मेरे सत्य के प्रयोग’ शीर्षक दिया था I वे मानते थे ‘सत्य और प्रेम
ही ईश्वर है’ l
आज हमारे देश में ईश्वर के नाम पर असत्य का कुहराम मच रहा है l हमारे देश का सत्ताधारी भाजप पक्ष,
उनके नेता, उनके अंधभक्त, उनका वैचारिक परिवार हर रोज असंख्य असत्य निर्माण करनेवाला कारखाना
गत अनेक दशक चला रहे हैं l क्योंकि ईश्वर जैसी संकल्पना का सत्य के साथ जो रिश्ता है वह उन्हें शायद
मालूम नहीं होगा l ‘असत्यमेव जयते’ यह उनका शायद बोधवाक्य होगा l हिंदुत्ववादियों के एकत्रित चरित्र
को अगर शीर्षक देना होगा तो ‘हमारे असत्य के प्रयोग’ ऐसा देना ही उचित रहेगा l इसलिए हमे उनका
नामकरण ‘असत्यपाल’ करना उचित लगता है l यह परिवार केवल असत्य का प्रचार नहीं करता अपितु
उनके अंतिम ध्येय के विरुध्द खड़े रहनेवाले हर सत्य को असत्य साबित करने का प्रयास करता है l यह सत्य
कहनेवाले हर सत्यपाल का वह निर्घ्रुणता से निर्दालन करता है l सत्यपाल और असत्यपाल के बीच का यह
संघर्ष हमारे देश में प्राचीन काल से जारी सनातन संघर्ष है l प्राचीन काल के वैदिक एवं अवैदिकों का
संघर्ष, आर्य और अनार्यों का संघर्ष, ये उनके ही रूप हैं l इस प्राचीन संघर्ष ने आज संघ एवं संघेतर, भाजपा
एवं भाजपेतर ऐसा रूप धारन किया है I लेकिन हिंदुत्ववादी परिवार ने इसे हिंदू एवं मुस्लिम ऐसा चालाक
नाम दिया है l इस रूप को जब चाहे दलित एवं सवर्ण की नजर से देखने की व्यवस्था कर रखी है l अतः
हिंदूराष्ट्रकी ओर अगर बढ़ना है तो सभी हिंदुओं की एकता करनी होगी l इसके लिए मुस्लिम द्वेष तथा हिंदू-
मुस्लिम संघर्ष हमेशा धधगता रखना उपयोग में आता है l मुस्लिम राजवट तथा उन्होंने किए हुए
अत्याचारों की रोचक कहानियाँ यह आग भड़काने के लिए उपयोगी होती है l इन कहानियों के पीछे हिंदू
सवर्णों ने हजारों वर्ष दलितों पर किए हुए अत्याचार छुपाए जाते हैं l समुचे हिंदू समाज का एक शत्रू बनता
है – मुस्लिम समाज l आरक्षित स्थान तथा दलितों के हक़ का मामला अगर हो तो वहाँ हिंदुराष्ट्र के पेट में
छिपा मनुवाद प्रकट होता है और सवर्ण हिंदूओं का शत्रू बन जाता है – दलित समाज l प्राथमिक उद्देश्य
हिंदूराष्ट्र और अंतिम उद्देश्य मनुराष्ट्र l इसके लिए असत्यपालों की फ़ौज खड़ी कर दी है और असत्य की
जहरीली बारिश की जा रही है l हिंदू धर्म पर आधरित हिंदूराष्ट्र घोषित करने तक और संविधान रद्द नहीं
किया जाता तबतक चुनाव जीतना आवश्यकता है l प्यार और युद्ध में सब माफ़ होता है लेकिन धर्मयुध्द में
तो केवल असत्य ही नहीं अपितु हिंसा एवं क्रौर्य भी माफ़ होता है ऐसा माननेवाले लोग आज सत्ता में है l वे
अहिंसा का मजाक उड़ाते हैं l असत्य का अनगिनत बीज बोकर वे सत्ता तक पहुँच गए है l रयत का राजा –
छत्रपति शिवराय को गोब्राम्हण प्रतिपालक बिरुदावली चिपकाना, राजा के जीवन में जिजाऊ,
शहाजीराजा, एवं संत तुकोबा का स्थान हटाकर दादोजी कोंडदेव, एवं संत रामदास को गुरुस्थान पर

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बिठाना, विद्वान पंडित छत्रपति संभाजी महाराज को व्यसनी स्त्रीलंपट ठहराना, संत श्रेष्ठ तुकोबा को गरुड़
से वैकुंठ में भेजना, महात्मा फुलेजी को बदनाम करना, छत्रपति शाहू महराज के चरित्र पर कीचड़
उछालना, समाजवादी स्वामी विवेकानंद को हिंदुत्ववादी मानना, खुद का दूर से भी कोई संबंध नही फिर
भी शहीद भगतसिंग, सुभाषचंद्र बोस तथा सरदार पटेलजी के बारे में झूठ का रोना करके इन महापुरषों को
अपनी संपत्ति मानकर उनका इस्तेमाल करना, महात्मा गांधीजी के माथे पर विभाजन का कलंक लगाकर
उनकी हत्या करके अलिप्त रहना, आधुनिक भारत की बुनियाद निर्माण करनेवाले पं. जवाहरलाल नेहरु एवं
उनके परिवार की घिनौनी बदनामी करना – आदि इतिहास के नपेतुले उदाहरण l देश की स्वतंत्रता के
पश्चात उन्होंने विचारों एवं सत्ता की राह में आनेवालों को, हरेक विरोधको बदनाम किया या खत्म किया l
उनकी बदनामी की कानाफूसी की मूहीम से आम जनता के श्रध्दास्थान – एस.एम. जोशी, नानासाहेब गोरे,
भाई वैद्य या भारत के पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर भी नहीं छुटे l अब तो सत्ता की ताकत हाथ में होने के
कारण उनके विरुध्द खड़े होनेवालों को, हर सच को, हर व्यक्ति को, सभी यंत्रणा का उपयोग करके
बेदरकारता से कुचल रहे हैं l देश का असली वास्तव, बढ़ती दरिद्रता, विषमता, बेरोजगारी, महँगाई,
सम्मुख नहीं लाई जाती l किसी ने भी जनता के सामने वास्तव प्रस्तुत करने का प्रयास किया तो अंकों के
बुलबुले खड़े किए जाते हैं l महानायक एवं महासत्ता का मायाजाल निर्माण किया जा रहा है l अल्पसंख्याकों
को अकेला छोड़ दिया है l देश की विविधता का इनकार किया जा रहा है l जिस जनता ने सत्ता दी वह
जनता अधिकारहीन हो रही है l सत्ताधारी पक्ष चुनाव के विजय का भस्मक रोग पीड़ित रुग्ण बन गया है l
भस्मरोग पीड़ित व्यक्ति को खाने के लिए बहुतकुछ दिया जाए तो फिर भी उसकी भूख मिटती ही नहीं l
मतों की एवं विजय की इनकी भूख कभी भी मिटती नहीं l जहाँ विरोधकों की सत्ता होती है वहाँ साम-दाम-
दंड उपयोग करके कुटिल नीति अपनाकर उनकी सत्ता का उच्चाटन किया जाता है l जिस लोकतंत्र में
विरोधकों को खत्म किया जाता है वहाँ हुक्मशाही हो जाती है l
ऐसे मोड़ पे देश खड़ा था तब एक ‘सत्यपाल’ अचानक खड़ा हुआ और उसने एक भयानक सत्य की
स्वाकारोक्ति दी l यह सत्यपाल अन्य कोई नहीं अपितु असत्यपाल के गुट का ही एक महान व्यक्ति होने के
कारण खलबली मची l इस खलबली की वजह थी जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल तथा भाजपा के ज्येष्ठ नेता
सत्यपाल मलिक ने पत्रकार करण थापर को ‘दी वायर’ के यु ट्यूब वाहिनी को १६ अप्रैल २०२३ को दी
हुई स्फोटक मुलाकात l सत्यपाल मलिक अगस्त २०१८ से अक्तूबर २०१९ तक कुल १४ महीनों तक जम्मू-
कश्मीर राज्य के राज्यपाल थे l यह कालावधि जम्मू-कश्मीर के इतिहास का अत्यंत महत्त्वपूर्ण साबित होगाl
उन्हीं के ही शासन में इसी कालावधि में २१ नवंबर २०१८ को जम्मू-कश्मीर विधानसभा विसर्जित की गई
थी l ८ फरवरी २०१९ को जम्मू-कश्मीर एवं लडाख का विभाजन करके उन्हें केंद्रशासित प्रदेश का दर्जा
दिया गया l १४ फरवरी २०१९ को पुलवामा में हमारे लष्कर के दल पर हमला हुआ l २६ फरवरी २०१९
को पाकिस्तानस्थित बलाकोट मे जैश-ए-मोहम्मद नामक आतंकवादी संघटना की छावनी पर भारत ने
सर्जिकल स्ट्राइक की और ५ अगस्त २०१९ को ३७० कलम हटा दिया गया l अपनी मुलाकात में सत्यपाल
मलिक जी ने यह कह दिया था की पुलवामा में लष्कर के दल पर हुआ हमला और उसमें हुई ४०
सी.आर.पी.एफ़ जवानों की मौत हम टाल सकते थे l ऐसा कहकर उन्होंने इस घटना की जिम्मेदारी पूरी
तरह से मोदी सरकार की ओर जाती है ऐसा सूचित किया था l ‘मैंने यह मत उसी दिन शाम प्रधानमंत्री
मोदी जी को दूरभाषा पर व्यक्त किया था तब उन्होंने मुझे चुप रहने के लिए कहाँ l इतना ही नहीं तो देश के
सुरक्षा सलाहगार अजित डोवाल, जो मेरे वर्गमित्र हैं उन्हें भी मैंने तुरंत बता दिया l उन्होंने भी मुझे चुप
रहने के लिए कहाँ l ढाई हजार जवानों को कभी भी सड़क से सफर नहीं की जाती l सुरक्षा हेतु उन्हें हवाई

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मार्ग से ही सफर की जाती है l इसके लिए केवल ५ हवाई जहाज की आवश्यकता थी, जिसकी माँग तीन
महीने पूर्व गृहमंत्री राजनाथसिंह जी के कार्यालय की ओर की गई थी l ऐन मौके पर इस माँग को अमान्य
किया गया और इन जवानों को सड़कों से ले जाने का आदेश दिया गया l यह सड़क ‘सॅनिटाइज’ नहीं की
थी l इस सड़क से आसपास के जुडनेवाली ८-९ सड़के बंद नहीं की गई थी l आतंकवादी कम-से-कम दस दिन
आसपास टहल रहा था l लष्कर का इतना बड़ा दल होने पर भी पूरी सहजता से बहुत बड़े स्फोटक भरी
गाड़ी ला सका l यह सब टाल सकते थे l ४० जवानों के प्राण बच सकते थे l’
वास्तव में जिस कश्मीर राज्य में यह हमला हुआ उस समय कश्मीर केंद्रशासित प्रदेश बन चुका था l महबूबा
आतंकवादी हमलों का साथ देती है इस कारण भाजपा ने उनका समर्थन वापस लिया था और परिणामतः
वह सरकार और उस राज्य की विधानसभा बरखास्त की गई थी l अतः यह सब जो घटित हुआ इसकी पूरी
जिम्मेदारी पूर्णतः केंद्र की ओर जाती है इसपर कोई संदेह नहीं l लेकिन यह जब हुआ तब इसे उस समय के
जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिकजी ने बिलकुल चार साल बाद देश के सम्मुख खुलेआम स्पष्ट
किया l लेकिन मार्च-२०१९ के पुरोगामी जनगर्जना अंक के संपादकीय में हमने जो लिखा था उसमें से कुछ
अंश इस निमित्त पुनः देना हमें आवश्यक लगता है l इस संपादकीय में हमने लिखा था की “इस हमले ने
हमारी सुरक्षायंत्रणा के बारे में बहुत सारी आशंकाएँ खड़ी कर दी है l कश्मीर के इन्स्पेक्टर जनरल ऑफ़
पुलिस ने “अति तात्कालिक” इस शीर्षक के अंतर्गत ८ फरवरी को लिखे हुए पत्र में इस हमले की संभावना
व्यक्त की थी l यह पत्र सभी महत्त्वपूर्ण पुलिस अधिकारी, लष्कर के प्रमुखअधिकारी, निमलष्करी दलों के
अधिकारी, सीमा सुरक्षा दलों के अधिकारी, इन सभी को भे दिया था l इतना सब करने पर भी मूलतः
हवाई मार्ग से जानेवाले आरक्षित पुलिस जवानों को, यह निर्णय रद्द करके ऐन समय पर २५४७ जवानों को
जम्मू से कश्मीर करीबन २७० कि.मी. का प्रवास ७८ वहानों के दलों से एक ही समय पर भेजने का निर्णय
लिया गया l यह अत्यंत गोपनीय जानकारी आतंकवादियों को पता चली और ३५० किलो के स्फोटक एक
महेंद्र स्कॉर्पियो गाड़ी में लेकर एक युवा अतिरेकी एक गली से आकर दल पर धड़क गया l इस सभी गंभीर
त्रुटी की जिम्मेदारी मोदी सरकार की ओर जाती है l
जब यह सब हो रहा था तब देश के प्रधानमंत्री क्या कर रहे थे? उस संपादकीय में हमने लिखा था की,
“हमले के समय मोदीजी जिम कॉर्बेट पार्क में दोपहर से जंगल सफारी कर रहे थे, नाश्ता कर रहे थे, सवा
पाँच बजे रुद्रपुर रैली को मोबाईल से संबोधित कर रहे थे l मोदी जी शाम ६.४५ को सफारी एवं भाषण से
मुक्त हो गए और उन्होंने पहला ट्विट किया l राहुल गांधीजी का ट्विट छह बजकर नौ मिनट से आया l
हमला एवं ४०-४२ जवानों का शहीद होने का गंभीर समाचार उन्हें कुछ मिनटों में ही समझ गया होगा l
हमला दोपहर साडेतीन के आसपास हुआ l कुछ भी कहे लेकिन देश के प्रधानमंत्री का यह वर्तन आक्षेपार्ह है”
सत्यपाल मलिकजी को मुलाकात में करण थापर ने पूछा था की ‘देश के जवान हुतात्मा होने पर उसी समय
प्रधानमंत्रीजी ने इस तरह का बर्ताव क्यों किया ?’ इस पर उन्होंने कहाँ की, ‘मुझे चुप रहने के लिए कह
दिया इससे मैं समझ गया की इसकी सुई पाकिस्तान की ओर जाएगी और मोदीजी चुनाव जीतने के लिए
इसका उपयोग करेंगे’ l हमने हमारे संपादकीय में यह संभावना लिखी थी और ठीक वैसा ही हुआ l मोदीजी
पुलवामा हुतात्माओं के नाम पर पूरे देश में वोट माँगने के लिए घूमते रहे l उनके यु ट्यूब पर उपलब्ध एक
जाहिर प्रचार सभा में किए हुए भाषण के कुछ अंश दे रहे है l

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“ मैं मेरे फर्स्ट टाइम वोटर्स से कहना चाहता हूँ की आपका अपना पहला वोट पुलवामा में जो वीर शहीद हुए
उन वीर शहीदों के नाम समर्पित हो सकता है क्या?”
जो सच है वह यह है l वह बहुत ही भयानक एवं लज्जास्पद है l जिस प्रधानमंत्री के गृहमंत्रालय ने अपने
जवानों के लिए जम्मू से श्रीनगर तक की यात्रा हेतु ५ हवाई जहाज देने से मना किया उसी प्रधानमंत्रीजी ने
खुद के लिए ८००० करोड़ रुपयों का अमेरिका द्वारा तैयार किया हुआ अत्याधुनिक एवं आलिशान हवाई
जहाज ‘एअर इंडिया वन’ जनता की ही पैसों से १ अक्तूबर २०२० को खरीद लिया l तब पूरा देश कोविड
का सामना कर रहा था l कम-से-कम अभी तो जनता ने यह सवाल पूछना चाहिए की हमारे जवानों के लिए
हवाई जहाज देना क्यों अस्वीकृत किया ? यह हमला टाला जा सकता था तो इसे टालने का प्रयास क्यों
नहीं किया गया ? ऐसा सवाल करना चाहिए l पुलवामा का सच बाहर आने पर कुछ ही घंटों में फिर से
अतिक-अशरफ की हत्या की उलझन में डाल दिया l ये दोनों भी नामचीन गुंडे होने के कारण कारागृह में
थे l उनके अपराधों की छान-बीन करके उन्हें सजा देने का काम देश की न्यायव्यवस्था कर रही थी l लेकिन
‘जय श्रीराम’ कहकर दो आवारा लडकों ने उनका पूरा न्याय भरे चौक में तथा पुलिस की सुरक्षा में किया l
आतंवादियों के जिस हमले में ४० जवान हुतात्मा हुए उस हमले का वृत्त प्रसारित करने के लिए चैनलों के
पास समय नहीं था l चैनलों के असत्यापालों ने एक शर्मनाक सत्य छुपाने का पूरा प्रयास किया l सत्ताधारी
पक्ष की ओर से सत्य की अपेक्षा करने की कोई गुंजाईश ही नहीं थी l सत्य कहनेवाले सत्यपाल को झूटा
ठहराने के लिए पूरी यंत्रणा सज्ज हो गई l देश के गृहमंत्री अमित शहा ने सत्यपाल को ही उलटा सवाल
किया की यह सत्य उस समय क्यों नहीं बताया और सत्ता से दूर होने पर क्यों बताया ? उन्हें अब यह बताने
की आवश्यकता है की ‘अतीत का सत्य यह सत्य ही रहता है l वह वर्तमान में आने पर असत्य नहीं होता’ l
सत्ता में होते हुए किसी ने भी एखाद सच क्यों नहीं कहा, क्यों की उस व्यक्ति ने गोपनीयता की शपथ ली
चुकी होती है l लेकिन सत्ता से दूर होने पर यह बताया तो यह असत्य नहीं होता l कोई ऐसा भी कहेगा की
‘सौ चूहे खाकर बिल्ली चली हज’ ‘कब क्यों न हो कोई पूजा पाठ करने लगता तो ईश्वर के नाम पर
राजनीति करनेवाले आक्षेप क्यों लें ? कोई कहेगा की, ‘जब इन्सान मृत्यु के द्वार पर खड़ा होता है तब उसे
सच बलने की उपरति होती है’ l हम कहते है की ‘मृत्यु के द्वार पर जब कोई व्यक्ति सच बोल रहा है तो उस
सत्य की कीमत कम नहीं होती l ऐसी ही उपरति राम जेठमलानी को भी कुछ दिन पहले हुई थी l उन्होंने
मोदी एवं अमित शहा को उनकी गलतियों की कृति में सहायता करने के उपलक्ष्य में जनता की माफ़ी माँगी
थी l पूरी जिंदगी असत्य का समर्थन करनेवाला अगर कोई अपना एक कदम शमशान में रखकर सच बोल
रहा हो तो उसका महत्त्व कम नहीं होता, वह आखिर में सच ही रहता है l तो उसी वक्त सत्यपाल
मालिकजी ने अपने पद का इस्तिफा क्यों नहीं दिया ? ऐसा नैतिक सवाल भी उन्हें पुछा जा सकता है l
लेकिन इस तरह का सवाल पूछना मानो सच से कतराना होगा ऐसा हमें लगता है l सत्यपाल मलिक का
क्या होगा ऐसा प्रश्न है l उनके पीछे सीबीआय की झंजर लगा दी इसका किसी को आश्चर्य नहीं लगा l लेकिन
उनके पीछे उनका जाट समाज तथा किसान मजबूती से खड़े हैं l
सत्यपाल मलिकजी ने और अधिक सत्य जनता के सम्मुख रखे l मोदीजी को भष्टाचार की नफरत नहीं है l वे
पूरी तरह से अज्ञानी हैं और खुद की मस्तीमें चूर होते हैं l ऐसाही उन्होंने कहा l पूरा अदानी प्रकरण इसकी
स्पष्टता से साक्ष देता है l वास्तव में माध्यमिक पाठशाला का शिक्षण छोड़ देनेवाली, कम वाचन की हुई, जो
रेलस्थानक नहीं है वहाँ चाय बेचने का दावा करनेवाली कोई व्यक्ति स्वयं को विश्वगुरु घोषित कर सकती है
और इसी व्यक्ति के चरणों में देश के तमाम पढ़े-लिखे लोग गिडगिड़ा रहे हैं यह अतर्क्य है l मोदीजी का

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गुजरात मोडेल ऐसा ही है l नोटबंदी के समय काला धन वापस आएगा और आतंकवादीयों के हमले बंद होने
का दावा भी कितना झूट था यह भी दिखाया दिया l कोविड महामारी के दरमियान मृतकों का सही आँकड़ा
कभी भी सम्मुख नहीं लाया गया l लेकिन जनता असत्य के दायरे में कितना आ सकती है और जनता का
सत्य का भान कितना छुट सकता है इसका उदहारण है हमारा देश l
भारत के १८ वे पूर्व स्थलसेना प्रमुख शंकर रॉय चौधरीजी ने भी ‘टेलिग्राफ’ को दी हुई मुलाकात में
पुलवामा में हुए आतंवादियों के हमले को तथा जवानों की मृत्यु को केंद्र सरकार को ही जिम्मेदार ठहराया
है l असत्यपाल की फ़ौज अब देश के पूर्व लष्कर प्रमुख को भी देशद्रोही ठहराने की कोशिश में लगेगी l इस
फ़ौज का नेतृत्व रिजीजू, इराणी, अनुराग ठाकूर, पात्रा आदि करेंगे और अर्णव, अंजना, रजत तथा रोहित
उच्चरवा यह देशकार्य आगे जारी रखेंगे l
सच को मारने का और एक प्रभावी मार्ग है – उस सच को अनुल्लेख से मारना l सत्यपाल मलिक के बारे में
मोदी एवं उनके सहयोगी कुछ भी नहीं बोलते l इस सत्य को अनुल्लेख से मारने की नीति हो सकती है l
और जैसे ही चुनाव नजदिक आएँगे, तब इस सत्य का अंत करके चुनाव जीतने का कुछ नया ‘मास्टर प्लान’
भी सम्मुख आएगा l जनता फिर एक बार असत्य के घेरे में आएगी और अनेक वर्षों बाद फिर एक बार किसी
सत्यपाल की सदविवेकबुध्दि जागृत होकर वह देश के सम्मुख सत्य रखेगा l असत्यपालों की फ़ौज उस सत्य
को कुचलकर निर्वेधता से सत्ता का उपभोग लेती रहेगी l सत्यपाल एवं असत्यपालों का यह चिरंतन संघर्ष
शुरू रहेगा l लेकिन यह धूप एवं बरसात, प्रकाश एवं अंधेरा जैसा निसर्गक्रम नहीं l इस निसर्गक्रम में सृष्टि
का पहिया घूमता रहता है l हर रात के गर्भ में कल का सबेरा छिपा होता है l आज असत्य का गाढ़ा अँधेरा
आसपास छा गया है l असत्य के अँधेरे का यह जाल दूर करके असत्य का उषःकाल हमें चाहिए तो हर एक
सत्यपाल के समर्थन में हमें खड़े रहना चाहिए l इसके लिए, मोदीजी ने पुलवामा के हुतात्मा जवानों के नाम
पर मतों की जो भीख माँगी थी और चुनाव जीत लिया था, अब उन हुतात्माओं को न्याय देने हेतु उनकी
किसी भी फरेबी बातों में उलझकर उन्हें सत्ता से हटाना आवश्यक है l

Ramswaroop Mantri

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