- नेता प्रतिपक्ष, उपचुनाव में टिकट जैसे मुद्दों पर रार
- अपने-अपने बेटों की राजनीति चमकाने में लगे कमलनाथ और दिग्गी
नई दिल्ली ।
गुटबाजी और आपसी कलह कांग्रेस (Congress) का स्थायी भाव बनती जा रही है। इसका एक उदाहरण इन दिनों मध्य प्रदेश में दिखाई दे रहा है। राज्य में आपसी कलह के चलते कमलनाथ सरकार चली गई, लेकिन फिर भी कलह थमती नहीं दिख रही। कभी राज्य में दिग्विजय सिंह, कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया कैंप हुआ करते थे, लेकिन सिंधिया के जाने के बाद अब कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के गुटों के बीच आपसी खींचतान इस कदर बढ़ गई है कि इनकी लड़ाई अब सड़क पर आ गई है। कई ऐसे मुद्दे हैं, जिन्हें लेकर दोनों गुटों के बीच रस्साकशी चल रही है। इनमें नेता प्रतिपक्ष चुने जाने से लेकर राज्य की 24 सीटों पर होने वाले उपचुनाव के साथ-साथ राज्यसभा सीटों पर होने वाले चुनाव भी शामिल हैं। इसके अलावा, प्रदेश के दोनों कद्दावर नेताओं के बीच अपने-अपने बेटों का भविष्य सुरक्षित करने को लेकर भी होड़ है।
गुटों में बंटे नेता
प्रदेश में खींचतान का ही असर रहा कि पिछले दिनों प्रदेश के ग्यारह जिलों में अध्यक्षों की नियुक्ति दिल्ली से की गई,जबकि आमतौर पर यह जिम्मा प्रदेश कांग्रेस का रहता है। जहां तक नेता प्रतिपक्ष की बात है तो खेमेबाजी के चलते एक नाम पर सहमति नहीं बन पा रही। जहां दिग्विजय खेमा कमलनाथ सरकार में मंत्री रहे डॉ गोविंद सिंह को नेता प्रतिपक्ष बनवाना चाहता है, वहीं कमलनाथ खेमा उनके नाम का विरोध कर रहा है। प्रदेश के कई बड़े चेहरे फिलहाल कमलनाथ के साथ हैं, जिनमें बाला बच्चन, सज्जन सिंह वर्मा, तरुण भनोत, सुखदेव पांसे जैसे नेता शामिल हैं। ये सभी कमलनाथ सरकार में मंत्री रहे हैं। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुरेश पचौरी व पूर्व स्पीकर नर्मदा प्रसाद प्रजापति भी नाथ के साथ हैं। यह खेमा बाला बच्चन को नेता प्रतिपक्ष बनाना चाहता है। इसके पीछे दलील है कि वे उपनेता प्रतिपक्ष रह चुके हैं। वहीं सज्जन सिंह वर्मा का नाम भी रेस में बताया जा रहा है। दूसरी ओर दिग्विजय सिंह के खेमे में गोविंद सिंह, जयवर्द्धन सिंह, जीतू पटवारी, अजय सिंह, आरिफ अकील, व के पी सिंह जैसे नेता हैं।https://0ae8aa0db1feb2d98e66316c98de0725.safeframe.googlesyndication.com/safeframe/1-0-37/html/container.html
उपचुनाव में प्रत्याशियों का मामला अटका
मजे की बात है कि गुटबाजी के चलते जल्द ही प्रदेश में होने वाले उपचुनावों के लिए प्रत्याशियों के नाम भी नहीं तय हो पा रहे हैं। दोनों ही खेमे के बीच अपने-अपने लोगों को टिकट दिलाने की खींचतान चल रही है। इन्हीं के बीच एक मुद्दा बन रहा है – कांग्रेस छोड़कर बीजेपी गए नेताओं की घरवापसी। इनमें दो नाम काफी चर्चा में हैं- चौधरी राकेश चतुर्वेदी और पूर्व सांसद प्रेमचंद गुड्डू। कमलनाथ खेमा चतुर्वेदी को भिंड की मेहगांव सीट से उतारना चाहता है। लेकिन अजय सिंह सहित दिग्विजय खेमे के कई नेता उन्हें टिकट दिए जाने का विरोध कर रहे हैं। इसी तरह, गुड्डू की पार्टी में वापसी व टिकट देने का विरोध कमलनाथ खेमा कर रहा है।
राज्यसभा चुनाव को लेकर भी भिड़ंत
इसी के साथ खींचतान राज्यसभा सीट को लेकर भी है। यहां से कांग्रेस ने दो उम्मीदवार खड़े किए हैं। इनमें दिग्विजय सिंह के अलावा दलित चेहरा फूल सिंह बरैया हैं। कांग्रेस एक सीट आसानी से जीत जाएगी, जबकि दूसरी सीट के लिए उसे बीजेपी का समर्थन चाहिए होगा। कमलनाथ सरकार के मुश्किलों में घिरने और सरकार गिरने के पीछे दिग्विजय सिंह की भूमिका को लेकर लोग अब खुल कर बोलने लगे हैं। ऐसे में पार्टी में राय बन रही है कि पहली प्राथमिकता पर बरैया को रखा जाए, क्योंकि दिग्विजय अपनी सीट निकाल लेंगे।
दोनों को अपने बेटों की चिंता
सिंधिया के रहते कमलनाथ (Former CM Kamalnath) व दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) एक साथ दिख रहे थे, लेकिन अब अपनी अगली पीढ़ी को लेकर दोनों के बीच प्रतिस्पर्द्धा चल रही है। एक ओर दिग्गी अपने बेटे जयवर्द्धन के लिए प्रदेश कांग्रेस की निष्कंटक सत्ता पाने का सपना संजोए हैं, वहीं कमलनाथ भी अपने बेटे व छिंदवाड़ा से सांसद नकुल नाथ को प्रदेश की राजनीति में आगे बढ़ाना चाहते हैं।





