बालेसर (जोधपुर)
ये जश्न ना होली का है… ना दिवाली और ना ही कोई तीज त्योहार का, लेकिन इस गांव में होली-दिवाली सा माहौल है क्योंकि, मंगलवार को जोधपुर जिले के इस गांव से ब्याही सैकड़ों बेटियां अपने भाइयों से मिलने फिर गांव लौटीं … मौका था सामूहिक भाई-बहन स्नेह मिलन समारोह का …।
दरअसल, ये जश्न चल रहा है बालेसर कस्बे के चावण्डा गांव में… जहां पूरे गांव की शादी होकर विदा की गई सभी बेटियों को गांव लौट कर एक दिन के जश्न में शामिल होने का न्योता दिया गया। इसके बाद महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब, हरियाणा, गुजरात, कर्नाटक, पुणे, तमिलनाडु, सहित देश के कई राज्यों से गांव की करीब 400 बेटियां इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए पहुंचीं।
सभी को एक साथ मिलने का मिलता है मौका
इस कार्यक्रम का आयोजन करने वाले समिति के सदस्यों ने बताया कि समाज की कई शादीशुदा बहनें राजस्थान समेत देश के अलग अलग प्रदेशों में रहती हैं। उन्हें ऐसा मौका नहीं मिलता कि वे अपने बचपन की सहेलियों और गांव की बहनों से एक साथ मिल सकें। ऐसे में ये स्नेह मिलन का आयोजन करके सभी को एकत्रित करने का मौका मिला।
चावण्डा गांव की बेटी खमा देवी पत्नी भरत सिंह राजपुरोहित जो इस कार्यक्रम में भाग लेने गुजरात के कच्छ भुज से आयी हैं। खमा देवी ने बताया कि उनका ससुराल बावड़ी कलां (जोधपुर) में हैं। लेकिन, पति का गुजरात के कच्छ भुज में मिठाई का का कारोबार हैं। गांव में इस कार्यक्रम के आयोजन की सूचना मिलने पर चार साल बाद गुजरात से अपने बच्चों को साथ में लेकर पीहर चावण्डा गांव आई। गांव में बचपन की सहेलियों और परिवार के लोगों से मिलकर बहुत खुशी हुई।
चावण्डा गांव की ही बेटी सन्तोष देवी पत्नी लक्ष्मण सिंह राजपुरोहित ने बताया कि उसका ससुराल तो नारवा कलां (जोधपुर) हैं, लेकिन पति महाराष्ट्र के पुणे में व्यवसायी हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से गांव में हो रहे इस कार्यक्रम की जानकारी मिली तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा। पति के व्यस्तता की वजह से वो कार्यक्रम में नहीं आ पाए, मगर मैं अपने परिवार और बचपन की सहेलियों से मिलने के इस मौके को खोना नहीं चाहती थी। इसलिए बच्चों के साथ 7 साल बाद अपने पीहर चावण्डा गांव आई। पहली बार यह कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम के माध्यम से स्कूल में साथ पढ़ने वाली सहेलियों से और परिवारजनों से मिल पाई।
गुजरात में ब्याही गई कांता देवी पत्नी जितेन्द्र सिंह ने बताया कि वह अपनी शादी करने के बाद पति के साथ गुजरात चले गए। जहां पर पति के मिठाई का कारोबार हैं। गांव की बहनों एवं भाइयों ने मिलकर इस प्रकार का जो कार्यक्रम पहली बार आयोजित किया उससे बहुत खुशी हुई। 6 साल बाद वापस अपने गांव आई तो कई ऐसी सहेलियां मिलीं जो वर्षों बाद इस कार्यक्रम में मिली। अपने भाई महेन्द्र सिंह, जसवंत सिंह एवं गणपत सिंह और परिवार के लोगों से मिली तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
चावण्डा गांव के निकट ही बड़ली से आयी ममता पत्नी चैनसिंह ने बताया की मेरे गांव की कई बहने पिछले कई सालों से अपने परिवार के साथ देश के अलग-अलग राज्यों में रहती हैं। इस कार्यक्रम का आयोजन करने से हम सब सहेलियां आपस में मिल पाईं। एक दूसरें के साथ दो दिन बिताये। कार्यक्रम में भजन संध्या, नृत्य एवं कलश यात्रा का बहुत लुत्फ उठाया।गांव में सभी बेटियों ने ढ़ोल नगाड़ों के साथ कलश यात्रा निकाली।
कलश यात्रा से हुई कार्यक्रम की शुरुआत
स्नेह मिलन कार्यक्रम की शुरुआत कलश यात्रा निकाल कर की गई। कलश यात्रा कृष्णा मंदिर से ढोल थाली के साथ चामुण्डा माता मंदिर व लटियाल माता की खेजड़ी तक निकाली गई। कलश यात्रा में बहनों ने राधे कृष्ण के गीतों पर डांस का भी खूब आनंद उठाया।कार्यक्रम में महिलाओं के लिए विशेष संगीत कार्यक्रम किया गया। इसमें महिला गायकों को बुलाया गया और रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए।
इसके बाद सभी एक टेंट के नीचे एकत्रित हुए। चामुण्डा माता के नाम भजन संध्या भी आयोजित हुई, जिसमें भजन गायक कलाकारों ने आकर्षक भजनों की प्रस्तुतियां दीं। इस दौरान भाइयों ने अपनी-अपनी बहनों को कपड़े भी गिफ्ट किए। वहीं बहनों के साथ आए गांव के दामादों को ओढ़ावणी दी गई।
बहन, भाइयों ने मिलकर उठाया खर्च
इस आयोजन कर खर्च बहनों एवं भाइयों ने मिलकर उठाया। इस पूरे कार्यक्रम का खर्चा करीब 14 लाख रुपए आया। बहनों ने कार्यक्रम में बुलाए गायक कलाकारों की फीस, टेंट का खर्च उठाया जो की लगभग साढ़े तीन से चार लाख रुपए के बीच आया। वहीं बहनों, दामादों के लिए भोजन, चाय, नाश्ता, पानी सहित, ओढावणी, बहनों को गिफ्ट में दिए कपड़े का खर्च 10 लाख आया, जिसका खर्च भाइयों ने उठाया।

गांव से विदा हुई ये बेटियां शादी के बाद सालों बाद आज अपने बचपन की सहेलियों से मिली हैं।
वाट्सऐप ग्रुप के आईडिया ने बनाई नई परंपरा
इस गांव की बहनों ने सोशल मीडिया के माध्यम से वॉट्सऐप ग्रुप बनाकर ये निर्णय लिया गया कि हमें एक सामूहिक स्नेह मिलन करना चाहिए। सभी बुजुर्गों युवाओं की मंजूरी के बाद युवाओं ने इस स्नेह मिलन समारोह की रूप रेखा तैयार की और इसे भव्य बनाने के लिए वो पिछले काफी दिनों से मेहनत कर रहे थे।





