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ताजा समाचार -मोदी के भारत में किस हाल में हैं चार ‘जातियां’,शरद पवार ने की गौतम अदाणी की तारीफ

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राजधानी दिल्ली समेत पूरे उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड और शीतलहर का प्रकोप जारी है। कई जगहों पर घना कोहरा छाया हुआ है। कुछ जगहों पर शीतलहर को देखते हुए स्कूलों की छुट्टी की गई है। वहीं देशभर के चर्चों और बाजारों में क्रिसमस की धूम है। चर्चों को रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया है। राजधानी दिल्ली एक बार फिर से गैस चेंबर में तब्दील हो चुकी है। कई इलाकों में AQI 450 के पार पहुंच चुका है। अगर पलूशन में सुधार नहीं हुआ, तो दिल्ली-NCR में ग्रैप-4 की पाबंदियां लागू कर दी जाएंगी। इधर दुनियाभर में कोरोना वायरस फिर से पैर पसार रहा है। WHO के अनुसार महीनेभर में दुनिया में 52% कोविड केस बढ़ गए हैं

समाज: अकेलापन महसूस करने में शर्मिंदगी कैसी, मिलने-जुलने से खुलेंगे संबंधों के बंद द्वार

No Shame in Feeling Lonely admit need for social connection and seek out meaningful relationships

सोशल मीडिया पर लाइक कर देना काफी नहीं। लोगों से मिलना-जुलना शुरू करें, संबंधों के बंद द्वार खुद-ब-खुद खुल जाएंगे। 

मनः प्रसादः सौम्यत्वं मौनमात्मविनिग्रहः।

भावसंशुद्धिरित्येतत्तपो मानसमुच्यते।।
अर्थात् मन में संतुष्टि का भाव, सभी प्राणियों के प्रति आदर का भाव, केवल ईश्वरीय चिन्तन का भाव, मन को आत्मा में स्थिर करने का भाव और सभी प्रकार से मन को शुद्ध करना, मन सम्बन्धी तप कहा जाता है।
भीष्म पर्व, गीता 17/16
(अर्जुन के प्रति साक्षात् भगवान श्रीकृष्ण का गीतोपदेश )

छप्पन साल की रेनेट बेलो इस क्रिसमस पर अपने पड़ोसी के कुत्तों की देखभाल करते हुए अकेले ही छुट्टियां बिताएंगी। वह मानती हैं कि जिंदगी में उन्हें संतुलन खोजने की जरूरत है। सर्जन और टुगेदर: द हीलिंग पावर ऑफ ह्यूमन कनेक्शन इन  ए समटाइम्स लोनली वर्ल्ड के लेखक डॉ विवेक एच मूर्ति कहते हैं कि अकेलापन शर्मिंदगी की वजह बन सकता है और इससे आत्मसम्मान की भावना में भी कमी आ सकती है। हालांकि वह यह भी मानते हैं कि अकेलापन एक मौलिक मानवीय अनुभव है। उनके अनुसार जैसे हम भूख व प्यास का अनुभव करते हैं, ठीक वैसे ही सभी कभी-कभी अकेलेपन का भी अनुभव करते हैं। समाज में जो संबंध हम बनाते हैं, वे जब टूटते हैं, तो पूरे शरीर पर असर डालते हैं।

एक सर्वे के मुताबिक आज आधे से ज्यादा अमेरिकी अकेलेपन के शिकार हैं। 400 फ्रैंड्स एंड नो वन टु कॉल के लेखक 69 साल के वाल वॉकर अपना एक सामाजिक नेटवर्क तैयार करने के लिए काफी मेहनत की। लेकिन उन्हें अकेलेपन का एहसास तब हुआ, जब जरूरत होने पर भी उनका साथ देने के लिए कोई भी मौजूद नहीं था। संबंधों से जो आपकी अपेक्षा है, वह अगर पूरी न हो रही हो, तो भी आप अकेलापन महसूस कर सकते हैं।

डॉ मूर्ति के अनुसार संबंधों को बनाए रखने के लिए आपको लगातार कोशिश करते रहनी होती है और ईमानदारी भी बरतनी होती है। आज के युवा मोबाइल की छोटी-सी स्क्रीन पर जिसे कनेक्शन मानते हैं, उसका लोगों से कनेक्ट होने से कोई लेना-देना नहीं होता। महज सोशल मीडिया पर लाइक करने या मैसेज भेज देने भर से आप लोगों से कनेक्ट नहीं हो जाते। इसके बजाय आपको लोगों से मिलने की कोशिश करनी चाहिए। इससे संबंधों के बंद द्वार फिर से खुल सकते हैं।

शिकागो यूनिवर्सिटी के शोध वैज्ञानिक लुइस हॉकले के अनुसार अगर आप किताबी कीड़े हैं, तो आप यह न सोचें लोग आपके दोस्त बनना पसंद करेंगे। साझा मूल्य व साझा हित ही दोस्ती की नींव रखते हैं। रिश्ते बनने में समय लगता है, शुरुआत में ही ज्यादा अपेक्षाएं न रखें। सामाजिक नेटवर्क को व्यापक बनाने का एक तरीका स्वयंसेवा भी है।

ब्रिटेन में दस हजार स्वयंसेवकों पर किए गए एक अध्ययन में करीब दो-तिहाई स्वयंसेवक इस बात पर सहमत थे कि स्वयंसेवा से उन्हें कम अलग-थलग महसूस होता है। ज्यादा से ज्यादा लोगों से बात करने की कोशिश करने से आपको खुलने का मौका मिलेगा। लोगो को तौलते रहने के बजाय, उन्हें समझने की कोशिश आपको ज्यादा लोकप्रिय बनाएगी। डॉ हॉकले के अनुसार, अकेलेपन से ग्रस्त लोगों का खुद पर जितना वह सोचते हैं, उससे ज्यादा नियंत्रण होता है।

 संघर्षों से भरा रहा अनिल से मिस्टर इंडिया बनने का सफर, आज हैं अपार संपत्ति के मालिक

Anil Kapoor Birthday special know the unknown facts about Mr india actor love life and struggle story

‘मिस्टर इंडिया’ के नाम से मशहूर अभिनेता अनिल कपूर आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। अभिनेता अभिनय के लिए ही नहीं बढ़ती उम्र के बावजूद चुस्ती और फुर्ती के लिए जाने जाते हैं। आज अनिल कपूर अपना 67वां जन्मदिन मना रहे हैं। 

‘मिस्टर इंडिया’ के नाम से मशहूर अभिनेता अनिल कपूर आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। अभिनेता अभिनय के लिए ही नहीं बढ़ती उम्र के बावजूद चुस्ती और फुर्ती के लिए जाने जाते हैं। आज अनिल कपूर अपना 67वां जन्मदिन मना रहे हैं। अनिल कपूर का जन्म 24 दिसंबर 1956 को हुआ था। अनिल कपूर ने बॉलीवुड इंडस्ट्री को कई ब्लॉकबस्टर फिल्में दीं, लेकिन यहां तक पहुंचना आसान नहीं था। इस मुकाम को हासिल करने के लिए अनिल ने जिंदगी में कई परेशानियों का सामना किया है। आज उनके जन्मदिन के मौके पर हम आपको उनकी जिंदगी से जुड़े कई अनसुने किस्से बताने जा रहे हैं..

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बॉलीवुड इंडस्ट्री मे आने से पहले अनिल कपूर का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। अभिनेता जब मुंबई आए थे, तो उनके परिवार के पास पैसों की तंगी थी। अनिल तब अपने परिवार के साथ राज कपूर के गैरेज में रहे थे। दरअसल, अनिल कपूर के पिता सुरिंदर कपूर, राजकपूर के पिता पृथ्वीराज कपूर के कजिन हैं। इसके बाद उन्होंने एक इलाके में कमरा किराए पर लिया था। लंबे समय तक वे किराए के कमरे में भी रहे थे। अभिनेता ने खुद इस बात का खुलासा एक इंटरव्यू में किया था।

अनिल कपूर ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत वर्ष 1979 में की, उन्होंने निर्देशक उमेश मेहरा की फिल्म ‘हमारे तुम्हारे’ में कैमियो किया था। साल 1980 में आई तेलुगू फिल्म ‘वामसा वृक्षम’ में अनिल कपूर मुख्य भूमिका में काम किया। इसके बाद अभिनेता ने 1983 में फिल्म ‘वो सात दिन’ के जरिए बतौर लीड एक्टर बॉलीवुड में डेब्यू किया। इसके बाद एक एक करके अनिल कपूर कामयाबी की सीढ़ियां चढ़ते गए और ‘बेटा’, ‘मिस्टर इंडिया’, ‘मेरी जंग’, ‘कर्मा’, ‘तेजाब’, ‘कसम’, ‘राम लखन’, ‘हमारा दिल आपके पास है’, ‘लाडला’ और ‘नायक’ जैसी कई बेहतरीन फिल्में की।

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अनिल कपूर की डायलॉग की तरह ही उनकी लव लाइफ भी झकास है। अभिनेता जब बॉलीवुड इंडस्ट्री में अभिनेता बनने के लिए स्ट्रगल कर रहे थे, तब उनकी मुलाकात मॉडल सुनीता से हुई। पहली नजर में ही मिस्टर इंडिया को सुनीता से प्यार हो गया था। एक रिपोर्ट के मुताबिक, उन दिनों अनिल के खर्चे सुनीता ही उठाया करती थीं। अनिल कपूर ने सुनीता से साल 19 मई 1984 में शादी की थी।

महान फनकार मोहम्मद रफी की निजी जिंदगी से जुड़ा वो किस्सा, जिससे बेहद कम लोग हैं रूबरू

Mohammed Rafi Birthday special know ustaad career songs family struggle wife and unknown facts

एक महान फनकार जिसने भावनाओं को शब्दों में पिरोया, प्यार-मोहब्बत से लबरेज गानों से दिलों को छू लिया, आज उस शख्सियत की जयंती है। ‘तुम मुझे यूं भुला ना पाओगे’ गीत को आवाज देने वाले मोहम्मद रफी की आज जयंती है, जिन्हें वाकई में कभी नहीं भुलाया जा सकता।

एक महान फनकार जिसने भावनाओं को शब्दों में पिरोया, प्यार-मोहब्बत से लबरेज गानों से दिलों को छू लिया, आज उस शख्सियत की जयंती है। ‘तुम मुझे यूं भुला ना पाओगे’ गीत को आवाज देने वाले मोहम्मद रफी की आज जयंती है, जिन्हें वाकई में कभी नहीं भुलाया जा सकता। रूहानी आवाज से नवाजे गए रफी साहब भले ही इस दुनिया से रुखसत हो चुके हैं, लेकिन उनके सदाबहार गानों ने उन्हें चाहनेवालों के दिलों में हमेशा के लिए अमर कर दिया है। ‘क्या हुआ तेरा वादा’ से लेकर ‘आज मौसम बड़ा बेईमान है’ तक, ये सभी गाने आज भी काफी लोकप्रिय हैं। 24 दिसंबर,1924 को जन्में रफी साहब जितने बेहतरीन गायक थे, उतने ही शानदार इंसान भी थे। हालांकि, अमृतसर के छोटे गांव कोटला सुल्तानपुर में रहने वाले मोहम्मद रफी, उस्ताद मोहम्मद रफी कैसे बने, आइए उनके 99वीं जयंती पर जान लेते हैं-

उल्लेखनीय है कि पंजाब के कोटला सुल्तानपुर में  24 दिसंबर, 1924 को हाजी अली मोहम्मद के परिवार में मोहम्मद रफी का जन्म हुआ था। हाजी अली मोहम्मद के छह बच्चों में से रफी दूसरे नंबर पर थे। उन्हें घर में फीको कहा जाता था। गली में फकीर को गाते सुनकर रफी ने गाना शुरू किया था। धीरे-धीरे यह सूफी फकीर उनके गाने की प्रेरणा बनता गया और वह मोहम्मद रफी से उस्ताद मोहम्मद रफी बन गए। रफी के बड़े भाई सलून चलाया करते थे। मोहम्मद रफी की पढ़ाई में कोई रूचि नहीं थी। ऐसे में उनके पिताजी ने उन्हें बड़े भाई के साथ सलून में काम सीखने के लिए भेज दिया था। रफी के साले मोहम्मद हमीद ने रफी में प्रतिभा देखी और उनका उत्साह बढ़ाया। हमीद ने ही रफी साहब की मुलाकात नौशाद अली से करवाई। जिसके बाद उन्हें ‘हिंदुस्तान के हम हैं, हिंदुस्तान हमारा’ की कुछ लाइने गाने का मौका मिला।

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मोहम्मद रफी ने पहली दफा 13 वर्ष की उम्र में स्टेज परफॉर्मेंस दी थी। यह अवसर उन्हें महान केएल सहगल के एक संगीत कार्यक्रम में मिला था। 1948 में, रफी ने राजेंद्र कृष्ण द्वारा लिखित ‘सुन सुनो ऐ दुनिया वालों बापूजी की अमर कहानी’ गाना गाया। इस गाने के हिट होने के बाद उन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के घर में गाने के लिए आमंत्रित किया गया था। मोहम्मद रफी ने बॉलीवुड की कई फिल्मों में शानदार गाने गाए, जिन्हें हिंदी संगीत के इतिहास में गिना जाता है। उन्होंने हिंदी गानों के अलावा कई क्षेत्रीय और विदेशी भाषा में भी गाने गाए। 

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रफी के गानों के दीवाने तो करोड़ों हैं, लेकिन उनकी निजी जिंदगी के बारे में कम ही लोगों को पता है। बहुत ही कम लोग जानते हैं कि मोहम्मद रफी ने दो शादियां की थीं। अपनी पहली शादी की बात उन्होंने सबसे छिपाकर रखी थी। इसका खुलासा मोहम्मद रफी की बहू यास्मीन खालिद रफी ने की। यास्मीन ने अपनी किताब ‘मोहम्मद रफी मेरे अब्बा..एक संस्मरण’ में रफी की पहली शादी का जिक्र किया। यास्मीन ने किताब में लिखा कि मोहम्मद रफी की पहली शादी 13 वर्ष की उम्र में उनके चाचा की बेटी बशीरा बानो से उनके पैतृक गांव में हुई थी। यह शादी ज्यादा दिन चली नहीं क्योंकि बशीरा ने रफी के साथ भारत आने से मना कर दिया। वर्ष 1944 में 20 की उम्र में रफी की दूसरी शादी सिराजुद्दीन अहमद बारी और तालिमुन्निसा की बेटी बिलकिस के साथ हुई। विज्ञापन

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पहली शादी से रफी का एक बेटा सईद हुआ था। दूसरी शादी से उनके तीन बेटे खालिद, हामिद, शाहिद और तीन बेटियां परवीन अहमद, नसरीन अहमद, यास्मीन अहमद हुईं। रफी साहब के तीनों बेटों सईद, खालिद और हामिद की मौत हो चुकी है। एस.डी बर्मन, शंकर-जयकिशन, लक्ष्मीकांत प्यारेलाल, ओपी नैय्यर और कल्याणजी आनंदजी समेत अपने दौर के लगभग सभी लोकप्रिय संगीतकारों के साथ गाना गा चुके मोहम्मद रफी ने 31 जुलाई, 1980 को दुनिया को अलविदा कह दिया। रफी साहब के अंतिम संस्कार में 10 हजार से अधिक लोग शामिल हुए थे। 

शरद पवार ने की गौतम अदाणी की तारीफ, कहा- प्रौद्योगिकी केंद्र स्थापित करने में की वित्तीय मदद

Sharad Pawar praises Gautam Adani for extending financial help to set up technology centre in Baramati

एनसीपी अध्यक्ष ने आगे कहा ‘सौभाग्य से, जब मैंने अपने दो सहयोगियों से इसमें मदद करने का अनुरोध किया तो उन्होंने तुरंत अपना समर्थन दिया। पहली सिफोटेक जो देश में निर्माण क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण कंपनी है। 

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार ने  उद्योगपति गौतम अडानी को धन्यवाद दिया। उन्होंने शनिवार को पुणे जिले के बारामती में एक नए प्रौद्योगिकी केंद्र के निर्माण के लिए अडानी से वित्तीय मदद के लिए अडानी की प्रशंसा की ।

शरद पवार बारामती में विद्या प्रतिष्ठान के इंजीनियरिंग विभाग में रोबोटिक लैब के उद्घाटन के दौरान सभा को संबोधित कर रहे थे। इस कार्यक्रम में फिनोलेक्स जे पावर सिस्टम्स लिमिटेड के चेयरमैन दीपक छाबरिया भी मौजूद थे। इस दौरान सभा को संबोधित करते हुए शरद पवार ने कहा कि टेक्नोलॉजी के कारण इंजीनियरिंग क्षेत्र तेजी से बदल रहा है, विद्या प्रतिष्ठान संस्थान ने एक नया प्रोजेक्ट हाथ में लिया है।

पवार ने कहा कि वह एक ऐसा समूह (वर्ग) बनाना बहुत जरूरी है जो आगे बढ़ने के लिए इन बदलावों को स्वीकार करने के लिए तैयार हो। उन्होंने आगे कहा, ‘हम भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का पहला केंद्र बना रहे हैं और निर्माण कार्य चल रहा है। इस प्रोजेक्ट पर पच्चीस करोड़ रुपये की लागत आने वाली है। पच्चीस करोड़ रुपये की व्यवस्था करने के बाद हम इस काम में कूद पड़े हैं’। 

मदद के लिए दिया धन्यवाद
एनसीपी अध्यक्ष ने आगे कहा ‘सौभाग्य से, जब मैंने अपने दो सहयोगियों से इसमें मदद करने का अनुरोध किया तो उन्होंने तुरंत अपना समर्थन दिया। पहली सिफोटेक जो देश में निर्माण क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण कंपनी है। उन्होंने इस प्रोजेक्ट में 10 करोड़ रुपये की मदद करने का फैसला किया है, मैं उन्हें बहुत-बहुत धन्यवाद देना चाहता हूं।’ इस मौके पर गौतम अडानी का नाम लेना होगा, उन्होंने 25 करोड़ रुपये का चेक संस्था को भेजा है, इन दोनों की मदद से हम आज इस जगह पर ये दोनों प्रोजेक्ट स्थापित कर रहे हैं और काम भी शुरू हो गया है।

बारामती में लगेगी पांच से छह दिन की कृषि प्रदर्शनी
एनसीपी सुप्रीमो ने यह भी बताया कि 17 से 22 जनवरी तक हम कृषि विकास प्रतिष्ठान के सहयोग से बारामती में एक कृषि प्रदर्शनी लगा रहे हैं और इसमें लाखों किसान हिस्सा लेंगे। उन्होंने कहा, ‘आज के हाई-टेक उत्पाद मशीनों, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक और कंप्यूटर शाखाओं का एक साथ उपयोग करके उद्योग-संचालित जनशक्ति का निर्माण करते हुए बाजार में आते हैं। यदि इस बढ़ती मांग को पूरा करना है, तो नई तकनीक वाले कुशल इंजीनियरों की  देश और विदेश दोनों में भारी आवश्यकता है’।

पवार ने बताया कि उन्होंने हर चुनौती और अवसरों को ध्यान में रखते हुए, विद्या प्रतिष्ठान ने बारामती में लगभग चार हजार वर्ग फीट में ग्रामीण क्षेत्र की पहली स्मार्ट फैक्ट्री बनाने का निर्णय लिया है, जिसके लिए काम भी शुरू कर दिया गया है।

धूप आने दो: शिव ने क्यों किया यमराज का संहार, मार्कण्डेय के लिए इसलिए तोड़ा अपना ही बनाया नियम

Know Why Shiv killed Yamraj and broke his own rules for Markandeya

धूप आने दो: शिव ने क्यों किया यमराज का संहार, मार्कण्डेय के लिए इसलिए तोड़ा अपना ही बनाया नियम Know Why Shiv killed Yamraj and broke his own rules for Markandeya 

भगवान शिव, मार्कण्डेय और यमराज।

भगवान शिव, मार्कण्डेय और यमराज। 

यमराज ने जैसे ही मार्कण्डेय को स्पर्श किया, उन्हें लगा कि कोई उनका गला दबा रहा है। यमराज बहुत प्रयास के बाद भी शिव के पाश से मुक्त नहीं हो सके। कुछ ही क्षण में उनकी श्वास रुक गई…

महर्षि भृगु के वंश में मृकंडु नाम के एक तेजस्वी ऋषि हुए। उनकी कोई संतान नहीं थी। मृकंडु और उनकी पत्नी ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कठोर तप किया जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए और वरदान मांगने को कहा। मृकंडु और उनकी पत्नी ने शिव से एक पुत्र मांगा।

शिव ने कहा, ‘मैं आपको दीर्घायु पुत्र प्रदान कर सकता हूं किंतु वह अल्पबुद्धि होगा, अथवा आपको बुद्धिमान पुत्र मिल सकता है किंतु उसकी आयु कुल सोलह वर्ष होगी। आपको कैसा पुत्र चाहिए?’ मृकंडु ने कहा, ‘दीर्घायु पुत्र होना अच्छी बात है किंतु यदि वह अल्पबुद्धि हुआ तो हमारा कष्ट बढ़ जाएगा। इसलिए आप हमें ऐसा पुत्र दीजिए जो भले ही अल्पायु हो किंतु उसका यश चिरस्थायी हो।’ शिव ने ‘तथास्तु’ कहा और अंतर्धान हो गए। 

कुछ समय बाद मृकंडु की पत्नी ने एक तेजस्वी बालक को जन्म दिया। उसका नाम मार्कण्डेय हुआ। उन्हें बचपन में ही वेद और शास्त्र कंठस्थ हो गए। उसके ज्ञान और यश का डंका बजने लगा। समय बीता और एक दिन मार्कण्डेय का सोलहवां जन्मदिवस आ गया। मृकंडु और उनकी पत्नी दुखी थे क्योंकि शिव के वरदान के अनुसार मार्कण्डेय का जीवन समाप्त होने वाला था। मार्कण्डेय ने माता-पिता से उनके दुख का कारण पूछा तो मृकंडु ने उसे सारी बात बताई। बालक मार्कण्डेय ने तत्काल एक पार्थिव शिवलिंग का निर्माण किया तथा शिव की उपासना शुरू कर दी। उसके प्राण लेने यमदूत आ गए किंतु किसी अदृश्य शक्ति ने उन सबको बालक मार्कण्डेय से दूर खदेड़ दिया। कई बार प्रयास करने के बाद भी जब यमदूत, बालक मार्कण्डेय के प्राण लेने में सफल नहीं हुए तो मृत्यु के देवता यमराज को स्वयं आना पड़ा।

यमराज ने मार्कण्डेय के गले में अपना फंदा डाल दिया। जैसे ही यमराज ने फंदा खींचा, मार्कण्डेय ने शिवलिंग को कसकर पकड़ लिया और मंत्र उच्चारित करते हुए शिव का आह्वान करने लगा।

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् । 
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥

मार्कण्डेय की भक्ति देख शिव स्वयं उसकी सहायता के लिए आ गए। यमराज ने देखा कि देवाधिदेव शिव, उनका मार्ग रोककर खड़े थे। ‘बालक को छोड़ दो,’ शिव ने यमराज को आज्ञा दी। यमराज बोले, ‘आपने ही मार्कण्डेय को सोलह वर्ष की आयु प्रदान की थी। वह अवधि पूर्ण हो चुकी है। मैं इसे लेने आया हूं। परंतु मैंने विचार बदल दिया है। मैं मार्कण्डेय को अमरता का वरदान देता हूं।’ शिव ने उत्तर दिया। ‘यह प्रकृति के नियमों के विरुद्ध है,’ यम ने डरते हुए कहा। शिव ने यमराज से कहा,‘मैं जीवन हूं और मैं ही मृत्यु हूं। मार्कण्डेय के लिए मैं अपना ही बनाया नियम तोड़ रहा हूं। आज से मार्कण्डेय अमर है!’

यमराज, शिव से सहमत नहीं हुए। उन्होंने आगे बढ़कर जैसे ही मार्कण्डेय को स्पर्श करना चाहा तो इस बार यमराज को लगा कि कोई उनका गला दबा रहा है। यमराज ने बहुत प्रयास किया किंतु वह शिव के पाश से मुक्त नहीं हो सके। कुछ ही क्षण में यमराज की श्वास रुक गई और उनका अंत हो गया! यह भयानक दृश्य देखकर देवतागण, शिव के पास आए और उन्होंने सृष्टि के संतुलन के लिए शिव से यमराज को पुनर्जीवित करने का आग्रह किया। वे बोले, ‘हे महादेव, जो सबका अंत करता है, आपने उस काल का अंत कर दिया। इस कारण आपका एक नाम ‘कालंतक’ होगा। मार्कण्डेय ने आपके आह्वान के लिए जो मंत्र उच्चारित किया था, वह ‘महामृत्युंजय मंत्र’ कहलाएगा और इसका पाठ करने वाले को मृत्यु का भय नहीं रहेगा।’

इसके बाद शिव ने यमराज को फिर से जीवनदान दे दिया। कहते हैं, पृथ्वी पर आठ लोगों को अमरता का वरदान प्राप्त है, जिनमें मार्कण्डेय भी शामिल हैं।

क्रिसमस पर खास तरीके से सजाएं स्कूल का बोर्ड, ये रहे आइडिया

Christmas Day 2023 Top 10 Board Decoration Ideas For School Students On Xmas Day

क्रिसमस डे के मौके पर स्कूल की सजावट कर रहे हैं तो बोर्ड डेकोरेशन कर सकते है। यहां क्रिसमस पर बोर्ड डेकोरेशन के आइडिया दिए जा रहे हैं। 

क्रिसमस डे 25 दिसंबर को मनाया जा रहा है। इस दिन को लेकर बच्चे अधिक उत्साहित होते हैं। क्रिसमस पर बच्चे घर और स्कूल की सजावट करते हैं और सांता के इंतज़ार में रहते हैं। क्रिसमस डे भी रंग बिरंगे मौजे, क्रिसमस ट्री, कैंडल, केक आदि से जुड़ा पर्व है, जिसकी सजावट का सामान बाजार में इन दिनों आसानी से मिल जाएगा। अगर आप घर के साथ ही स्कूल में क्रिसमस की सजावट करना चाहते हैं, तो स्कूल बोर्ड को कुछ सुंदर और रचनात्मक आइडिया से सजा सकते हैं। यहाँ क्रिसमस डे के मौके पर स्कूल बोर्ड डेकोरेन के नए आइडिया दिए जा रहे हैं, जिन्हे आसानी से अपनाकर क्रिसमस डे मना सकते हैं। 

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क्रिसमस ट्री बनाएं

स्कूल बोर्ड पर कई रंगों की चाॅक या मार्कर के उपयोग से कुछ ड्रॉ कर सकते हैं। अगर आप क्रिसमस डे की सजावट कर रहे हैं तो क्रिसमस ट्री बोर्ड पर बना सकते हैं। ड्राइंग को ग्लीटर, पोम-पोम, पेपर शेप से सजा सकते हैं।

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मोमबत्ती बनाएं

बोर्ड पर रचनात्मक ट्विस्ट के साथ मोमबत्ती की ड्राइंग बना सकते हैं। इसमें जलती हुई लौ को कुछ सजावट के सामान के साथ हाइलाइट कर सकते हैं।

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क्रिसमस फायरप्लेस

सुंदर क्रिसमस फायर प्लेस को स्टॉकिंग, गारलेंड्स और क्रिसमस ट्री के साथ सजा सकते हैं। पेपर कटआउट्स के जरिए बोर्ड को आकर्षक तरीके से डेकोरेट किया जा सकता है।

आकलन: मोदी के भारत में किस हाल में हैं चार ‘जातियां’, क्यों पिछड़ी है आधी आबादी

How are four castes poor, youth, women and farmers doing in India PM Modi

चारों ‘जातियों’ का बड़ा हिस्सा गरीब और दुखी है तथा उन्हें मोदी सरकार की नीतियों और कार्यक्रमों पर बहुत ज्यादा भरोसा नहीं है। उन्हें यह मालूम है कि सरकार का झुकाव अमीरों की तरफ है। किसानों की चुप्पी सरकार की नीतियों का अनुमोदन या सहमति नहीं है। यह चुप्पी इसलिए है, क्योंकि वे गरीब हैं। 

यह सर्वमान्य तथ्य है कि देश में चार जातियां हैं। सही मायनों में देश में चार वर्ण और अनगिनत जातियां हैं, जिनकी संख्या हजारों में है। चार वर्ण हैं- ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र। तथाकथित ‘अछूत’ कही जाने वाली जाति को ‘शूद्र’ के नीचे रखा गया था, जिन्हें अब दलित कहा जाता है। दरअसल वर्ण भारत के लिए अभिशाप रहे हैं-जिनसे पदानुक्रम पैदा हुए, पूर्वाग्रह मजबूत हुए, रोजगार को अलग-थलग किया गया, गतिशीलता नकारी गई और करीब एक-चौथाई आबादी को विकास का स्वाद चखने से दूर रख गया। इसलिए, मैं प्रधानमंत्री मोदी द्वारा चार जातियों की दी गई परिभाषा का स्वागत करता हूं, जो गरीब, युवा, महिलाएं और किसान हैं। हालांकि मुझे ‘जाति’ शब्द पसंद नहीं है। लेकिन एक तरफ छोड़कर, हम अपने आप से यह सवाल पूछें कि मोदी के भारत में ये चार ‘जातियां’ किस हाल में हैं।

गरीब
यूएनडीपी के अनुमान के अनुसार, भारत में 22.8 करोड़ लोग गरीब हैं, जो जनसंख्या का 16 प्रतिशत है। हालांकि यह आकलन गरीबी को मापने के बेहद निम्न पैमाने पर आधारित है, जिसमें शहरी इलाकों में प्रति महीने प्रति व्यक्ति आय 1,286 रूपये और ग्रामीण इलाके में 1, 089 रुपये है। वर्ष 1991 में शुरू की गई उदारीकरण की नीति को धन्यवाद देना चहिए, जिसके कारण लाखों लोग गरीबी से बाहर आ सके। लेकिन इन आंकड़ों पर विचार करें। देश की निचली 50 प्रतिशत आबादी के पास केवल तीन प्रतिशत संपत्ति है और वे कुल राष्ट्रीय आय का केवल 13 फीसदी अर्जित करते हैं। इस वर्ग में 32.1 प्रतिशत बच्चे कम वजन के, 19.3 प्रतिशत कमजोर और 35.5 प्रतिशत बौने हैं। 15 से 49 आयु वर्ग की 50 प्रतिशत से ज्यादा महिलाएं खून की कमी यानी एनीमिया से पीड़ित हैं। सरकार ने अगले पांच साल तक 81 करोड़ लोगों यानी 57 प्रतिशत आबादी को प्रति व्यक्ति प्रति माह पांच किलोग्राम मुफ्त राशन देना आवश्यक समझा। इसका साफ मतलब है कि देश में बड़े पैमाने पर कुपोषण और भुखमरी है। स्टेट ऑफ वर्किंग इंडिया रिपोर्ट, 2023 (अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी) और आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण के अनुसार, 2017-18 और 2022-23 के बीच तीन प्रकार के श्रमिकों की मासिक कमाई स्थिर रही है। ऐसे में मात्र 16 प्रतिशत आबादी को गरीब आंकना गलत है।

युवा
आधा भारत 28 वर्ष (औसत आयु) से कम आयु का है। पीएलएफएस (जुलाई 2022-जून 2023) के अनुसार, 15-29 वर्ष की आयु के लोगों की बेरोजगारी दर 10.0 प्रतिशत (ग्रामीण 8.3, शहरी 13.8) है। स्टेट ऑफ वर्किंग इंडिया रिपोर्ट, 2023 के अनुसार, 25 वर्ष से कम आयु वाले स्नातकों में बेरोजगारी दर 42.3 प्रतिशत है। स्नातक छात्रों की जैसे-जैसे उम्र बढ़ती गई, (और लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा) बेरोजगारी दर कम हो गई, लेकिन 30-34 वर्ष की आयु के स्नातकों के बीच भी बेरोजगारी दर 9.8 प्रतिशत है। उच्च बेरोजगारी का असर आंतरिक प्रवासन, अपराध, हिंसा और नशे के उपयोग में बढ़ोतरी में दिखता है। सरकार का यह दावा जुमला बनकर रह गया कि वह हर साल दो करोड़ रोजगार पैदा करेगी। विगत जुलाई में संसद में एक लिखित जवाब में सरकार ने खुलासा किया कि मार्च, 2022 में सरकारी महकमों में 9,64,359 पद खाली थे। सरकार के पास इतने बड़े पैमाने पर बेरोजगारी का कोई जवाब नहीं है। युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी एक ज्वालामुखी के समान है, जो कभी भी फट सकती है।

महिलाएं
महिलाएं आबादी का आधा हिस्सा हैं और उनके ‘पिछड़ेपन’  के कई कारण हैं- जिसमें पितृसत्ता, प्रतिगामी सामाजिक और सांस्कृतिक मानदंड, कम शिक्षा, कम संपत्ति, उच्च बेरोजगारी, लैंगिक भेदभाव और महिलाओं के खिलाफ अपराध मुख्य हैं। एनसीआरबी रिपोर्ट (दिसंबर, 2023) के अनुसार, 2021 की तुलना में 2022 में महिलाओं के विरुद्ध अपराध के मामले में चार प्रतिशत की वृद्धि हुई और 2022 में महिलाओं के खिलाफ 4,45,000 अपराध दर्ज किए गए। ज्यादातर अपराध परिवार के सदस्यों द्वारा क्रूरता, घरेलू हिंसा, अपहरण, यौन उत्पीड़न, बलात्कार और दहेज की मांग के थे।
लैंगिक असमानता और भेदभाव जिंदगी के हर क्षेत्र में पाया जाता है, खासतौर से आय के मामले में। अनौपचारिक क्षेत्र में पुरुष कामगार महिला श्रमिकों की तुलना में 48 प्रतिशत अधिक कमाते हैं, जबकि नियमित वेतन वाले पुरुष महिलाओं की तुलना में 24 फीसदी अधिक कमाते हैं। महिलाओं में आबादी और श्रमिक का अनुपात 21.9 प्रतिशत है, जबकि पुरुषों में यह 69.4 प्रतिशत है। शहरी महिलाओं की श्रम बल में भागीदारी दर 24.0 है, जबकि पुरुषों की 73.8 प्रतिशत है। विश्व बैंक के अनुसार, वर्ष 2004-05 से 2011-12 के बीच 1.96 करोड़ महिलाओं ने काम छोड़ दिया। अगर इन असमानताओं को नजरअंदाज किया जाता है, तो इसका मतलब यह होगा कि महिलाएं आने वाली कई सदियों तक दबी ही रहेंगी।

किसान
एनसीआरबी का आंकड़ा बताता है कि वर्ष 2014 और 2022 में आत्महत्या करने वाले किसानों की संख्या अधिक रही है। यदि इसमें कृषि मजदूरों की संख्या को भी जोड़ दिया जाए, तो 2020, 2021 और 2022 में आत्महत्या करने वाले किसानों की संख्या क्रमश: 10,600, 10,881, और 11,290 रही है। हर साल किसान अपनी जी-तोड़ मेहनत से गेहूं और चावल की रिकॉर्ड पैदावार करते हैं, जिसका सबूत केंद्रीय पूल में इसके बढ़ते भंडार से मिलता है। इसके बावजूद किसान गरीब हैं। जब कृषि उत्पाद की कीमत कम होती है, तब किसानों को नुकसान होता है और जब कीमत बढ़ती है तो भारतीय जनता पार्टी की सरकार निर्यात पर रोक लगा देती है।

किसानों के पिछड़ेपन का मुख्य कारण छोटी जोत, खेती में बढ़ती लागत, अपर्याप्त एमएसपी और अनिश्चित बाजार मूल्य, उपभोक्ता के पक्ष में पक्षपाती आयात और निर्यात नीतियां, प्राकृतिक आपदाएं और बीमा राशि है, जो या तो हैं ही नहीं या उनको नकार दिया गया है। एक खुशहाल किसान विरोधाभासी होता है। किसानों का गुस्सा उस वक्त देखने को मिला, जब सरकार ने उनसे बिना सलाह लिए कृषि कानून लागू करने की कोशिश की थी। इन चारों ‘जातियों’ का बड़ा हिस्सा गरीब और दुखी है तथा उन्हें मोदी सरकार की नीतियों और कार्यक्रमों पर बहुत ज्यादा भरोसा नहीं है। उन्हें यह मालूम है कि सरकार का झुकाव अमीरों की तरफ है। किसानों की चुप्पी सरकार की नीतियों का अनुमोदन या सहमति नहीं है। यह चुप्पी इसलिए है, क्योंकि वे गरीब हैं, उनके पास कम ताकत है और वे डर के साये में जीते हैं।

कर्नाटक: कलबुर्गी शहर में क्रिसमस से पहले सेंट मैरी चर्च को को रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया है।

2024 से पहले कांग्रेस में बड़ा फेरबदल, सचिन पायलट संभालेंगे छत्तीसगढ़, प्रियंका की UP से छुट्टी!

अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने बड़ा फेरबदल किया है। पार्टी ने प्रियंका गांधी वाड्रा को यूपी कांग्रेस के एआईसीसी प्रभारी पद से मुक्त कर दिया गया है। इसके अलावा सचिन पायलट को छत्तीसगढ़ कांग्रेस का प्रभारी नियुक्त किया गया है। रमेश चेन्निथला को महाराष्ट्र का AICC प्रभारी बनाया गया है। अव‍िनाश पांडे को यूपी कांग्रेस महासचिव का पद द‍िया गया है। प्रियंका गांधी वाड्रा ‘बिना किसी विभाग के’ महासचिव बनी रहेंगी।

हिमाचल प्रदेश: अटल टनल रोहतांग में ताजा बर्फबारी 

  • कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा को यूपी कांग्रेस के एआईसीसी प्रभारी पद से मुक्त कर दिया गया है. सचिन पायलट को छत्तीसगढ़ कांग्रेस का प्रभारी नियुक्त किया गया. रमेश चेन्निथला को महाराष्ट्र का AICC प्रभारी नियुक्त किया गया।कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा को यूपी कांग्रेस के एआईसीसी प्रभारी पद से मुक्त कर दिया गया है. सचिन पायलट को छत्तीसगढ़ कांग्रेस का प्रभारी नियुक्त किया गया. रमेश चेन्निथला को महाराष्ट्र का AICC प्रभारी नियुक्त किया गया।
  • पूरे उत्तर प्रदेश में शराब की दुकानें 24 और 31 दिसंबर को रात 11 बजे तक खुली रहेंगी: एक्साइज विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार

लोकसभा चुनाव 2024 में कौन मारेगा बाजी एनडीए या I.N.D.I.A?

लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर बीजेपी और कांग्रेस ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। बीजेपी नीत एनडीए और कांग्रेस के साथ वाले I.N.D.I.A गठबंधन में मुख्य रूप से मुकाबला है। इस बीच 2024 के आम चुनाव के लिए ओपिनियन पोल के नतीजे आए हैं। सी-वोटर के ओपिनियन पोल सर्वे में बीजेपी के लिए दक्षिण भारत बड़ी चुनौती बनता दिख रहा है। हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी को दक्षिण में निराशा हाथ लगी थी। ऐसे में देखना होगा कि सर्वे में किसे कितनी सीट मिलने की बात कही जा रही है।

एलुम्नाई मीट में हेल्थ पर भाषण दे रहे IIT कानपुर के प्रफेसर मंच पर गिर पड़े, हार्ट अटैक से मौत

उत्तर प्रदेश के आईआईटी कानपुर से चौकाने वाली घटना प्रकाश में आई है। शुक्रवार को आईआईटी कानपुर के ऑडिटोरियम में चल रहे कार्यक्रम को प्रफेसर समीर खांडेकर संबोधित कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें हार्ट अटैक आ गया। ऑडिटोरियम में बैठे लोगों ने समझा कि वरिष्ठ वैज्ञानिक भावुक होकर गिर पड़े हैं। उन्हें फौरन कॉर्डियोलाजी ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। प्रफेसर समीर खांडेकर की मौत से कैंपस में हड़कंप मच गया।

कर्नाटक: केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा , “मैं सिर्फ इतना कह सकता हूं कि हम अच्छी सुविधाएं मुहैया कराने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। मैं प्रधानमंत्री मोदी का आभारी हूं जिन्होंने पिछले 9 वर्षों में खेल बजट को 3 गुना बढ़ाया…हमने टोक्यो ओलंपिक, पैरालिंपिक, एशियाई खेलों और पैरा-एशियाई खेलों में उच्चतम पदक जीते हैं। यह खेल के क्षेत्र में भारतीयों का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है…”

Ramswaroop Mantri

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