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ताजा समाचार -नौसेना के युद्धपोत सूरत के प्रतीक चिह्न का अनावरण आज,क्या टूटेगा कांग्रेस और MNF का ‘तिलिस्म’

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नौसेना के युद्धपोत सूरत के प्रतीक चिह्न का अनावरण आज

आईएनएस सूरत प्रोजेक्ट 15बी का चौथा युद्धपोत और प्रोजेक्ट 15ए यानि कोलकता-क्लास डेस्ट्रोयर युद्धपोत के मुकाबले एक बड़ा मेकओवर है। युद्धपोत सूरत को ब्लॉक निर्माण पद्धति का उपयोग करके बनाया गया है। भारतीय नौसेना के नवीनतम युद्धपोत ‘सूरत’ के प्रतीक चिह्न का अनावरण सोमवार को गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल, नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में करेंगे। स्वदेशी और गाइडेड विध्वंसक मिसाइलों से लैस इस युद्धपोत के निर्माण का शुभारंभ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पिछले साल मार्च में किया था।

फ्रंटलाइन युद्धपोत ‘सूरत’ (प्रोजेक्ट 15बी डिस्ट्रॉयर) अगली पीढ़ी के स्टील्थ गाइडेड मिसाइल विध्वंसक हैं।  आईएनएस सूरत प्रोजेक्ट 15बी का चौथा युद्धपोत और प्रोजेक्ट 15ए यानि कोलकता-क्लास डेस्ट्रोयर युद्धपोत के मुकाबले एक बड़ा मेकओवर है। युद्धपोत सूरत को ब्लॉक निर्माण पद्धति का उपयोग करके बनाया गया है और इसका नाम गुजरात की वाणिज्यिक-राजधानी सूरत के नाम पर रखा गया है। सूरत को मुंबई के बाद पश्चिमी भारत का दूसरा सबसे बड़ा कॉमर्शियिल-हब माना जाता है।

मिजोरम: क्या टूटेगा कांग्रेस और MNF का ‘तिलिस्म’; राष्ट्रीय पार्टियों के धुआंधार प्रचार से चर्चा में आया राज्य

spell of Congress and MNF will be broken in Mizoram Assembly elections

1972 में मिजो यूनियन के चुंगा पहले मुख्यमंत्री थे। वर्तमान में एमएनएफ के मुख्यमंत्री ज़ोरमथांगा ने 2018 में शपथ ली थी। कांग्रेस के ललथनहवला 5 कार्यकालों में 21 वर्षों से ज्यादा सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे हैं। मिज़ोरम दो वर्षों के अल्प समय के लिए राष्ट्रपति शासन के अधीन रहा है। दो बार एमपीसी के थेनफुंगा सेलो ने राज्य का नेतृत्व किया। 

मिजोरम विधानसभा का चुनाव पहली बार इतनी चर्चा में है। इससे पहले कभी भी पूर्वोत्तर का यह छोटा सा राज्य चुनाव के दौरान इतनी चर्चा में नहीं रहा है। इसका कारण है, शायद पहली बार राष्ट्रीय दलों ने यहां पर धुआंधार प्रचार किया है। भाजपा की ओर से केंद्रीय मंत्री पहुंचे तो कांग्रेस अध्यक्ष खुद इस बार चुनाव प्रचार करने यहां आए। इसके साथ ही पहली बार आप ने भी अपने प्रत्याशी यहां उतारे हैं। लेकिन इन सबके बीच, इस बार मिजोरम में ही सबसे ज्यादा चर्चा है इस बात की है कि क्या इस बार कांग्रेस या सत्तारूढ़ मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) का तिलिस्म टूटेगा। क्या इस बार जोरमथांगा या ललथनहवला के अलावा तीसरा कोई अन्य मुख्यमंत्री पद का दावेदार होगा। क्या इस बार मिजोरम में कोई नया समीकरण बनने जा रहा है। इसका जवाब तो तीन दिसंबर के बाद ही मिलेगा, लेकिन इसके पीछे कई कारण हैं। 1984 से अगर देखें तो मिजोरम में कभी कांग्रेस तो कभी एमएनएफ की सरकारें रहीं। इस बार सवाल है कि क्या एमएनएफ सत्ता बरकरार रख पाएगी या फिर कांग्रेस वापसी करेगी या फिर कोई तीसरा होगा सत्ता का दावेदार।

उल्लेखनीय है कि 1972 में मिजो यूनियन के चुंगा पहले मुख्यमंत्री थे। वर्तमान में एमएनएफ के मुख्यमंत्री ज़ोरमथांगा ने 2018 में शपथ ली थी। कांग्रेस के ललथनहवला 5 कार्यकालों में 21 वर्षों से ज्यादा सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे हैं। मिज़ोरम दो वर्षों के अल्प समय के लिए राष्ट्रपति शासन के अधीन रहा है। दो बार एमपीसी के थेनफुंगा सेलो ने राज्य का नेतृत्व किया।

पहले असम का एक जिला था मिजोरम
1972 से पहले मिजोरम असम का एक जिला था, जिसे मिजो जिला कहा जाता है। 1972 में इसे केंद्र शासित राज्य बनाया गया। 1986 में मिजो भारत सरकार और मिजो नेशनल फ्रंट के बीच पीस ऑकोर्ड के तहत 1987 में यह पूर्ण राज्य बना।

कांग्रेस के ललथनहवला सबसे अधिक समय तक रहे मुख्यमंत्री
राज्य में सबसे अधिक समय तक कांग्रेस ने राज किया। उसके ललथनहवला के पास मिजोरम के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड है। वे पांच बार 1984 से 1986, 1989 से 1993, 1993 से 1998, 2008 से 2013 और 2013 से 2018 तक मुख्यमंत्री रहे। उन्होंने 1973 से 2021 तक मिजोरम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। उनके चुनावी निर्वाचन क्षेत्र सेरछिप और ह्रांगतुर्जो थे जहां से 1978 के बाद वे नौ बार सफलतापूर्वक जीते। 2018 में कांग्रेस बुरी तरह से हार गई। इस बार भी कांग्रेस की राह बहुत आसान नहीं दिखाई दे रही है।

लालडेंगा के बाद जोरमथांगा ने संभाला मोर्चा
1986 में पहली बार मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) के लालडेंगा मुख्यमंत्री बने। इसके बाद एमएनएफ के जोरमथांगा 1998 से 2008 तक प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। इसके बाद 2018 में एक बार फिर एमएनएफ ने वापसी की और अब तक जोरमथांगा प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। इस बार प्रदेश में चुनाव का माहौल काफी बदला हुआ है।

टक्कर एमएनएफ और जेडपीएम के बीच
राजनीतिक जानकार पूर्ण कहते हैं, इस बार टक्कर एमएनएफ और जेडपीएम के बीच है। जेडपीएम नई पार्टी है और उसके वादे युवाओं को पसंद आ रहे हैं। लेकिन गांवों में एमएनएफ का बर्चस्व है। भाजपा ने पहली बार मिजोरम पर फोकस किया है, जिसका असर थोड़ा देखने को मिल सकता है।

पुणे आईएस आतंकी मॉड्यूल: देशभर में आतंक फैलाने की थी साजिश, सात आंतकियों के खिलाफ आरोप-पत्र दाखिल

Pune IS terrorist module conspiracy to spread terror across country chargesheet filed against seven terrorists

केंद्रीय एजेंसी ने कहा कि आरोपियों में से दो मोहम्मद इमरान-मोहम्मद यूसुफ खान उर्फ मटका उर्फ आमिर अब्दुल हमीद खान और मोहम्मद यूनुस-मोहम्मद याकूब साकी उर्फ आदिल उर्फ आदिल सलीम खान मध्य प्रदेश के रतलाम के निवासी हैं।राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने देश के विभिन्न हिस्सों में आतंकी हमलों को अंजाम देने की साजिश में शामिल आईएस के सात आंतकियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है। आरोपपत्र के अनुसार आरोपी इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (आईएसआईएस) के लिए आतंक और हिंसा से संबंधित गतिविधियों को आगे बढ़ाने के इरादे से धन इकट्ठा कर रहे थे।

आरोपियों ने आतंकवादी प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए। ज्ञात और वांछित आतंकवादियों को शरण दी। केंद्रीय एजेंसी ने कहा कि आरोपियों में से दो मोहम्मद इमरान-मोहम्मद यूसुफ खान उर्फ मटका उर्फ आमिर अब्दुल हमीद खान और मोहम्मद यूनुस-मोहम्मद याकूब साकी उर्फ आदिल उर्फ आदिल सलीम खान मध्य प्रदेश के रतलाम के निवासी हैं। कदीर दस्तगीर पठान उर्फ अब्दुल कदीर और सीमाब नसीरुद्दीन काजी महाराष्ट्र के कोंडवा से हैं और जुल्फिकार अली बड़ौदावाला उर्फ लालाभाई उर्फ सैफ, शमिल साकिब नाचन और आकिफ अतीक नाचन ठाणे के पडघा से हैं।

जेल से भागने वाला पूर्व जुटां नेता मौसा दादिस कैमारा फिर से गिरफ्तार, रक्षा मंत्रालय ने की पुष्टी

Guinea Moussa Dadis Camara, who escaped from prison arrested, Defense Ministry confirms world updates

रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की है कि कैमारा के साथ भागे तीन उच्च पदस्थ अधिकारियों में से दो मौसा टाईगबोरो कैमारा और ब्लेज गोमौ को भी पुनः पकड़ लिया गया है। हालांकि, तीसरा अधिकारी, कर्नल क्लाउड पिवी, अभी भी फरार है।गिनी के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि 2008 सैन्य जुंटा के पूर्व प्रमुख मौसा दादिस कैमारा को शनिवार को जेल से भागने के बाद फिर से पकड़ लिया गया है। केमरा का जेल से भागना तब हुआ जब भारी हथियारों से लैस लोगों ने शनिवार तड़के कोनाक्री में सेंट्रल हाउस जेल पर हमला किया और उन्हें और तीन अन्य उच्च पदस्थ अधिकारियों को मुक्त करा लिया। 

रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि करते हुए बताया कि कैमारा के साथ भागे तीन उच्च पदस्थ अधिकारियों में से दो मौसा टाईगबोरो कैमारा और ब्लेज गोमौ को भी पुनः पकड़ लिया गया है। हालांकि, तीसरा अधिकारी, कर्नल क्लाउड पिवी, अभी भी फरार है।

पुनः पकड़े गए लोगों को गिनी की राजधानी की संघीय जेल, मैसन सेंट्रेल डी कोनाक्री में वापस भेज दिया गया है, और बताया गया है कि वे “सुरक्षित और स्वस्थ” हैं। रक्षा मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया कि बचे एक भगोड़े का पता लगाने के लिए सभी आवश्यक सुरक्षा उपाय किए गए हैं और नागरिकों से बिना किसी चिंता के अपनी दैनिक गतिविधियों को जारी रखने का आग्रह किया गया है। 

सैन्य बलों ने लगाई विशेष गश्त
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कलौम प्रशासनिक जिले, जहां कैमारा और अन्य को शनिवार को रखा गया था, वहां गोलियों की आवाज सुनने के बाद निवासियों ने कोनाक्री में एक महत्वपूर्ण सैन्य उपस्थिति और कड़ी सुरक्षा की सूचना दी। सैन्य वाहनों और विशेष बलों ने सड़कों पर गश्त लगाई। 

28 सितंबर, 2009 को लोकतंत्र समर्थक रैली के दौरान गिनी के सुरक्षा बलों द्वारा कथित तौर पर किए गए स्टेडियम नरसंहार और सामूहिक बलात्कार से संबंधित आरोपों का सामना करते हुए कैमारा और अन्य पर पिछले साल से मुकदमा चल रहा है, जिसमें 150 लोग मारे गए थे। 

केमरा ने गलती करने वाले सैनिकों पर अत्याचार का आरोप लगाते हुए जिम्मेदारी से इनकार कर दिया है। 2021 के तख्तापलट के बाद से सैन्य नेता मामाडी डौंबौया के नेतृत्व में गिनी ने पिछले तीन वर्षों में पश्चिम और मध्य अफ्रीका में तख्तापलट की एक श्रृंखला के बीच राजनीतिक अस्थिरता का अनुभव किया है, जिससे माली, नाइजर, बुर्किना फासो, चाड और गैबॉन जैसे देश प्रभावित हुए हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, भागने वालों को देश छोड़ने से रोकने के लिए देश की सीमाएं बंद कर दी गई हैं।

कार्यक्रम में रेडियो एंकर की गोली मारकर हत्या
दक्षिणी फिलीपीन स्थित एक रेडियो केंद्र में रविवार को एक हमलावर ने डीजे जॉनी वॉकर के नाम से मशहूर एंकर जुआन जुमालोन की गोली मारकर हत्या कर दी। जिस समय जुमालोन की हत्या हुई, वह कार्यक्रम प्रस्तुत कर रहे थे और फेसबुक पर बड़ी संख्या में लोग उन्हें लाइव देख रहे थे।

जुमालोन मिसामिस ऑक्सिडेंटल प्रांत के कैलांबा शहर स्थित अपने घर में रेडियो केंद्र चलाते थे। हमलावर खुद को उनका श्रोता बताते हुए रेडियो केंद्र में प्रवेश कर गया। उसने जुमालोन को गोलियां मारी और उनके गले से सोने की चेन खींचकर फरार हो गया।

नर्स ने ली 17 मरीजों की जान

अमेरिका के पेंसिलवेनिया में एक नर्स ने 17 मरीजों की जान ले ली। वह मरीजों को डायबिटीज न होने पर भी लगातार इंसुलिन के इंजेक्शन लगाती रही। नतीजा ये हुआ कि इन मरीजों की मौत हो गई। 19 से अधिक मरीजों को इंसुलिन देने वाली 41 वर्षीय हीदर प्रेसडी साल 2020 से ऐसा कर रही थी। मई 2023 में प्रेसडी ने 19 लोगों को इंसुलिन की अधिक खुराक दिए जाने की बात कबूली।

अगले चुनाव से पहले उप प्रधानमंत्री को सत्ता सौंप देंगे पीएम

सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली सीन लूंग ने रविवार को कहा कि वह आगामी चुनाव से पहले सत्ता की चाभी उपप्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग को सौंप देंगे। आम चुनाव नवंबर 2025 में होने की संभावना है। वार्षिक समारोह में सत्तारूढ़ पीपुल्स एक्शन पार्टी (पीएपी) की परिवर्तन योजना के बारे में चर्चा के दौरान ली (71) ने कहा, सबकुछ ठीक रहा तो वह आगामी वर्ष 21 नवंबर को पार्टी के स्थापना दिवस पर सत्ता छोड़ देंगे।

मेक्सिको में चोरी के ईंधन को लेकर विवाद में 5 की हत्या

मेक्सिको के बाहरी इलाके में स्थित प्यूब्ला शहर में चोरी के इंधन को लेकर हुए विवाद में मोटरसाइकिल सवार बंदूकधारियों ने शनिवार को पांच लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी। प्यूब्ला पुलिस ने कहा, ऐसा प्रतीत होता है कि हमले के समय पांचों लोग दो गैस टैंकरों की सुरक्षा कर रहे थे।

हमला संभवतः ईंधन चोरी से जुड़ा था। मारे गए लोगों में से दो को गैस टैंकर के विस्फोट में कथित संलिप्तता के लिए अक्तूबर में गिरफ्तार किया गया था। हालांकि, उस घटना में उनकी संलिप्तता से जुड़ी कोई विशेष जानकारी हासिल नहीं हो पाई थी।

ब्रेस्ट कैंसर से बचाव के लिए आई नई एंटीबॉडी, एंजाइम को रोकेगी

वैज्ञानिकों ने एक ऐसी एंटीबॉडी की पहचान की है, जो ब्रेस्ट कैंसर को बढ़ाने वाले एंजाइम (एक विशेष प्रकार का प्रोटीन) को रोकने में कारगर साबित हो सकता है। नई एंटीबॉडी मुख्य रूप से पीटीपीआरडी अणुओं के प्रोटीन टायरोसिन फॉस्फेट (पीटीपी) को निशाना बनाती है। अमेरिका में कोल्ड स्प्रिंग हार्बर प्रयोगशाला के शोधकर्ताओं द्वारा विकसित एंटीबॉडी स्तन कैंसर के लिए एक प्रभावी दवा के रूप में कारगर साबित हो सकती है।

दिमाग खाने वाले अमीबा से अब तक 11 की मौत
पाकिस्तान की आर्थिक राजधानी कराची में दिमाग खाने वाले अमीबा नेगलेरिया फाउलेरी ने एक और जान ले ली है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, पूरे प्रांत में नेगलेरिया फाउलेरी संक्रमण (एनएफआई) के कारण अब तक 11 लोगों की जान जा चुकी है। सिंध स्वास्थ्य विभाग के प्रवक्ता ने कहा, वह व्यक्ति पिछले तीन दिनों से बुखार और सिरदर्द से पीड़ित था।

30 दिन में तैयार की जा सकेगी मशरूम वेस्ट से ऑर्गेनिक खाद, सफल रहा शोध

Organic fertilizer will be prepared from mushroom waste in thirty days

भारत में प्रतिवर्ष करीब पांच लाख मीट्रिक टन मशरूम वेस्ट निकलता है। इसमें 1.9 फीसदी नाइट्रोजन, 0.4 फाॅसफोरस और 2.4 फीसदी पोटैशियम होता है, जो भूमि में पोषक तत्वों की कमी को दूर करके उसकी उपजाऊ क्षमता को कई गुणा बढ़ाता है।मशरूम अपशिष्ट (वेस्ट) से अब नुकसान नहीं, बल्कि कृषि और बागवानी कार्य में लाभ मिलेगा। मशरूम फसल पूरी होने के बाद खुले में फेंके जाने वाले वेस्ट से अब किसान-बागवान ऑर्गेनिक खाद तैयार कर सकते हैं। इसमें खुंब अनुसंधान निदेशालय (डीएमआर) की ओर से किए जा रहा शोध भी सफल रहा है। इसमें 30 दिन में वेस्ट से ऑर्गेनिक खाद तैयार होगी। डीएमआर के विशेषज्ञों की मानें तो मशरूम के वेस्ट में नाइट्रोजन, फासफोरस व पोटाशियम की प्रचुर मात्रा होती है।

ये मिट्टी को उपजाऊ बनाती है। इसका प्रयोग किसान व बागवान मशरूम अवशिष्टों को री-साइकिल करने के बाद कर सकते हैं। इसके अलावा केंचुआ खाद बनाने में भी इसका प्रयोग किया जा सकता है। इसके लिए मशरूम के वेस्ट को साफ-सुथरी जगह पर गड्ढा खोदकर उसमें 8 से 16 माह तक अच्छी तरह सड़ने के बाद तैयार खाद का ही प्रयोग किया जा सकता है। जबकि खुंब निदेशालय ने अपने प्रारंभिक शोध में तीस दिन में ऑर्गेनिक खाद तैयार कर ने का दावा किया है।

कच्चे अपशिष्ट से भूमि को नुकसान
जागरूकता के अभाव में कई बार किसान व बागवान मशरूम के कच्चे अपशिष्ट ही खेतों में डाल देते हैैं। इससे जमीन को नुकसान भी होता है। मशरूम वेस्ट को खुले में छोड़ने से जहां कई प्रकार की पर्यावरण समस्याएं पैदा होती हैं, वहीं इससे भूजल भी दूषित होता है। इससे कई हानिकारक साल्ट भूमि के नीचे पानी में मिल जाते हैं।

प्रतिवर्ष निकलता है पांच लाख मीट्रिक टन वेस्ट
भारत में प्रतिवर्ष करीब पांच लाख मीट्रिक टन मशरूम वेस्ट निकलता है। इसमें 1.9 फीसदी नाइट्रोजन, 0.4 फाॅसफोरस और 2.4 फीसदी पोटैशियम होता है, जो भूमि में पोषक तत्वों की कमी को दूर करके उसकी उपजाऊ क्षमता को कई गुणा बढ़ाता है। इसमें मशरूम वेस्ट को पांच फीसदी के हिसाब से खेतों में डालने से भूमि की पोटाशियम व फाॅसफोरस की कमी दूर होगी। इसके अलावा यदि इसे 25 फीसदी के हिसाब से खेतों में मिलाया जाए तो यह नाइट्रोजन की कमी को भी दूर करेगा।

प्रथम चरण का सफल रहा शोध
खुंब निदेशालय सोलन के निदेशक डॉ. वीपी शर्मा ने बताया कि मशरूम वेस्ट का उपयोग, कृषि, बागबानी व भूमि सुधार के लिए किया जा सकता है। निदेशालय ने वेस्ट से तीस दिन में खाद तैयार करने का प्रारंभिक शोध सफल रहा है। इस पर अभी और कार्य किया जा रहा है। इसे और बेहतरीन बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इसमें पानी सोखने की अधिक क्षमता होती है, जिससे खेतों में लंबे समय तक नमी रहती है। इससे किसानों को लाभ मिलेगा।

  मेरठ के इंजीनियर ने बनाए ठगी के सॉफ्टवेयर, विदेश में लिया प्रशिक्ष

cryptocurrency fraud in Himachal Pradesh Meerut Engineer make software gets training in Foreign

डीजीपी संजय कुंडू ने बताया कि आरोपियों ने प्रोफेशनल तरीके से ठगी को अंजाम दिया है। आरोपियों को बख्शा नहीं जाएगा। 

क्रिप्टोकरेंसी मामले में आरोपियों ने प्रोफेशनल तरीके से ठगी को अंजाम दिया। आरोपियों से पूछताछ में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। मेरठ के रहने वाले एक आरोपी ने ठगी के लिए साॅफ्टवेयर तैयार किए। यह आरोपी प्रशिक्षण लेने के सिलसिले में कई बार दुबई गया है। इसे इंजीनियर बताया जा रहा है। लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए आरोपी ने विदेश में डिजिटल करेंसी का पूरा खेल समझा।

भारत लौटकर एक साॅफ्टवेयर तैयार किया। उसके बाद शातिर आरोपियों ने फर्जी वेबसाइट तैयार की, जिसमें निवेशकों को उनकी आईडी खोलने पर एक डिजिटल करेंसी में दिन-प्रतिदिन बढ़ोतरी दिखती थी। वास्तव में ऐसा नहीं था। दोगुना रिटर्न के लालच में लोगों के समक्ष डिजिटल करेंसी का ऐसा जाल बुना गया कि लोग इनके झांसे में आते गए। लोगों ने पैसा डबल करने के चक्कर में निवेश करना शुरू कर दिया।

पुलिस एसआईटी इस मामले में सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच कर रही है। आरोपियों से पूछताछ के चलते एसआईटी जांच को आगे बढ़ा रही है। पुलिस एसआईटी का मानना है कि शातिर आरोपियों ने 4 से 5 सॉफ्टवेयर तैयार किए। इसके अलावा कई फर्जी वेबसाइट भी बनाई है। इससे संबंधित रिकॉर्ड जांच टीम पहले ही जुटा चुकी है। 

मामले में और गिरफ्तारियां तय 
क्रिप्टोकरेंसी ठगी मामले में कई और आरोपियों की गिरफ्तारियां तय हैं। डीजीपी संजय कुंडू ने बताया कि आरोपियों ने प्रोफेशनल तरीके से ठगी को अंजाम दिया है। आरोपियों को बख्शा नहीं जाएगा। लोगों को ठगने वालों की गिरफ्तारियां जारी हैं।

केंद्र के कड़े निर्देश, दस दिन में जारी करें पंचायतों को बजट, वरना ब्याज दें

Centre Government strict directions to Himachal Government for Panchayats Budget

भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग के उपनिदेशक महेश कुमार ने इस संबंध में हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के सचिव वित्त और सचिव पंचायती राज को निर्देश जारी किए हैं। केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश सरकार को कड़े निर्देश जारी किए हैं कि दस दिनों के भीतर पंचायतों को बजट जारी करें। अगर ऐसा नहीं किया तो ब्याज दिया जाए। केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने पंचायती राज मंत्रालय की संस्तुति के बाद खुद देरी से राज्य सरकार को यह ग्रांट जारी की है। यानी सात महीने बाद यह ग्रांट जारी की जा रही है। पंद्रहवें वित्तायोग की सिफारिशों के तहत इस बजट को जारी कर यह सख्त फरमान जारी किया है।

स्पेशल इंटरव्यू: मंत्री रेखा आर्य बोलीं- उत्तराखंड कहलाएगा खेल भूमि, खिलाड़ियों के आरक्षण के लिए लाएंगे एक्ट

Amar Ujala Punch Ka Punch Uttarakhand cabinet Minister Rekha Arya Special Interview

पांच का पंच: अमर उजाला के देहरादून कार्यालय पहुंची रेखा आर्य से विजय लक्ष्मी भट्ट, दीपा शर्मा, पूर्णिमा उपाध्याय, अलका त्यागी और रेनू सकलानी ने सवाल किए। यहां पेश हैं उनसे बातचीत के पांच प्रमुख सवालों के जवाब। 

खा आर्य धामी मंत्रिमंडल में युवा कैबिनेट मंत्री हैं। उनके पास महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग, खेल, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग का जिम्मा है। अपने सभी विभागों की उन्हें अच्छी जानकारी है। यही वजह है कि विभाग की किसी योजना के बारे में पूछने पर वह बेबाकी से जवाब देती हैं।

वह कहती हैं कि उत्कृष्ट खिलाड़ियों को आउट आफ टर्न नियुक्ति के बाद अब खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी में चार प्रतिशत आरक्षण के लिए एक्ट बनाने जा रहे हैं। प्रयास किया जा रहा है कि अगले साल 38वें राष्ट्रीय खेलों से पहले इसे लागू करेंगे। इससे हमारे प्रदेश में एक नए खेल युग की शुरुआत होगी और देवभूमि उत्तराखंड खेल भूमि भी कहलाएगा। 

महिला मंत्री होने के नाते वह महिलाओं की समस्याओं से भी भली भांति वाकिफ हैं। महिलाओं को खासकर एकल और निराश्रित महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा सके इसके लिए कुछ नई योजनाओं पर काम कर रही हैं।

सवाल: पहाड़ की बेघर महिलाओं के लिए छत उपलब्ध कराने की क्या योजना है, इस तरह की कितनी महिलाएं हैं, इस पर क्या कोई सर्वे हुआ है।
जवाब: देखिए महिला कल्याण के क्षेत्र में हमारी कोशिश होती है कि उनके हित में बेहतर योजना समर्पित कर पाएं, क्षेत्र भ्रमण में देखने में आया है कि महिलाएं आवास के लिए आवेदन करती हैं। विचार आया उनके मकान के लिए कुछ किया जाए। सरकार ने महिला कल्याण कोष का गठन किया है। इसमें उपकर के रूप में प्रति बोतल एक रुपया मिल रहा है। ऐसी महिलाएं जो आपदा प्रभावित हैं, एकल हैं। उनके लिए घर मुहैया कराए जाने की योजना है। 15 नवंबर तक इसके लिए प्रस्ताव मांगा है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से इन्हें चिन्हित किया जा रहा है। उम्मीद है नए साल की शुरूआत में उन्हें यह योजना समर्पित की जाएगी।

सवाल: प्रदेश की एकल, विधवा, निराश्रित महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्हें स्वरोजगार से जोड़ने की योजना थी। कहा गया था कि इसके लिए 75 प्रतिशत अनुदान पर दो लाख रुपये तक का ऋण दिया जाएगा। कब तक कितनी महिलाओं को इसका लाभ मिलेगा। वित्त विभाग तो योजना के पक्ष में नहीं है।
जवाब: हर वर्ग की महिला को मजबूत करने के लिए प्रयासरत हैं। खासकर एकल वर्ग की महिलाएं चाहें वह अविवाहित, परित्यक्ता या तलाकशुदा हो। इनके लिए एकल महिला स्वरोजगार योजना का प्रस्ताव तैयार किया गया है। वित्त विभाग से इस संबंध में राय ली गई थी, विभाग ने इस योजना को महिला कल्याण कोष से कराने का सुझाव दिया है। अब फिर से वित्त विभाग से राय लेकर इस प्रस्ताव को कैबिनेट में रखा जाएगा। उसके बाद इस पर निर्णय लिया जाएगा। इस योजना के तहत स्वरोजगार के लिए एकल महिलाओं को 75 प्रतिशत अनुदान देना है, जिसकी आय 72000 रुपये सालाना है और आयु 22 से 45 वर्ष है, उन्हें चिह्नित किया जाएगा। इस डाटा को एकत्र करने का लक्ष्य आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को दिया है। अभी समाज कल्याण विभाग के आंकड़े देखें तो एकल महिलाओं की संख्या चार लाख है, जिन्हें पेंशन दी जा रही है। योजना के तहत पहले चरण में विभाग की ओर से प्रतिवर्ष 500 महिलाओं को स्वरोजगार दिया जाएगा। इस संबंध में बैंक से बात हो गई है और आगामी वर्ष तक इस योजना को शुरू करने का लक्ष्य है। चाहे 80 प्रतिशत सब्सिडी देनी पड़े। अगर इस योजना को महिला कल्याण कोष के सहयोग से पूरा करना पड़े तो करेंगे।

सवाल: उत्तराखंड अगले साल 38वें राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी करने जा रहा है, इसे लेकर विभाग की किस तरह की तैयारी है? क्या गोवा राष्ट्रीय खेलों में पदक विजेता खिलाड़ियों को आउट ऑफ टर्न नियुक्ति मिलेगी?
जवाब: राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी के लिए विभाग की पूरी तैयारी है। राजधानी देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश सहित सात जगहों पर राष्ट्रीय खेल होंगे। इसके लिए मैदान तैयार हैं। सभी जगहों पर अवस्थापना सुविधाओं के विकास को लेकर 90 से 95 फीसदी काम हो चुका हैं। कुछ जरूरी उपकरण उसी समय खरीदें जाएंगे। हमारी पूरी कोशिश है कि प्रदेश में होने वाले खेल गुजरात और गोवा में हुए खेलों के समकक्ष या उससे बेहतर होंगे। प्रदेश में आउट ऑफ टर्न नियुक्ति सभी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता खिलाड़ियों के लिए है। छह सरकारी विभागों में खिलाड़ियों को नौकरी मिलेगी। जल्द ही विभाग नियुक्ति की विज्ञप्ति जारी करने जा रहा है। राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता सभी खिलाड़ी उसमें योग्यता के अनुसार आवेदन कर सकते हैं।

सवाल- सरकार ने कोविड में अनाथ हुए बच्चों के लिए सीएम वात्सल्य योजना शुरू की है। इन बच्चों को हर महीने तीन हजार रुपये एवं अन्य सुविधाएं दी जा रही हैं, लेकिन हर साल सड़क हादसों एवं आपदाओं में अनाथ बच्चों के लिए भी क्या कोई योजना है ?
जवाब- सड़क दुर्घटना व आपदाओं में जिनके अभिभावक नहीं रहते हैं। ऐसे बच्चों की मदद सामान्य रूप से हम स्पॉन्सरशिप के माध्यम से करते हैं। इसमें भी उन्हीं बच्चों को शामिल किया जाता है, जिनकी न्यूनतम आय दो या तीन हजार रुपये होती है। न्यूनतम आय के अनुसार ही बच्चों को चिह्नित किया जाता है। न्यूनतम आय का जो मानक है, वह कम है। ऐसे में विभाग ने विचार किया है कि ऐसे बच्चों की मदद कल्याण कोष से की जाएगी। पहाड़ी जिलों में भूस्खलन, भूकंप आदि आपदाओं से प्रभावित बच्चों को भविष्य में कवर करने की योजना है। मुख्यमंत्री का भी यह संकल्प है।

सवाल : प्रदेश में राशन कार्ड धारकों को दो किलो चीनी और एक किलो नमक 50 प्रतिशत छूट पर देने की योजना थी, जो अब तक शुरू नहीं हो पाई है, जबकि हिमाचल प्रदेश ने इसके लिए एक कॉरपोरेशन बना दिया है। क्या हमारे प्रदेश में ऐसा नहीं हो सकता?
जवाब : खाद्य विभाग लगातार गरीब परिवारों को किसी न किसी रूप में खाद्यान्न वितरित कर रहा है। राज्य सरकार का संकल्प है कि आने वाले समय में ऐसा नमक जिसमें आयोडीन हो और तेल, मसाले, चाय पत्ती आदि का एक पोषण किट उपलब्ध कराया जाए। विभाग से इसका प्रस्ताव मांगा गया है। आने वाले समय में निश्चित रूप से चाहे वह नमक हो या चीनी दोनों चीजें गरीब परिवारों को मुहैया कराई जाएंगी, यह मौलिक जरूरत भी है। जल्द से जल्द इसे शुरू किया जाएगा।

सवाल – पहाड़ से सबसे ज्यादा खिलाड़ी निकलते हैं लेकिन स्टेडियम और एकेडमी नहीं होने से कई प्रतिभाएं दबी रह जाती हैं। आर्थिक रूप से मजबूत बच्चे तो मैदानी भागों में अभ्यास के लिए आ जाते हैं, लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर बच्चे रह जाते हैं। क्या पहाड़ में स्टेडियम या एकेडमी खोलने की सरकार की कोई योजना है?
जवाब – भूमि की उपलब्धता होती है, तो खेल मैदान बनाए जाएंगे। स्टेडियम भी दुरुस्त किए जाएंगे। महिला मंगल और नवयुवक मंगल दल के माध्यम से जिम भी स्थापित किए गए हैं। स्कूल और महाविद्यालयों में जो खेल मैदान हैं, उन्हें विकसित करना मेरा सपना है। इसके लिए विभाग कोशिश भी कर रहा है। बच्चों को स्कूलिंग से ही खेल योजना के तहत संसाधन विकसित कर उपलब्ध कराना है। स्पोर्ट्स डेवलपमेंट फंड बनाया गया है। इसका फायदा आर्थिक रूप से कमजोर उन बच्चों को मिल रहा है। जो तैयारी के लिए दूसरी जगह जाते हैं। सरकार स्पोर्ट्स एकेडमी को भी प्रमोट कर रही है। एकेडमी खोलने पर 75-80 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा। विभाग योजना बना रहा है कि खिलाड़ियों को कोच या एकेडमी के लिए बाहर न जाना पड़े। उन्हें अपने आसपास ही सुविधा मिल सके।

सरकार खिलाड़ियों के साथ खड़ी है
खेल मंत्री ने कहा, राज्य के आठ से 14 और 14 से 23 साल के खिलाड़ियों को चाहे वह बालक हो या बालिका, उन्हें 1500 रुपये एवं 2000 रुपये महीना और 10 हजार रुपये सालाना दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी छात्रवृत्ति योजना के तहत आठ से 14 साल के 7800 खिलाड़ियों एवं सीएम खिलाड़ी उन्नयन योजना के तहत 14 से 23 वर्ष आयु वर्ग के 1408 खिलाड़ियों को लाभान्वित किया जा रहा है। बच्चों के अभिभावक भी बता रहे हैं कि कभी किताबों के लिए पैसा नहीं मिल पाता था, लेकिन अब खेल के लिए पैसा मिल रहा है, जो बड़ी बात है। वर्तमान में खेलों व लड़का- लड़की के प्रति दृष्टिकोण बदला है।

मुख्यमंत्री खेल विकास निधि से मिलेगा खेलों को बढ़ावा
मंत्री रेखा आर्य ने कहा, राज्य में खेलों को बढ़ावा देने एवं खिलाड़ियों को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तैयार करने के लिए मुख्यमंत्री खेल विकास निधि की स्थापना की गई है। जो सरकार का ऐतिहासिक कदम है। इसके माध्यम से राज्य एवं राज्य से बाहर खेलों में प्रतिभाग के लिए जाने वाले खिलाड़ियों को मदद मिलेगी।

पार्टी का जो भी फैसला होगा उसका पालन करूंगी
मंत्री ने अल्मोड़ा संसदीय क्षेत्र से 2024 में लोकसभा चुनाव लड़ने के बारे में पूछे जाने पर कहा, मैं भाजपा कार्यकर्ता हूं, कार्यकर्ता होने के नाते भाजपा प्रदेश, केंद्र एवं शीर्ष नेतृत्व ने जो भी जिम्मेदारी दी है उसका निर्वहन किया है। भविष्य में पार्टी एवं जनहित में जो भी फैसला होगा उसका पालन करुंगी।

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Ramswaroop Mantri

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