मध्यप्रदेश में आईपीएस-आईएएस अफसरों के नाम पर फर्जी अकाउंट बनाकर लोगों से डोनेशन मांगने का मामला सामने आया है। साइबर अपराधी अफसरों की आईडी उस नेटवर्क पर बना रहे हैं, जहां वो एक्टिव नहीं हैं। उदाहरण के लिए किसी अफसर का असली अकाउंट फेसबुक पर है और ट्विटर पर नहीं, तो ये बदमाश ट्विटर पर उसका फर्जी अकाउंट बना लेते हैं।
दैनिक भास्कर रिपोर्टर को भी दो दिन पहले ऐसा ही एक डोनेशन वाला मैसेज आया था। जब हमने उस अकाउंट की जांच की तो वो फर्जी निकला। पता चला कि मध्यप्रदेश के कई अफसरों के नाम पर नाइजीरिया में बैठे अपराधी ये गेम खेल रहे हैं। हमारी पड़ताल में कई अफसरों के फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट मिले हैं। आइए जानते हैं कैसे अफसरों के नाम पर ठग रहे हैं अपराधी।
एसडीएम के नाम से आया फॉलो नोटी
23 अगस्त को भास्कर रिपोर्टर के ट्विटर अकाउंट पर एसडीएम निकिता मंडलोई के अकाउंट से फॉलो नोटी आया। रिपोर्टर ने अधिकारी समझकर निकिता को फॉलोबैक दे दिया। अकाउंट प्रोफाइल में महिला अधिकारी की फोटो और बायो में उसका पद लिखा हुआ था। अकाउंट लगातार एक्टिव भी दिख रहा था। इसके एक दिन बाद रिपोर्टर ने ट्विटर खोला तो उसे दिखाई दिया कि उसी अकाउंट से महिला अधिकारी ने फोटो के साथ नया पद अपडेट किया है। उसने लिखा कि उसने भोपाल के डिप्टी कमिश्नर एवं एसडीएम के तौर पर कार्यभार संभाला है।
प्रदेश में विधानसभा चुनाव हैं। ऐसे में पिछले दिनों कई अधिकारियों के ट्रांसफर हुए हैं। भास्कर रिपोर्टर ने किसी खबर के सिलसिले में निकिता मंडलोई की जानकारी जुटाई तो पता चला भोपाल के किसी भी इलाके में ऐसी किसी महिला एसडीएम का ट्रांसफर नहीं हुआ है। इसी बीच महिला एसडीएम के अकाउंट से रिपोर्टर को एक मैसेज आता है। मैसेज में एक बीमार बच्चे की तस्वीर होती है।
मैसेज के साथ ही एक क्यूआर कोड होता है। मैसेज में लिखा होता है कि बच्चे को कैंसर है। बच्चे के इलाज के लिए 3 लाख रुपए की जरूरत है। सभी से रिक्वेस्ट है कि बच्चे के इलाज के लिए आर्थिक मदद करें। कोई भी भाई मदद करना चाहता है तो दिए गए क्यूआर कोड या यूपीआई आईडी के माध्यम से पैसे ट्रांसफर करें। आप मदद करेंगे तो इलाज कल ही हो सकेगा।
मदद के इस मैसेज के बाद रिपोर्टर ने उसी अधिकारी से सोशल मीडिया अकाउंट पर मैसेज कर बच्चे की पूरी डिटेल पूछी। उसके पोस्ट से संबंधित सवाल पूछा। उसने जो लिखा था वही जवाब दिया और फिर से डोनेशन करने के लिए जोर देने लगी।
बच्चे के इलाज के लिए आर्थिक मदद करने से पहले हमने अकाउंट को और खंगाला। देखा बायो में अभी भी एसडीएम, बालाघाट ही लिखा हुआ है। आगे बढ़े तो देखा कि उसने दूसरे अधिकारियों के नाम वाले अकाउंट्स के ट्वीट्स को रीट्वीट कर उनको जॉइनिंग या ट्रांसफर की बधाई दी है। फिर कई पोस्ट डोनेशन मांगने वाले दिखाई दिए।
इसके बाद जो दिखा उसने हमारे शक को पुख्ता कर दिया कि ये अकाउंट फेक ही है। धोखाधड़ी के लिए बनाया गया है। उसी अकाउंट से करीब हर दूसरे दिन यही पोस्ट किया जा रहा था कि उसने भोपाल के एसडीएम के तौर पर जॉइन किया है।
इसके साथ ही उसने ठीक 7 दिन पहले 17 अगस्त को ट्वीट किया था कि उसने बालाघाट के एसडीएम के तौर पर जॉइन किया है। इसका मतलब, उसका ट्रांसफर बालाघाट में जॉइनिंग के 7 दिन के भीतर ही हो गया। इसी बीच उसने नई सरकारी गाड़ी के साथ फोटो पोस्ट की। जन्मदिन मनाते हुए तस्वीर पोस्ट की। उसकी करीब 225 पोस्ट्स देखकर ये तो तय हो गया था कि अकाउंट फेक है।
बारीकी से खंगाला तो 4 और फेक अकाउंट दिखाई दिए
डीएसपी नितिका मंडलोई के ट्विटर अकाउंट को और डिटेल में खंगाला, तो 4 अन्य फेक अकाउंट भी मिले। ये फेक अकाउंट रियल अफसरों के नाम पर थे। अकाउंट्स में उनकी तस्वीरें और रैंक सही लिखे हुए थे, लेकिन करेंट पोस्ट और तैनाती की जगह गलत लिखी थी। सभी अकाउंट आपस में एक-दूसरे के ट्वीट्स को रीट्वीट कर रहे थे। एक-दूसरे की पोस्टिंग और ट्रांसफर पर बधाइयां दे रहे थे।
सभी अकाउंट्स में एक बात और कॉमन है। उस बीमार बच्चे की तस्वीर और क्यूआर कोड। इसके बाद हमने सभी आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की रियल आईडी सर्च की। दो अधिकारियों से बात भी की और उनके फेक अकाउंट्स के बारे में भी जाना। ज्यादातर अकाउंट महिला अधिकारियों के नाम पर बनाए गए हैं। उन्हीं अधिकारियों के अकाउंट्स बनाए गए हैं, जिनके ट्विटर पर पहले से कोई अकाउंट नहीं है। आइए सभी फेक अकाउंट्स और उनके रियल अधिकारियों को जानते हैं।
पहला अकाउंट: अनु बेनिवाल आईपीएस
14 अगस्त को भोपाल में थी, उसी फोटो को फ्रॉड के लिए किया यूज
अनु बेनिवाल 2021 बैच की आईपीएस अधिकारी हैं। यूपीएससी में इनकी रैंक 217 थी। अभी इनकी ट्रेनिंग ही चल रही है। इनके रियल इंस्टाग्राम अकाउंट की पोस्ट से पता चलता है कि 15 अगस्त को हैदराबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल नेशनल पुलिस एकेडमी में आईपीएस के तौर पर पहले परेड की। अनु के फेक अकाउंट पर लिखा है कि उन्होंने साउथ दिल्ली जिले में बतौर एसीपी जॉइन किया है, असल में वहां डिस्ट्रिक्ट में डीसीपी या एडिशनल डीसीपी होते हैं। एक जिले के अंदर कई एसीपी होते हैं।
साउथ दिल्ली में वसंत विहार, हौज खास, महरौली और सफदरजंग एन्क्लेव जोन में एसीपी होते हैं। ट्विटर पर हमें इनका कोई रियल अकाउंट नहीं मिला। इनके इंस्टाग्राम वाले रियल अकाउंट पर 68 हजार से ज्यादा फॉलोअर हैं। यहां ये लगातार अपनी प्रोफेशनल एक्टिविटीज से संबंधित पोस्ट डालती रहती हैं। 14 अगस्त को ये भोपाल में थीं। इन्होंने मध्यप्रदेश के डीजीपी सुधीर सक्सेना के साथ तस्वीर पोस्ट की थी। इसी तस्वीर को फेक अकाउंट चलाने वाले फ्रॉड ने भी ट्विटर पर पोस्ट किया था। हमने इनके अकाउंट को फॉलो भी नहीं किया फिर भी हमारे पास इनका डोनेशन मांगने वाला मैसेज आया।
दूसरा अकाउंट: ऐश्वर्या शर्मा, आईपीएस
एनआईटी भोपाल में पढ़ीं, बोली- मैंने कोई डोनेशन नहीं मांगा
ऐश्वर्या शर्मा 2017 बैच की आईपीएस ऑफिसर हैं। ऐश्वर्या एजीएमयूटी कैडर की ऑफिसर हैं। एजीएमयूटी मतलब अरूणाचल, गोआ और मिजोरम यूनियन टेरिटरी। इन्होंने अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई एनआईटी भोपाल से पूरी की है। फ्रॉड करने वाले ने अकाउंट बनाते ही पोस्ट किया कि उसे आईपीएस रैंक मिला है। दो दिन बाद लिखा कि ऐश्वर्या ने बतौर डीसीपी साउथ दिल्ली डिस्ट्रिक्ट में जॉइन किया है। इन दो ट्वीट्स से पहली बार में ही समझ आ जाता है कि यह अकाउंट फेक है।
ऐसा इसलिए क्योंकि यूपीएससी का रिजल्ट आने के एक महीने बाद डीओपीटी द्वारा सर्विस अलोकेट कर दिया जाता है। इसके बाद ही उनकी पहली ट्रेनिंग शुरू होती है। आईएएस और आईपीएस के लिए इनकी पहली ट्रेनिंग मसूरी में होती है। मसूरी में ट्रेनिंग खत्म करके आईपीएस की दूसरी ट्रेनिंग सरदार वल्लभ भाई पटेल नेशनल पुलिस अकादमी हैदराबाद में होती है। ट्रेनिंग के दूसरे फेज में अधिकारियों को जूनियर लेवल पर रिमोट पोस्टिंग मिलती रहती है।
साधारण तरीके से समझें तो सर्विस अलोकेशन के बाद साउथ दिल्ली का डीसीपी बनने के लिए एक अधिकारी को कम से कम दस साल लग जाते हैं। हमने ऐश्वर्या से इनके फेक ट्विटर अकाउंट के बारे में कॉल कर बात की। हमने ऐश्वर्या से जैसे ही कहा कि मैम आपके अकाउंट से बीमार बच्चे के लिए डोनेशन मांगा जा रहा है। इतना सुनते ही ऐश्वर्या चौंक गईं। बोलीं- मैंने कोई डोनेशन नहीं मांगा है। वो कौन सा अकाउंट है? मुझे उसकी तस्वीर भेजिए। फिर हमने उनको चल रहे पूरे फ्रॉड की जानकारी दी।
उन्होंने कहा- ये एक बड़ा फ्रॉड है। मैंने भी कुछ खबरों में देखा है। ये बहुत बड़ा नाइजीरियन फ्रॉड हो सकता है। नाइजीरिया में बैठे हैंडलर्स भारत के लोगों के साथ धोखाधड़ी करते हैं। उनके यहां पर लोकल एजेंट्स होते हैं जो चर्चित लोगों के बिहाफ में पैसे मांगते हैं। देश में इससे जुड़े कई रैकेट्स पकड़े गए हैं। अभी भी इस तरह के फ्रॉड्स लगातार सामने आते रहते हैं।
तीसरा अकाउंट: निकिता मंडलोई एसडीएम
अफसर बोलीं- मैं भी इससे परेशान हूं, रिपोर्ट भी कर चुकी हूं
इनके फेक अकाउंट की जानकारी हम ऊपर बता चुके हैं। यही वो मुख्य अकाउंट है, जिससे हमें बाकी के फेक अकाउंट की जानकारी लगी है। इसी अकाउंट से जुड़ने के बाद हमें बाकी फेक अकाउंट से डोनेशन मांगने वाले मैसेजेस आने लगे। निकिता मंडलोई मध्यप्रदेश प्रशासनिक सेवा की अधिकारी हैं। एमपीपीएससी के 2018 एग्जाम में इनका 23वां रैंक था। फिलहाल ये खंडवा की एसडीएम हैं। इनकी पहली पोस्टिंग बालाघाट में हुई थी।
इंस्टाग्राम पर इनके रियल अकाउंट पर 20 हजार फॉलोअर और 185 पोस्ट्स हैं। ट्विटर पर इनका कोई अकाउंट नहीं है। फेक अकाउंट चलाने वाले इनकी तस्वीरें इंस्टाग्राम से ही उठा रहे हैं। इनके नाम पर जून महीने में भी ट्विटर पर एक फेक अकाउंट बनाया गया था। इसके बाद अब ये दूसरा फेक अकाउंट है।
हमने निकिता मंडलोई से कॉल पर उनके ट्विटर अकाउंट की जानकारी ली। ट्विटर का नाम सुनते ही उन्होंने कहा कि हां मुझे मेरे नाम से चल रहे फेक अकाउंट की जानकारी है। इससे मैं भी परेशान हूं। मैं इसको लेकर रिपोर्ट भी कर चुकी हूं, लेकिन अब तक बंद नहीं हुआ है। मैं इसका अपडेट लूंगी। हमने उनसे पूछा कि आपके फेक अकाउंट से जिन भी आईएएस-आईपीएस अधिकारियों के पोस्ट को रीट्वीट किया जा रहा है, उन्हें हर मौके पर कॉन्ग्रेच्युलेट किया जा रहा है। क्या आप उनमें से किसी को भी जानती हैं? निकिता का जवाब ना में था। उन्होंने कहा वो सारे ही अकाउंट्स फेक हैं।
निकिता मंडलोई ने बताया कि मैं इस फेक अकाउंट की रिपोर्ट करा चुकी हूं, लेकिन आज तक बंद नहीं हुआ है।
5 में से दो अकाउंट डिलीट कर दिए गए हैं…
चौथा अकाउंट: सरजना यादव आईएएस, इंस्टाग्राम से फोटो उठाकर ट्विटर पर डाल रहे थे
ये अकाउंट डिलीट कर दिया गया है। सरजना मध्यप्रदेश कैडर की आईएएस अधिकारी हैं। 2019 की सिविल सेवा परीक्षा में इनकी 126वीं रैंक आई थी। ये इंस्टाग्राम पर काफी एक्टिव हैं। वहां इनके 2 लाख 10 हजार से भी ज्यादा फॉलोअर हैं। यहीं से इनकी तस्वीरें चुराकर इनके फेक ट्विटर अकाउंट पर ट्वीट किए जा रहे थे।
पांचवां अकाउंट: महेश गीते, आईपीएस, ट्विटर पर इनका फेक अकाउंट बनाया
ये अकाउंट डिलीट कर दिया गया है। महेश तेलंगाना कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं। ये महाराष्ट्र के एक किसान परिवार से आते हैं। ट्विटर पर इनका कोई भी रियल अकाउंट नहीं है। इंस्टाग्राम पर 4 हजार से भी ज्यादा फॉलोअर हैं, जहां वो अपनी नौकरी से जुड़े रेगुलर अपडेट देते रहते हैं। तस्वीरें पोस्ट करते रहते हैं। फेक ट्विटर अकाउंट पर इनकी जो तस्वीरें डाली जा रही हैं वो यहीं से उठाई जा रही हैं।





