प्रमोद जैन पिंटू
भारतीय जनता पार्टी का वास्तविक फंडा अब लोगों के समझ में आने लगा है राम मंदिर और रामलला की मूर्ति की स्थापना को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ उसका अनुषंगी संगठन और उसके राजनीतिक चेहरे भारतीय जनता पार्टी ने जिस तरह आगामी लोकसभा चुनाव की पृष्ठभूमि में राम मंदिर को और उसकी भव्यता को जिस तरह से राजनीतिक उपकरण बनाया है उससे राम के प्रति जो देश की आस्था है वह चोटिल होने लगी है!
और यह बात यूं ही नहीं कहीं जाती जब सनातन संस्कृति के संवाहक माने जाने वाले चारों पीठ के शंकराचार्य अगर किसी धार्मिक कवायद का विरोध कर रहे हैं और खुलकर यह कह रहे हैं कि यह प्रधानमंत्री द्वारा प्रभु राम की आस्था का राजनीतिकरण है तो इसे समझा जाना चाहिए!
राम मंदिर के निर्माण में धार्मिक मान्यताओं को दरकिनार करके राजनीतिक लाभ के लिए जिस तरह मान्यताओं का मजाक बनाया जा रहा है उसे लेकर जनमानस
आंदोलीत है!
इस देश में प्रभु श्री राम के प्रति आस्था जन जन की श्रद्धा का विषय है जिस तरह राष्ट्र की सुरक्षा का भाव हर व्यक्ति की राष्ट्रीय चेतना में अंतर निहित रहता है!
पिछली बार लोकसभा चुनाव के पूर्व पुलवामा की घटना हुई और फिर पुलवामा के वीर शहीदों को लेकर जिस तरह सरकार ने और सत्ता धारी राजनीतिक दल ने देश के जन-जन की भावनाओं को राजनीतिक रूप से भुनाया वह सारा देश जानता है!
पुलवामा के घटना के पीछे सीबीआई ने सूचना लीक करने के मामले में जिस डिवाइसपी देवेंद्र सिंह को नामांकित किया था उसके खिलाफ भारत सरकार तीस हजारी कोर्ट में चार्ज शीट तक पेश नहीं कर पाई और वह बरी हो गया!
अंतरराष्ट्रीय मीडिया चीखता रहा की जो तथा कथित सर्जिकल स्ट्राइक की भारत बात कर रहा है उसके प्रमाण पाक की जमीन पर नहीं पाए गए हैं!
पर राष्ट्रवाद के उफान पर उस हर बात को खारिज कर दिया गया जिसने उस घटना पर सवाल उठाया!
घटनाएं यहां नहीं रुकती अगर हम थोड़ा पीछे जाएं तो कोरोना की दूसरी लहर के पहले पहले लहर के लिए मौलाना साद को भारत की सरकार ने और तमाम बिकाऊ मीडिया ने जिम्मेदार बताया पर आश्चर्य भारत के सबसे बड़े रक्षा सलाहकार डोभाल के मौलाना साद के आश्रय स्थल में जाने के बावजूद आज तक भारत की पुलिस भारत की सेना उसे गिरफ्तार नहीं कर पाई आखिर कुछ तो कारण रहे होंगे?
पहलवान बेटियों को लेकर पूरा देश आंदोलन करता रहा पर सरकार के कानों में जू तक नहीं रेगी और ठीक लोकसभा चुनाव के पहले जब यह जाट आस्था का प्रश्न बनता हुआ लगा तो सरकार ने पीछे कदम खींच लिए!
दरअसल चाहे सेना हो चाहे न्यायालय हो या अन्य कोई संवैधानिक संस्था यहां तक की संसद में भी कतिपय नियमों का बहाना लेकर अपनी पसंद के कानून पास करने के लिए 150 सांसदों को निष्कासित कर दिया!
संवैधानिक संस्थाओं का पूरी तरह अपहरण कर लेना और इस बात के लिए नॉरेटिव बनाने का प्रयास करने की कोशिश करते रहना की जो सरकार कर रही है वही एकदम सही है उसका हर कदम आलोचना और पूर्वाग्रह के ऊपर है इस बात का द्योतक है की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ चाहता है कम्युनिस्ट की तरह चीन और कोरिया की तरह भारत में भी आज्ञाकारी समाज की परिकल्पना को जीवंत किया जाए जिसमें सिर्फ वही बातें मानी जाए जिन्हें वह लोग निर्देशित करें जो सत्ता के शिखर पर हैं!
चीन के अधिकारियों से बात करने पर राहुल गांधी आलोचना के पात्र हो सकते हैं पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का संगठन और इसके प्रतिनिधि यदि चीन के शासक दल का मुख्यालय में जाकर कार्यशाला में भाग ले तो वह जायज है यह भी जायज है कि चीन का कोई प्रतिनिधिमंडल है और वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यालय में जाकर विचार विमर्श करें!
अनैतिकता की हद तो जब हो गई जब उपचुनाव के पहले करणपुर में भारतीय जनता पार्टी ने अपने उम्मीदवार को मंत्री बना दिया कानूनी रूप से बनाया जा सकता था लेकिन नैतिक रूप से वह अनैतिकता की पराकाष्ठा थी और आज जब परिणाम आया तो जनता ने सबक सिखा दिया तमामतर कोशिशें के बावजूद वहां भाजपा चुनाव नहीं जीत सकी!
एक बात और प्रमाणित हुई कि यदि परिणाम तीन दिन के भीतर घोषित किए जाते हैं तो अधिकांश जगहों पर भारतीय जनता पार्टी पराजित होती है यानी evm को लेकर जो इस समय पूरे देश में एक बेचैनी है उसे संदर्भ में भी इस परिणाम की पुष्टि होती है!
भारत के विपक्षी दलों का गठबंधन
भारतीय जनता पार्टी से यदि फ्री एंड फेयर इलेक्शन करवाने में कामयाब हो जाए तो शायद भारतीय जनता पार्टी को अपने अनैतिकता राजनीतिक प्रदूषण और आस्था के बाजारीकरण का पूरा-पूरा जवाब जनता की ओर से मिल सकता है!
पर यक्ष प्रश्न यही है संवैधानिक संस्थाओं पर न्यायपालिका पर और अब कार्यपालिका पर भी लगभग कब्जा करने के बाद क्या भारतीय जनता पार्टी ऐसा होने देगी?
यह आगामी लोकसभा चुनाव के बाद भारत भी कम्युनिस्ट व्यवस्था की तरह आज्ञाकारी समाज की तरफ एक और कदम बढ़ा देगा!
जहां सरकार ही भाग्य विधाता होती है उनके खिलाफ सवाल करना बोलना या संघर्ष करना या लोकतंत्र की बात करना राष्ट्रद्रोह होता है!
पिंटू फीचर्स
भवानी मंडी(राज,)





