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विपक्षी दलों की मीटिंग से 10 दिन पहले मांझी की बगावत, NDA में जाने की चर्चा

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पटना

2024 लोकसभा चुनाव से पहले नीतीश कुमार ने 23 जून को पटना में विपक्षी एकता के लिए 18 दलों की बैठक बुलाई है। बैठक से 10 दिन पहले मंगलवार को बिहार की महागठबंधन सरकार से हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के एक मंत्री ने इस्तीफा दे दिया।

HAM के मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के बेटे डॉ. संतोष सुमन ने नीतीश कुमार को इस्तीफा भेज दिया है। सरकार ने इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। सुमन अनुसूचित जाति जनजाति कल्याण मंत्री थे। बिहार में पार्टी के 4 विधायक हैं।

इधर, संतोष सुमन के इस्तीफा देने के बाद चर्चा है कि दो नए मंत्री बनाए जा सकते हैं। इसको लेकर मंगलवार की शाम सीएम आवास पर डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव, मंत्री विजय कुमार चौधरी और जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह की बैठक हुई। मुख्यमंत्री आवास से बाहर निकलने के बाद विजय कुमार चौधरी ने कहा कि 15 जून को नीतीश मंत्रिमंडल का विस्तार होगा। अब जीतन राम मांझी की पार्टी महागठबंधन के साथ नहीं है।

डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने कहा कि जीतन राम मांझी और उनके बेटे को भरपूर सम्मान नीतीश कुमार ने दिया है। जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बनाया, जबकि उनके बेटे संतोष सुमन को कैबिनेट मंत्री बनाया था।जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ललन सिंह ने कहा कि छोटी-छोटी दुकान चलाने से क्या फायदा। अगर यह हमने कहा है तो इसमें गलत क्या है?

इस बीच जदयू विधायक रत्नेश सदा सीएम हाउस पहुंचे। बताया जा रहा है कि उन्हें मंत्री पद की जिम्मेदारी मिल सकती है। वहीं, सीएम हाउस जाने से पहले कहा कि जीतनराम मांझी ने मुसहर समाज को बर्बाद कर दिया है।

संतोष सुमन बोले- हमारा अस्तित्व खत्म करना चाहते हैं नीतीश

इस्तीफा देने के बाद संतोष सुमन ने कहा- नीतीश कुमार हमारा अस्तित्व खत्म करना चाहते हैं। वे हमारी पार्टी HAM का विलय अपनी पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) में करवाना चाहते हैं।

पार्टी बचाने के लिए हमने इस्तीफे का विकल्प चुना है। अभी हम सरकार से अलग हुए हैं, महागठबंधन से नहीं। महागठबंधन में रखना है या नहीं, यह लालू और नीतीश तय करेंगे। सूत्रों के मुताबिक, मांझी के NDA में जाने की चर्चा है।

एक कार्यक्रम में जीतन राम मांझी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ।

एक कार्यक्रम में जीतन राम मांझी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ।

इस्तीफे के बाद डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलने उनके आवास पर पहुंचे। वहीं, कैबिनेट की 11:30 बजे होने वाली मीटिंग का समय बढ़ाकर शाम 4:30 बजे कर दिया गया।

NDA में जाने पर अभी फैसला नहीं
NDA में जाने के सवाल पर संतोष सुमन ने कहा- इस पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है। हम अकेले भी चुनाव लड़ सकते हैं। फिलहाल हम महागठबंधन के साथ हैं। हम तो रहना चाहते हैं, लेकिन बड़ी पार्टियां जदयू और आरजेडी हम को नहीं रखना चाहती हैं।

नीतीश कुमार के मनाने और समझाने की बात तो तब होती है जब आपका अस्तित्व रहे, इसलिए हमने पार्टी को चलाने के लिए अलग होने का फैसला लिया है। जब नीतीश कुमार से हमारी आखिरी मीटिंग हुई, उससे पहले भी हमारे सामने प्रस्ताव रखा गया था। जब एक बार इस्तीफा दे दिया तो फिर वापस लेने की बात कहां है।

अब कैबिनेट का होगा विस्तार
इस्तीफे के बाद डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव सीएम नीतीश कुमार से मिलने पहुंचे। दोनों में चर्चा हुई। फिर सरकार में शामिल सभी दलों की मीटिंग बुलाई गई। इसमें SC-ST कल्याण विभाग का प्रभार किसे दिया जाए, उस पर चर्चा हो रही है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस और जदयू के कोटे से मंत्री बनाए जाएंगे। संतोष सुमन की जगह रत्नेश सदा को मंत्री बनाया जा सकता है। रत्नेश सदा मांझी समाज से आते हैं। वह सहरसा के सोनवर्षा से जदयू विधायक हैं।

इस्तीफे पर JDU और RJD ने क्या कहा?
संतोष सुमन के इस्तीफे पर JDU और RJD का बयान आया है। JDU की मंत्री लेशी सिंह ने कहा- नीतीश जी ने जीतन राम मांझी को CM बनाया था। ऐसे लोग आते-जाते रहते हैं। कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

RJD प्रवक्ता शक्ति सिंह ने कहा- पद से इस्तीफा देना झटका नहीं है। कैबिनेट में नहीं रहने का फैसला उनका है। 2015 में भी कई बार इधर-उधर हुए थे, फिर लौट कर आए। वो उन्हीं लोगों के पास जाना चाहते हैं जिन्होंने उनके मंदिर जाने के बाद उसे धुलवाया था।

महागठबंधन में अनदेखी के आरोपों पर उन्होंने कहा कि लोग हटते हैं तो अनदेखी का आरोप लगाते हैं। अब तक कैबिनेट में थे तो अनदेखी नहीं हो रही थी क्या? जन्नत का रास्ता किसने-किसको दिखाया है, ये हम नहीं जानते हैं क्या?

लालू जी की कृपा से संतोष सुमन विधान परिषद के सदस्य बनेंः शिवानंद

संतोष सुमन के इस्तीफे पर राजद के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने कहा है कि इस्तीफा किसको दिया जाता है। यह जीतन बाबू ने सुमन को शायद नहीं बताया। विजय कुमार चौधरी को इस्तीफा देने का क्या मतलब था। जीतन बाबू ‘चौबे’ से ‘छब्बे’ बनने के चक्कर में ‘दूबे’ भी नहीं बन पाएं। उन्होंने कहा कि विधानसभा का चुनाव हारने के बाद लालू जी की कृपा से संतोष सुमन विधान परिषद के सदस्य हैं। उसी हैसियत से नीतीश मंत्रिमंडल के सदस्य भी थे। जीतन बाबू की बेचैनी की वजह दूसरी है।

Ramswaroop Mantri

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