इंदौर
अब शरीर के किसी भी अंग में हुआ कैंसर अब लाइलाज नहीं है। कैंसर के इलाज में अब इतनी एडवांस टेक्नीक व ट्रीटमेंट हैं कि गंभीर मरीज भी जल्द ही ठीक हो जाता है। इसके इलाज के लिए अब इम्यूनो थैरेपी व हॉर्मोन्स थैरेपी (टारगेट) इतनी कारगर है कि ज्यादा दवाइयां लेने की जरूरत नहीं है। टारगेटेड थैरेपी में कैंसर पेशेंट सिर्फ एक टैबलेट ही रेगुलर लेते रहें तो कैंसर खत्म होकर वह अपनी सामान्य उम्र तक जीवित रह सकता है।

यह बात देश के टॉप कैंसर एक्सपर्ट्स डॉ. एमबी अग्रवाल (हेमेटोलॉजिस्ट, मुंबई) व डॉ. चिराग देसाई (अहमदाबाद) ने ‘दैनिक भास्कर’ से कही। दरअसल होटल मैरिएट में 8 सितम्बर से इंडियन को-ऑपेरटिव ओन्कोलॉजी नेटवर्क (ICON) की नेशनल कॉन्फ्रेंस चल रही है। इसमें सभी प्रकार के कैंसर के एडवांस इलाज को लेकर देशभर से आए कैंसर एक्सपर्ट्स अपना प्रेजेंटेशन दे रहे हैं।
इस बार इसमें ब्रेन ट्यूमर, गले, मुंह, फेफड़ों, आंतों, यूटेरस सहित कई प्रकार कैंसर के एडवांस ट्रीटमेंट को लेकर एक्सपर्ट्स अपने अनुभव साझा कर रहे हैं। कॉन्फ्रेंस के कोऑडिनेटर डॉ. एसपी श्रीवास्तव (सीनियर मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट) ने बताया कि कैंसर शरीर के अलग-अलग ऑर्गन्स में कैसे प्रेजेंट करता है। इसी तरह अब इसके इन्वेस्टिगेशन और ट्रीटमेंट के लिए किस प्रकार की और कैसे-कैसी टेक्नीक अपडेट हुई है। यह बताने एक्सपर्ट्स यहां आए हुए हैं।

डॉ. एमबी अग्रवाल (हेमेटोलॉजिस्ट, मुंबई)
पहले कैंसर का इलाज सर्जरी, किमियो थैरेपी और रेडिएशन के जरिए होता था। अब नई टेक्नोलॉजी में इलाज का तरीका बदल गया है। अब टारगेट थैरेपी, इम्यूनो थैरेपी, जीन थैरेपी, ट्रांसप्लांट्स, Car T सेल थैरेपी आदि के माध्यम से होता है। डॉ. अग्रवाल व डॉ. देसाई ने कैंसर से जुड़ी बीमारियों के बारे में बताया।
ब्लड कैंसर को लेकर अब किस प्रकार का नया ट्रीटमेंट आया है?
– पहले ब्लड कैंसर का ट्रीटमेंट केवल किमियो थैरेपी से होता था। फिर बोन मैरो ट्रांसप्लांट आया। अब इम्यूनो थैरेपी से इलाज होता है। इसमें एक CAR T सेल थैरेपी है। इससे बहुत से कैंसर मरीज ठीक हो सकते हैं। उनकी इम्यूनिटी बढ़ सकती है। किमियो थैरपी से जो साइड इफेक्ट होते थे इस थैरेपी में नहीं होते।
इसका इलाज का खर्चा कितना है?
– चूंकि अभी ट्रीटमेंट व टेक्नोलॉजी नई हैं इसलिए इलाज महंगा है। ऐसा कई क्षेत्रों में होता है। फिर मरीज की स्थिति पर भी निर्भर करता है कि किस स्टेज में है। फिर भी लाखों में इस इलाज का खर्चा आता है।
ब्लड कैंसर के लिए और कौन सी थैरेपी का उपयोग होता है।
– इसमें एंटी एंजियोजैनिक थैरेपी, टारगेटेड थैरेपी आदि से इलाज होता है।
…तो क्या ब्लड कैंसर के पेशेंट्स तेजी से बढ़ रहे हैं।
– ऐसा कहना ठीक नहीं होगा। अभी नई टेक्नीक में ब्लड कैंसर में अब डिटेक्शन काफी बढ़ रहा है। लोग जागरूक हैं इसलिए जल्द पता चल जाता है। वे इन्वेस्टिगेशन कराने लगे हैं।
इन थैरेपी से मरीजों को कितना फायदा होता है?
– इसमें कुछ बीमारियों का ट्रीटमेंट जैसे डायबिटीज का ट्रीटमेंट लगातार चलता है। ऐसे ही पहले ब्लड कैंसर पेशेंट की तीन साल में मौत हो जाती थी। अब नए ट्रीटमेंट वह एक टैबलेट ही लेते रहें तो उसकी उम्र फिर सामान्य हो जाती है। इसी तरह क्रोनिक माय लोड गेविया जिसमें पहले मेडिसिन से इलाज होता था और तीन साल लाइफ होती थी। फिर ट्रांसप्लांट होता था जिसमें आधे पेशेंट की मौत हो जाती थी। फिर टारगेटेड पिल टेक्नीक आई। इसे देने से अगर पेशेंट की उम्र 20 साल है तो 60 वर्ष तक जी सकता है। यह जींस आधारित रहती है और टारगेटेड रहती है।
तो क्या इसमें कई प्रकार की दवाइयां दी जाती है?
– इस थैरेपी में एक टैबलेट में एक ही दवाई होती है। वह शरीर के स्पेसिफिक जीन जिसमें डिफेक्ट पैदा हो गया है, उसे टारगेट करती है। जैसे वह जीन जिससे कैंसर बन रहा था, वह डिफक्शन हो जाती है। इस तरह से उसे कंट्रोल किया जाता है। डायबिटीज में कॉम्प्लीकेशन शुगर के कारण होते हैं, शुगर कंट्रोल करो तो फिर कोई कॉम्प्लीकेशन नहीं होता, उसी तरह इसमें एक जीन को कंट्रोल करो तो कोई कॉम्प्लीकेशन नहीं होगा। पेशेंट की लाइफ एकदम नॉर्मल हो जाएगी।

डॉ. चिराग देसाई (कैंसर एक्सपर्ट, अहमदाबाद)
कैंसर पेशेंट्स की इम्यूनिटी कैसे बढ़ाई जाती है?
– इन्वेस्टिगेशन में यह ढूंढ़ने की कोशिश करते हैं कि कैंसर क्यों हुआ? शरीर के सेल जिसमें खराबी है उसमें ऐसा क्या है? नई दवाइयां उस पर टारगेट करती है। इसके साइड इफेक्ट्स कम होते हैं।
आखिर ये नई दवाइयां कैसे काम करती है?
– ये दवाइयां अपनी बॉडी के इम्यूनिटी को एक्टिवेट करती है। यह ठीक वैसा ही है जैसे आर्मी को बताया जाता है कि ये आतंकवादी हैं इनसे लड़ना है। ऐसे ही ये दवाइयां शरीर में जाने के बाद इम्यून सिस्टम (आर्मी) को एक्टिव करती है। यानी वह कैंसर के सेल्स को डिटेक्ट कर उस पर अटैक करती है। इससे पेशेंट की इम्यूनिटी काफी बढ़ जाती है। इसमें 100 में से 70 से 80 पेशेंट ठीक हो जाते हैं।
क्या कैंसर के गंभीर पेशेंट के लिए भी कारगर है?
– अगर कैंसर की स्टेज आगे बढ़ चुकी है और मान लीजिए कि पेशेंट ढाई साल तक और जीने वाला है तो इस थैरेपी से वह पांच साल तक जी सकता है।
ये थैरेपी कौन से कैंसर के इलाज के लिए फायदेमंद है?
– टारगेटेड थैरेपी फेफडों, किडनी, आंत, यूरिनरी ब्लेडर कैंसर के इलाज के लिए अपनाई जाती है। हार्मोन थैरेपी में प्रोस्टेट, ब्रेस्ट कैंसर में अच्छा फायदा देता है। इम्यूनो थैरेपी खासकर फेफड़ों, आंत, ओवरी, यूटेरस के कैंसर के लिए अच्छी है।





