अग्नि आलोक
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यह तानाशाह का अंतिम पड़ाव है !

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देखते देखते उसका
भोला भोला हंसता हुआ चेहरा
सख़्त होता गया
शरीर का रोम रोम
तीखे नाख़ून बन गये
सर के बाल, दाढ़ी, मूंछें
पतले लंबे नाख़ून
नाख़ून जैसे दांत
अब जब वह हंसता है
तो सान चढ़े तलवारों के बीच से
सनसनाती हुई गुज़रती
सर्द हवाओं की आवाज़ आती है
यह किसी आदमी के
राक्षस बनने की प्रक्रिया नहीं है
यह एक हारे हुए तानाशाह के चेहरे का
अंतिम पड़ाव है

  • सुब्रतो चटर्जी

Ramswaroop Mantri

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