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मध्यप्रदेश में होने वाली है छात्र संघ चुनाव शुरुआत! कभी मोहन यादव ने किया था छात्रों से यह वादा

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मध्यप्रदेश के नए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की ख्वाहिश थी, जिसे वह बतौर उच्च शिक्षा मंत्री रहते हुए पूरा करना चाहते थे। लेकिन तमाम कोशिशों के बाद भी वह ख्वाहिश पूरी नहीं हो पाई। मध्यप्रदेश की सियासत में कहा यही जा रहा है कि छात्र राजनीति से सियासत की शुरुआत करने वाले सूबे के नए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव छात्रों की राजनीति को फिर से आगे बढ़ाएंगे। दरअसल मोहन यादव ने मध्यप्रदेश में छात्र संघ चुनाव कराने का वादा तो किया था, लेकिन वह उसे मंत्री रहते पूरा नहीं कर सके थे। अब उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद मध्यप्रदेश के अलग-अलग विश्वविद्यालयों के छात्रों की ओर से यह मांग भी होने लगी है कि महाविद्यालयों के छात्र संघ में पड़े ताले एक बार फिर से छात्रों की सियासत के लिए खोल दिए जाएं।इटारसी में एमजीएम कॉलेज के राजनीतिक शास्त्र के पूर्व प्रवक्ता डीपी अग्रहरि कहते हैं कि 2017 से मध्यप्रदेश के कॉलेज में छात्र संघ के चुनाव नहीं हुए हैं। उनका कहना है कि जब राजस्थान में छात्रसंघ के चुनाव की घोषणा हुई, तभी मध्यप्रदेश की छात्र राजनीति में दोबारा चुनाव कराए जाने की अटकलें लगाई जाने लगीं…

मध्यप्रदेश में छात्र राजनीति की हिमायत करने वाले मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने के साथ अब राज्य में छात्र संघ चुनाव कराने के रास्ते साफ होते दिख रहे हैं। इटारसी के गवर्नमेंट एमजीएम कॉलेज के छात्र अनिरुद्ध नेमा कहते हैं कि डॉ. मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने के साथ अब छात्र संघ चुनाव की उम्मीदें जाग रही हैं। अनिरुद्ध कहते हैं कि पिछले साल ही डॉ. मोहन यादव ने बतौर शिक्षा मंत्री रहते हुए उनके ही कॉलेज में आकर छात्र संघ चुनाव कराने की बात की थी। छात्र संघ चुनाव क्यों नहीं हो पाए इसके जो भी कारण रहे हो, लेकिन अब उम्मीद जगी है कि समूचे मध्यप्रदेश में छात्रों की राजनीति एक बार फिर से हो सकेगी।

मध्यप्रदेश में सियासी जानकार भी कहते हैं कि उच्च शिक्षा मंत्री रहे मोहन यादव हमेशा से नई लीडरशिप को आगे बढ़ाने के हिमायती रहे हैं। इटारसी में एमजीएम कॉलेज के राजनीतिक शास्त्र के पूर्व प्रवक्ता डीपी अग्रहरि कहते हैं कि 2017 से मध्यप्रदेश के कॉलेज में छात्र संघ के चुनाव नहीं हुए हैं। उनका कहना है कि जब राजस्थान में छात्रसंघ के चुनाव की घोषणा हुई, तभी मध्यप्रदेश की छात्र राजनीति में दोबारा चुनाव कराए जाने की अटकलें लगाई जाने लगीं। वह कहते हैं कि पिछले साल ही 25 अगस्त को तत्कालीन शिक्षा मंत्री मोहन यादव ने इटारसी के कॉलेज में आकर बयान दिया था कि अगले साल यानी 2023 से छात्र संघ के चुनाव होने शुरू हो जाएंगे। उनका कहना है क्योंकि इस पर अंतिम फैसला मुख्यमंत्री को ही लेना था, इसलिए यह शिवराज चौहान की सरकार में मामला लटक गया।

शासकीय नर्मदा कॉलेज में छात्र राजनीति करने वाले सुजीत यादव कहते हैं कि अब जब खुद पूर्व शिक्षा मंत्री मुख्यमंत्री बन गए तो छात्रों की राजनीति को शुरू होने में देर नहीं लगेगी। राजनीतिक विश्लेषक श्रीनेत्र कुमार कहते हैं कि मोहन यादव ने माधव विज्ञान महाविद्यालय से छात्र राजनीति की शुरुआत की थी। 1982 में वह माधव विज्ञान महाविद्यालय छात्र संघ के सचिव रहे थे। उसके बाद 1984 में इसी महाविद्यालय के छात्र संघ अध्यक्ष भी बने। श्रीनेत्र कहते हैं कि वह कई जगहों पर बतौर उच्च शिक्षा मंत्री रहते हुए छात्र संघ चुनाव कराए जाने की हिमायत करते रहे थे। लेकिन वह अपनी इस वादे को पिछली सरकार में पूरा नहीं कर सके। उम्मीद यही की जा रही है कि मुख्यमंत्री होने के बाद मोहन यादव मध्यप्रदेश में छात्रों की राजनीति को आगे बढ़ाने के प्रयास शुरू करेंगे।

इटारसी के गवर्नमेंट महाविद्यालय के अनिरुद्ध नेमा कहते हैं कि शपथ ग्रहण के बाद डॉ. मोहन यादव को वह छात्रों की ओर से एक रिप्रेजेंटेशन भी देंगे। ताकि आने वाले दिनों में मध्यप्रदेश के महाविद्यालयों में प्राथमिकता के आधार पर छात्र संघ चुनाव कराने की तैयारी की जा सके। उनका कहना है कि छात्र राजनीति ही सियासत की वह पहली सीढ़ी होती है, जहां से भविष्य की राजनीति की शुरुआत होती है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव भी इसी छात्र राजनीति से निकलकर आगे आए हैं। इसलिए इसकी उम्मीद भी की जा रही है। मध्यप्रदेश में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सदस्य देवेंद्र पांचाल कहते हैं कि निश्चित तौर पर शपथ ग्रहण के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुलाकात की जानी है। ताकि उन्हें उन वादों को याद दिलाया जा सके, जो उच्च शिक्षा मंत्री रहते हुए छात्रों से किए थे।

Ramswaroop Mantri

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