मुनेश त्यागी
क्या वर्तमान गाजा इसराइल संघर्ष एक मिली भगत का परिणाम है? क्या इसराइल ने हमास के हमले को जान पूछ कर होने दिया या कराया है? कई सारी रिपोर्टों से पता चल रहा है कि इसराइल का इरादा है कि फिलीस्तीन को दुनिया नशे से ही साफ कर दिया जाए। अब इजराइल सेना गाजा पट्टी पर लगातार हमले कर रही है। गाजा पट्टी पर इसराइली हमले में 3000 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। इन मरने वालों में बहुत बड़ी संख्या महिलाओं और बच्चों की है और 9600 से ज्यादा लोग जख्मी हो चुके हैं।
इसराइल ने हमास को हमले का पूरा मौका दिया और हमले से ठीक पहले तमाम सीमा सुरक्षा गार्ड्स को वेस्ट बैंक पर भेज दिया था। क्या कमाल है कि 1946 से पहले इसराइल नाम का कोई देश दुनिया में नहीं था? उसे फिलिस्तीन में पनाह दी गई और आज इसराइल ने फिलीस्तीन के 88% भूमि पर अवैध कब्जा कर लिया है और सितम देखिए कि आज इजरायल फिलीस्तीन को ही दुनिया के नशे से मिटाने पर उतारू हो गया है।
बमबारी में ढाये गए मकानों, रोते हुए बच्चे, औरतों, और मां-बाप को देखकर आदमी डर जाता है। इन डरावने दृश्यों को देखकर दिल बैठ रहा है। पहले हमास ने बर्बरता की और अब इजराइल बर्रबरता की हदें पार कर रहा है। निर्दोष लोगों को, बच्चों को और महिलाओं को सामूहिक दंड देना एकदम अमानवीय, क्रूर और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन है। इजराइल अब सेल्फ डिफेंस के नाम पर अमानवीयता की और बर्बरता की सारी हदें पार कर रहा है। अभी तक लोग इसराइल पर हुए हमास के हमले की निंदा कर रहे थे, पर अब दुनिया के बहुत सारे लोग और देश इजराइल की इन एक तरफा हमलों की निंदा कर रहे हैं।
इसराइल के प्रधानमंत्री नेत्यानाहू पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हुए हैं, लोग उसके खिलाफ हो गए हैं। नित्यानाहू इजरायली अदालतों का गला घोटने पर उतारू है। नेत्यानाहू वहां की न्यायपालिका को अपने मातहत करने के लिए कानून भी बना चुके हैं जिसका वहां की जनता खुलकर विरोध कर रही है। लोग सरकार के इस कदम के बिलकुल खिलाफ हो गए हैं जिससे इजरायली सरकार जन विरोध के कारण घबरा गई है।
कई लोगों का कहना है कि इसराइल ने यह हमला एक सांठगांठ के तहत कराया है ताकि हमले का बहाना बनाकर फिलिस्तीनियों में नरसंहार करके गाजा पट्टी को खाली कराया जा सके। इन दोनों हमलों में दोनों देशों की निर्दोष जनता शिकार हो गई है। यहां पर मुख्य सवाल यह है कि दुनिया का बहुत शक्तिशाली संगठन मोसाद हमास के हमले में कैसे असफल हो गया? यह सब क्यों और कैसे हो गया, इन जरूरी सवालों के जवाब ढूंढे जाने चाहिए।
मीडिया का कहना है कि यह हमला इसराइली राज्य की सबसे बड़ी असफलता है। कुछ लोग इस हमले को इसराइल समर्थित हमला बता रहे हैं। यहां पर कुछ सवाल पूछे जाने चाहिएं जैसे,,,,, हमास 5000 रॉकेट इसराइल पर दागने में कैसे सफल हो गया?,,,चारों ओर की हुई कंटीली घेराबंदी को कैसे तोड़ा गया?,,,, हमास के पास ये हथियार यूक्रेन के रास्ते कैसे आए? ,,,,गाजा पट्टी से सेंसर लगे हुए हैं, ये तमाम सेंसर इसराइल ने लगाए हैं, इन सेंसरों की बदौलत वहां जमीन पर हो रही गतिविधियों का पता चल जाता है तो इस मामले में हमास द्वारा की गई गतिविधियों का पता कैसे नहीं चल पाया? ,,,,,गाजा के चारों ओर कंटीले तार लगाए हुए हैं, इन सबको लांघ कर हमास ने बिना किसी रोक-टोक के हमला कैसे कर दिया? ,,,,क्या यह सब इजरायल की मिली भगत से ही संभव नहीं हो पाया है?
,,,, इस हमले में इजरायली सेना बिल्कुल निष्क्रिय क्यों बनी रही? इन हमलों में इजरायली जनता चींख चींख कर सेना से मदद मांगती रही, मगर 6 घंटे तक चले इस हमले में जनता की कोई मदद नहीं कही गई। ,,,,6 घंटे तक इजरायली सेना कहां छुपी रही और ,,,,,,जब हमास सीमा का अतिक्रमण करके इजराइल में घुस रहा था तब सेना क्या करती रही? उसे क्यों नहीं रोका गया?
यहीं पर यह भी महत्वपूर्ण है कि यासर अराफात के फतेह आंदोलन को कमजोर करने के लिए 1987 में हमास नाम का संगठन बनाया गया था। यही हमास शुरू से ही फिलीस्तीन मुक्ति संगठन का विरोध कर रहा था। हमास की कामयाबी के लिए बाहरी ताकतों द्वारा पैसा और हथियार दिए गए और हमास को सेना तैयार करने के लिए इसराइल और सीआईए ने मदद की थी। इसी हमास ने पी एल ओ को कमजोर करने में इजरायल की मदद की थी।
नेत्यानाहू ने मार्च 2019 में अपनी पार्टी लिकुड के सामने यह कहा था कि गाजा और वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनियों को अलग-थलग करना हमारी नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उसने यह भी कहा था कि जो फिलिस्तीन राज्य को बनने से रोकना चाहते हैं उन्हें हमास की खुलकर मदद करनी होगी और हमास को पैसा मोहिया करना होगा।
उपरोक्त तथ्यों की रोशनी में यह सच लगता है कि हमास को इसराइल ने पाला पोसा है और यह युद्ध हमास और इजरायल की सांठगांठ और बड़ी साजिश का हिस्सा है ताकि फिलिस्तीनियों को गाजा पट्टी से हटाकर फिलिस्तीन के धर्मनिरपेक्ष राज्य को दुनिया के नशे से ही गायब कर दिया जाए। जब तक इन अहम सवालों का माकूल जवाब नहीं दिया जाता है तब तक यही कहने को मजबूर होना पड़ेगा कि फिलीस्तीनी जनता एक बहुत बड़ी साजिश का शिकार होकर रह गई है।





