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इंदौर के राजबाड़ा सहित आसपास के बाजारों में 1100 से ज्यादा फुटपाथ विक्रेता: हॉकर्स जोन बनाएं तो मिलेगा टैक्स, सड़क भी खाली हो जाएगी

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इंदौर

इंदौर के राजबाड़ा क्षेत्र में फुटपाथ विक्रेताओं के खिलाफ नगर निगम का अभियान दो दिन से ठण्डा पड़ गया है। इसका कारण फुटपाथ विक्रेताओं द्वारा राखी के लिए पहले से की गई खरीदी है जिसे वे इन चारों दिनों में ज्यादा से ज्यादा सेल करना चाहते हैं। राजबाड़ा सहित आसपास के बाजारों में 1100 से ज्यादा फुटपाथ विक्रेता हैं।

ये लोग ट्रेड लाइसेंस, बिना बिल और जीएसटी के लम्बे समय से धंधा कर रहे हैं। इन छोटे विक्रेताओं द्वारा सालाना 50 करोड़ रु. की जीएसटी नहीं चुकाया जाता। यह आंकड़ा तो सिर्फ राजबाड़ा के आसपास के क्षेत्रों का है जबकि शहर में हर बाजार में फुटपाथ विक्रेता हैं जिनकी संख्या हजारों में हैं।

इस तरह फैला है धंधा

फुटपाथ विक्रेता वे सारा सामान बेच रहे हैं जो बड़ी दुकानों या शो रूम पर होता है। इनके द्वारा कई ब्राण्डेड कंपनियों के डुप्लीकेट नाम से सामान बेचे जा रहे हैं जो बड़ी दुकानों की तुलना में काफी कम भाव में हैं। ये लोग 5X5 वर्गफीट के ठिये के लिए ये विक्रेता माफियाओं को हर रोज 500 रु. से लेकर 1500 रु. किराया देते हैं। यानी एक विक्रेता द्वारा हर माह 15 15 हजार रु. से 45 हजार रु. का किराया दिया जाता है जबकि बाजारों में ऐसे 1100 विक्रेता हैं।

हॉकर्स जोन में शिफ्ट करें तो मिल सकता है 3% से 18% तक जीएसटी

मामले में ‘दैनिक भास्कर’ ने सीनियर टैक्स प्रेक्टिशनर विनोद भट्‌ट से अलग-अलग आइटम्स पर जीएसटी की प्रक्रिया को समझा। इसमें पता चला कि ये 1100 वेंडर्स (फुटपाथ विक्रेता) अलग-अलग तरह का व्यापार कर रहे हैं। सामान पर 3 से 18 प्रतिशत तक का जीएसटी लगता है। लेकिन इन बाजारों में बैठने वालों से कोई टैक्स वसूली नहीं होती।

बड़े कारोबारियों को परेशानी इस बात से है कि शासन को हम सबसे ज्यादा टैक्स चुकाते हैं। इनके लिए ट्रेड लाइसेंस की अनिवार्यता है। बिना बिल ये व्यापार नहीं कर सकते तथा हर साल इनके द्वारा करोड़ों रु. का जीएसटी चुकाया जाता है। ऐसे में ग्राहकी नहीं होने से इनमें नाराजगी है। इन व्यापारियों का कहना है कि फुटपाथ विक्रेताओं को स्थायी रूप से हॉकर्स जोन में शिफ्ट करें तो स्थायी हल निकल सकता है। सिर्फ राजबाड़ा क्षेत्र के ही वेंडर्स की बात करें तो इन फुटपाथ विक्रेताओं द्वारा सालभर का 50 करोड़ रु. से ज्यादा जीएसटी नहीं चुकाया जाता।

ऐसे समझें टैक्स चोरी का खेल

राजबाड़ा और उसके आसपास के एमटी क्लॉथ मार्केट, रिटेल मार्केट, सराफा, बर्तन बाजार, पिपली बाजार, सुभाष चौक, यशवंत रोड, आड़ा बाजार, गोपाल मंदिर की लाइन, खजूरी बाजार, सीतलामाता बाजार, बजाज खाना, बोहरा बाजार, निहालुपरा के बाजारों में 1100 से ज्यादा वेंडर्स हैं। इनमें होजियरी (सामान्य), क्रॉकरी, लेदर आइटम्स, वेनिटी बैग्स, कॉस्मेटिक के करीब 100 से ज्यादा फुटपाथ विक्रेता हैं।

ये सभी वे आइटम हैं जिनकी कीमत 1 हजार रु. से ज्यादा है। इन आइटम्स पर 18% जीएसटी का प्रावधान है। इनकी एक विक्रेता की रोज की 20 हजार रु ग्राहकी माने तो उस पर 18% से 25 दिनों का (चार अवकाश छोड़कर) हर माह 76 हजार रु. से ज्यादा का जीएसटी बनता है। यानी 100 वेंडरों का हर माह 76 लाख रु. का जीएसटी बनता है। इस तरह इस कैटेगरी में हर साल 9.15 करोड़ रु. से ज्यादा की जीएसटी चोरी की जाती है।

Ramswaroop Mantri

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