अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

पंचायत चुनाव में टीएमसी का जलवा,भाजपा की उम्मीदें धराशाई

Share

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के कमजोर पड़ने के बहुत सारे दावों और विश्लेषणों को किनारे लगाते हुए पंचायत चुनावों में पार्टी ने भारी जीत हासिल की है। चुनावों में हुई भारी हिंसा ने जहां राज्य के कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए, वहीं मृतकों की शिनाख्त ने आने वाले दिनों में तृणमूल कांग्रेस की राजनीति में उलटफेर की संभावना का भी संकेत दिया है। बंगाल में पंचायत चुनाव यदि लोकसभा का पूर्वाभ्यास है तो टीएमसी ने भाजपा समेत कांग्रेस और वाममोर्चा को बहुत पीछे छोड़ दिया है।

पंचायत चुनावों में शनिवार से शुरू हुए हिंसा में अब तक 18 लोग मारे गए हैं जिसमें से 14 अल्पसंख्यक समुदाय के थे। तृणमूल कांग्रेस के लिए यह चिंताजनक खबर है। दरअसल, मजबूत विपक्ष के अभाव में सत्तारूढ़ टीएमसी को वहां ज्यादा चुनौती मिली जहां मुसलमानों की संख्या अधिक है।

हिंसाग्रस्त क्षेत्रों को चिन्हित करने से अंदाजा लगाया जा सकता है कि अल्पसंख्यकों ने एक ओर जहां टीएमसी का समर्थन किया वहीं दूसरी ओर जगह-जगह विरोध भी किया। शनिवार को मुर्शिदाबाद, मालदा, उत्तर और दक्षिण दिनाजपुर, उत्तर और दक्षिण 24 परगना और बर्दवान जिलों से हिंसा की घटनाएं सामने आईं, जिनमें से कई ऐसे इलाके हैं जहां 30 प्रतिशत से अधिक आबादी मुस्लिम है। माना जाता है कि मुर्शिदाबाद को छोड़कर, जहां विभिन्न टीएमसी गुटों ने कथित तौर पर एक-दूसरे पर हमला किया था, टकराव की अधिकांश घटनाओं में एक तरफ टीएमसी और दूसरी तरफ इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) शामिल थे। आईएसएफ का कांग्रेस और वामपंथी दलों से गठबंधन था।

मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में आईएसएफ ने टीएमसी के समक्ष कड़ी चुनौती पेश की है। आईएसएफ पिछले विधानसभा चुनावों के दौरान अस्तित्व में आई और राज्य के अल्पसंख्यकों में अपना मजबूत आधार बनाया। मतदान से ठीक पहले और चुनाव के दिन तक, सबसे अधिक हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में से एक भांगर रहा, जहां से आईएसएफ ने अपनी एकमात्र विधायक सीट 2021 के विधान सभा चुनावों में जीता।

पश्चिम बंगाल पंचायत चुनावों में कड़ी टक्कर के बाद सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने दार्जिलिंग और कलिम्पोंग को छोड़कर हर जिले में त्रिस्तरीय चुनावों में जीत हासिल की। भाजपा दूसरे स्थान पर तो वाम-कांग्रेस गठबंधन तीसरे स्थान पर हैं। शुरुआत में ऐसी उम्मीद थी कि कांग्रेस और सीपीआई (एम) गठबंधन मुर्शिदाबाद और मालदा जिलों में अच्छा प्रदर्शन करेगा, खासकर इस साल जनवरी में मुर्शिदाबाद में सागरदिघी विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस की जीत को देखते हुए यह कहा जा रहा था। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

बंगाल में मुस्लिम इलाकों में एक ताकत के रूप में उभर रहा इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) ने अपने गढ़ भांगर में अच्छा प्रदर्शन किया। सीपीआई (एम) और भूमि अधिग्रहण विरोधी समिति के साथ आईएसएफ का गठबंधन भांगर के कुछ ब्लॉकों में टीएमसी को कड़ी टक्कर दिया।

पश्चिम बंगाल त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की मतगणना आज दूसरे दिन भी जारी है। आब तक घोषित परिणाम के आधार पर ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी  बाकी पार्टियों की उम्मीद को कुचलते हुए बड़ी जीत दर्ज करने की ओर अग्रसर है।  बीती 8 जुलाई को 74 हजार पंचायतों के लिए वोटिंग की गई थी। चुनाव के दौरान हिंसा, पोलिंग बूथों पर मारपीट, बूथ लूटने और आगजनी जैसी घटनाएं सामने आईं थी, जिसकी वजह से 697 बूथों पर पुनर्मतदान का निर्णय लिया गया था। ऐसे में सुरक्षाबलों ने 10 जुलाई को 19 जिलों में सभी 697 बूथों पर की सुरक्षा व्यवस्था संभाल थी बावजूद हिंसा पूरी तरह से रोकी नहीं जा सकी। 8 जुलाई को मतदान के दौरान पूरे राज्य में हिंसा से जुड़ी घटनाओं में 19 लोगों की मौत हुई थी।

कल यानी 11 जुलाई को पंचायत चुनाव की मतगणना शुरू की गई। आज दोपहर 2 बजे तक प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी बड़ी बढ़त के साथ आगे बढ़ती दिख रही थी। पश्चिम बंगाल के पंचायत चुनावों को यदि 2024 के लोक सभा के परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो अभी से कहा जा सकता है कि तमाम लोक-लुभावनी बातों के बावजूद पश्चिम बंगाल में टीएमसी के किले में सेंध लगा पाना भाजपा के लिए आसान नहीं होगा।

सबसे पहले ग्राम पंचायत की 63229 सीटों की स्थिति देखते हैं-

ग्राम पंचायत की तरह  पंचायत समिति की 9730 सीटों में से टीएमसी 2,155 सीटों पर जीत दर्ज कर चुकी है, जबकि 493 सीटों पर बढ़त के साथ सबसे आगे चल रही है। भाजपा फिलहाल बहुत पीछे है।

जिला परिषद की 928 सीटों पर भी टीएमसी 77 सीटों से जीत चुकी है और 92 पर बढ़त के साथ शेष पार्टियों से बहुत आगे चल रही। अभी तक के परिणाम से टीएमसी के खेमें में जहाँ ख़ुशी की लहर दिख रही है, वहीं, भाजपा का प्रदर्शन बेहद निराशा जनक है।

पश्चिम बंगाल में ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद चुनाव की मतगणना आज (बुधवार) दूसरे दिन भी जारी है। TMC ने ग्राम पंचायत की 28,985 सीटों पर जीत हासिल की है, जबकि 1,540 सीटों पर अभी आगे है। वहीं, पंचायत समिति की 2,155 और जिला परिषद की 77 सीटें जीती हैं। इसके साथ ही चुनावों में TMC बड़ी जीत की ओर बढ़ती दिख रही है। ग्राम पंचायत में भाजपा ने अब तक 7,762 सीटें जीती हैं और 417 सीटों पर आगे है। TMC ने भाजपा से चार गुना ज्यादा सीटें हासिल की हैं। ग्राम पंचायत में कांग्रेस 1,073 सीटें, CPI(M) 2,409 सीटें, जबकि अन्य पार्टियां 725 सीटें ही जीत पाई हैं। निर्दलीय उम्मीदवार 1,656 सीटें जीते हैं। अब तक प्राप्त नतीजों में बड़ी बढ़त मिलने से टीएमसी कार्यकर्त्ताओं ने जश्न मनाना शुरू कर दिया है। TMC समर्थकों ने ढोल-नगाड़ों के साथ जुलूस निकाला और महिलाओं ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर खुशी मनाई। दूसरी तरफ, बंगाल के भाजपा अध्यक्ष सुकांता मजूमदार ने नतीजों में गड़बड़ी का आरोप लगाया। वहीं, तृणमूल पर धांधली का आरोप लगते हुए बीजेपी सांसद खगेन मुर्मू मालदार हबीबपुर के मतगणना केंद्र के सामने धरने पर बैठ गए हैं।

बंगाल पंचायत चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने भी मुर्शिदाबाद और मालदा की दो सीटें जीती हैं।

TMC नेता अभिषेक बनर्जी ने कहा कि बीजेपी, सीपीआईएम और कांग्रेस के संयुक्त विपक्ष की निराशा उस उदासी की तुलना में कम है, जिसे मुख्यधारा की मीडिया के दोस्तों ने महसूस किया था। यहां तक कि पश्चिम बंगाल में ममता सरकार को बदनाम करने के लिए आधारहीन प्रचार वाला एक दुर्भावनापूर्ण अभियान भी मतदाताओं को प्रभावित नहीं कर सका। विपक्ष के ममता को वोट नहीं अभियान को अब ममता को वोट दें में बदलने के लिए लोगों का आभारी हूं। हमें निश्चित रूप से प्रचंड जनादेश मिलेगा, जो लोकसभा चुनाव का मार्ग प्रशस्त करेगा।

चुनावों के दौरान हुई हिंसा को लेकर भाजपा की एक फैक्ट फाइंडिंग टीम भी कोलकाता पहुँच चुकी है। फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की तरफ से रवि शंकर प्रसाद ने ममता बनर्जी पर आरोप लगाते हुए कहा है कि, आपकी राजनीति पूरी तरह अत्याचार पर आधारित कैसे हो गई जबकि आपको फ़ाइटर कहा जाता है और आपने 34 साल के लेफ़्ट के इसी तरह के शासन को उखाड़ फेंका था और हमें भी खुशी हुई थी। लेकिन आप तो लेफ्ट से भी आगे निकल गई हैं।” उन्होंने कहा कि , “ममताजी, आपने बंगाल में लोकतंत्र को शर्मशार किया है। चुने हुए उम्मीदवारों को सर्टिफ़िकेट नहीं दिए जा रहे हैं और कहा जा रहा है कि पहले वो टीएमसी ज्वाइन करें।”

इसको लेकर ममता बनर्जी ने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा है कि वह भी एक फैक्ट फाइंडिंग टीम मणिपुर भेजेंगी। कर्नाटक के बाद भाजपा का पश्चिम बंगाल में बेहद कमजोर प्रदर्शन विपक्ष की एकता को ताकत देगा और विपक्षी एकता के केंद्र में ममता बनर्जी की भूमिका और महत्वपूर्ण हो सकती है।

Ramswaroop Mantri

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें