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भारत  की दूसरी  आजादी के  नायक लोकबंधु    राजनारायण

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       …….रामबाबू अग्रवाल 

जीवन 69 बरसो का, जेल गए 80 बार जेल में बताएं 17 वर्ष । लोकबंधु राजनारायण ने स्वतंत्र भारत और पराधीन भारत दोनों समय जेल यात्राएं की।स्वर्गीय  राज नारायण जी के ऊपर लिखा जा सकता है बोला जा सकता है और उनके नाम पर राजनीतिक दल भी बनाया जा सकता है पर यह कटु सत्य है राजनारायण बना ही नहीं जा सकता ।

आजाद भारत में समता, बंधुत्व, और सदभाव की खातिर कम लोगों ने जीवन में इतनी प्रताड़ना सही होगी. जो राजनीति के फक्कड़ नेता थे. वह राममनोहर लोहिया के साथ सोशलिस्ट पार्टी के संस्थापकों में थे. हर किसी के लिए उपलब्ध और हर किसी के मददगार. हालांकि बाद के बरसों में उन्हीं के सियासी साथियों ने उनसे दूरी बना ली और उन्हें भारतीय राजनीति का विदूषक भी कहा जाने लगा

 लोकबंधु राजनारायण जी को लोकतंत्र का कबीर कहा गया है । अगर भारतीय राजनीति का यह कबीर नहीं होता तो भारत का लोकतंत्र किस हाल मैं  कैसा होता इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती ।

डॉक्टर लोहिया के विचारों की एकेडमिक व्याख्या तो भविष्य में होती रहेगी किंतु उन विचारों के आधार पर कर्म की रूपरेखा जब भी बनाई जाएगी तो उसमें राज नारायण जी का नाम सर्वोपरि रहेगा राज नारायण  ने हर मोर्चे पर समाजवादी विचारधारा के अनुसार संघर्ष किया था चाहे  आंदोलन जाति तोड़ो का हो या अंग्रेजी हटाने का दाम बांधो का सार्वजनिक स्थानों पर अंग्रेजों की मूर्तियों को हटाने या मंदिरों में हरिजनों के प्रवेश का हो इन सब मुद्दों पर राज नारायण ने पूरे उत्तर प्रदेश सहित भारतवर्ष में आंदोलन चलाए ।संवैधानिक अधिकारों के प्रति उन्होंने जिस प्रकार उत्तर प्रदेश की विधानसभा लोकसभा राज्यसभा के लोक मानस का प्रतिरोध किया भारत के जनतांत्रिक इतिहास में महत्वपूर्ण प्रश्न है ।

विपक्ष कमजोर हाल में था

60 के दशक के खत्म होते होते इंदिरा मजबूत प्रधानमंत्री बन चुकी थीं. कांग्रेस के ताकतवर नेता उनके सामने पानी मांग रहे थे. विपक्ष बहुत कमजोर स्थिति में था. ऐसे में जब इंदिरा गांधी ने वर्ष 1971 में दोबारा चुनाव जीतकर आईं तो किसी बड़े नेता में उनसे टकराने की हिम्मत नहीं थी.

ऐसे में राजनारायण ना केवल उनसे भिड़े बल्कि विपक्ष को एक करने की जमीन भी बनाई. अगर वह इंदिरा को मुकदमे में टक्कर नहीं देते तो ना जयप्रकाश नारायण संपूर्ण क्रांति का आंदोलन कर पाते, ना आपातकाल लगता और ना ही 1977 के चुनावों में इंदिरा गांधी को बुरी तरह हार का सामना करना पड़ता

लोकबंधु राजनारायण जी के बारे में प्रायः कहा जाता था कि वह कभी भी कुछ भी कर सकते हैं । कुछ लोग यह समझते थे कि राजनारायण जो भी खतरा मोल लेते हैं। उसमें राजनीतिक प्रदर्शन अधिक है।  राजनारायण जिन 

मुद्दों को लेकर संघर्ष कर रहे थे ,ऐसे मुद्दे थे जिस पर किसी राजनीतिक पार्टी ने संघर्ष करने की बात सोची ही नहीं थी । विधानसभा लोकसभा राज्यसभा में लोकहित के लिए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव स्थगन प्रस्ताव और काम रोको प्रस्ताव ना मानने पर सत्याग्रह करने की बात हो या अंग्रेजी हटाने के लिए अदालत और राज्य प्रशासन के कार्यालय में धरना देने की बात डॉक्टर राम मनोहर लोहिया ने इन मुद्दों को समाजवादी आंदोलन का मुख्य अंग बना दिया  था । जनता ने राज नारायण जी को लोकबंधु का नाम दिया था वास्तव में यह लोक बंधु की उपाधि नहीं थी बल्कि लोक जीवन और लोकहित के लिए अनवरत संघर्षशील के प्रति जनमानस की कृतज्ञता थी राज नारायण जी जहां खड़े होते थे वहीं से समाजवादी आंदोलन का क्रांतिकारी कार्यक्रम शुरू हो जाता था । 

1971 के लोकसभा चुनाव में रायबरेली लोकसभा क्षेत्र श्रीमती इंदिरा गांधी ने एक लाख से अधिक वोटों से लोकबंधु राजनारायण जी को हराया

विश्व की सबसे लोकप्रिय नेता पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के खिलाफ चुनाव याचिका दाखिल की उसे एक स्टंट के रूप में माना गया। लोगों ने अनुमान भी लगाया कि उसमें बहुत गहराई नहीं है ।  

राज नारायण जी की याचिका पर इंदिरा गांधी का चुनाव रद्द घोषित किया गया और हाईकोर्ट के फैसले का नतीजा  रहा कि इंदिरा गांधी ने आपातकाल की घोषणा कर दी और राज नारायण जी सहित विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार करके जेल में डाल दिया

19 महीने बाद आपातकाल समाप्त कर लोकसभा चुनाव की घोषणा कर दी इसके बाद भी राज नारायण जी ने तय किया की चुनावतो इंदिरा गांधी के खिलाफ ही लड़ेंगे उस समय हर कोई सुरक्षित सीट की तलाश में था सभी को इस बात का शक था कि क्या राज नारायण जी चुनाव जीत जाएंगे इंदिरा जी तो इंदिरा जी हैं उनके पास सारी ताकत सर और सरकार इसके बाद फतेह राज नारायण जी की भी हुई

1977 में जनता पार्टी गठन के दौरान सरकार बनाते समय की मांग उठी थी कि प्रधानमंत्री को हराने वाले नेता राजनारायण जी को प्रधानमंत्री बनना चाहिए लेकिन उन्होंने मोरारजी देसाई के नाम का नाम सुझाया

लोकतंत्र की रक्षा के लिए मान प्रतिष्ठा धन सब कुछ दाव पर लगाया ।

                           (लेखक इंदौर के वरिष्ठ समाजवादी नेता समाजसेवी और लोहिया विचार मंच के प्रदेश अध्यक्ष हैं)

Ramswaroop Mantri

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