संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा है। बुधवार यानी 13 दिसंबर को संसद पर कायराना आतंकवादी हमले की बरसी है। 2001 में 13 दिसंबर की सुबह आतंक का काला साया देश के लोकतंत्र की दहलीज तक आ पहुंचा था। हमले में दिल्ली पुलिस के छह जवान, संसद के दो सुरक्षाकर्मी और एक माली मारे गए थे। उन्हें आज सभी सांसदों की ओर से श्रद्धांजलि दी गई। लोकसभा में कार्यवाही चल ही रही थी, तभी विजिटर गैलरी से एक अज्ञात व्यक्ति बीच सदन में आ धमका। इसको लेकर सदन में जोरदार हंगामा और कार्यवाही को स्थगित कर दिया गया।

लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा, ‘आज ही, हमने संसद हमले के दौरान अपने प्राणों की आहुति देने वाले अपने बहादुरों को पुष्पांजलि अर्पित की और आज ही सदन के अंदर यहां एक हमला हुआ। क्या यह साबित करता है कि हम उच्च स्तर की सुरक्षा बनाए रखने में विफल रहे? सभी सांसदों ने निडर होकर दोनों लोगों को पकड़ लिया, लेकिन मैं जानना चाहता हूं कि जब यह सब हुआ तब सुरक्षा अधिकारी कहां थे?’
लोकसभा की कार्यवाही फिर शुरू हो गई है। सदन में सुरक्षा चूक पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा, ‘शून्यकाल के दौरान हुई घटना की लोकसभा अपने स्तर पर संपूर्ण जांच कर रही है। इस संबंध में दिल्ली पुलिस को भी जरूरी निर्देश दे दिए गए हैं। प्राथमिक जांच के अनुसार यह सिर्फ साधारण धुआं था इसलिए यह धुआं चिंता का विषय नहीं है।’दिल्ली पुलिस की आतंकवाद रोधी इकाई विशेष सेल उन लोगों से पूछताछ करने के लिए संसद पहुंची, जिन्होंने लोकसभा में सुरक्षा उल्लंघन किया था।
‘हमारे साथ कुछ भी हो सकता था’: संसद हमले की 22वीं बरसी पर हुई घटना को लेकर डरे सांसद
लोकसभा में बुधवार को दर्शकदीर्घा से दो लोगों के कूदने की घटना ने सांसदों को डरा दिया। कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम और डिंपल यादव ने इसे लेकर बयान दिया है। दोनों ने कहा कि यह सुरक्षा में बड़ी चूक का मसला है।
सांसदों ने दी प्रतिक्रिया
कांग्रेस सांसद कार्ति चितंबरम ने मीडिया से बात करते हुए लोकसभा में हुए इस घटना का विवरण दिया। उन्होंने कहा, ‘अचानक दर्शक दीर्घा से दो 20 वर्षीय लड़कों ने छलांग लगा दी। दोनों के हाथों में कनस्तर था, जिसमें पीले रंग का पाउडर था। उनमें से एक स्पीकर की तरफ बढ़ रहा था। उनलोगों ने नारेबाजी भी किए। धुंआ हानिकारक भी हो सकता था। यह संसद में सुरक्षा में हुई चूक का गंभीर मामला है। घटना 13 दिसंबर को हुई है. यह वही दिन है जब 2001 में संसद भवन पर हमला किया गया है।’
संसद में सुरक्षा में हुई चूक पर समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने कहा, ‘जो भी संसद में आए, वे या तो दर्शक थे या पत्रकार। उनके पास टैग नहीं था। मुझे लगता है कि सरकार को इसे गंभीरता से लेना चाहिए। मुझे लगता है कि यह पूरी तरह से सुरक्षा में चूक है। लोकसभा के अंदर कुछ भी हो सकता था।’
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने भी मीडिया से बात की। उन्होंने कहा, ‘दो युवाओं ने लोकसभा में छलांग लगा दी। उन्होंने कुछ फेंका जिससे गैस निकलने लगा। सांसदों ने उन्हें पकड़ा, बाद में सुरक्षाकर्मी उन्हें बाहर ले गए। सदन को दो बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। यह एक गंभीर मामला है, क्योंकि आज 2001 में संसद भवन में हुए हमले की बरसी है।’
शिवसेना सांसद अरविंद सावंत ने बताया कि इस घटना में कोई भी घायल नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, ‘जब उनलोगों ने छलांग लगाई तब पीछे की सभी बेंच भरी हुई थी, इसलिए वह पकड़े गए। दो मंत्री सदन के अंदर थे।’
टीएमसी सांसद सुदीप बंधोपाध्याय ने इस घटना को भयानक अनुभव बताया है। उन्होंने कहा, किसी को भी उनके मकसद का अंदाजा नहीं था। वह ऐसा क्यों कर रहे हैं यह भी नहीं मालूम। हम सदन से तुरंत बाहर निकल गए। यह सुरक्षा में चूक है। वह सदन के भीतर धुंआ छोड़ने वाले उपकरण लेकर कैसे आ सकते हैं?




