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धर्मक्षेत्रे : कौन है विष्णु तक को मोहित करने मे सक्षम महाशक्ति!

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       नीलम ज्योति

पढ़ा- सुना- कहा जाता है की विष्णु क्षीरसागर मे निद्रामग्न रहते हैं। शेषनाग अपने फन से उनकी रक्षा करते हैं. पत्नि लक्ष्मी उनके पैर दबाती रहती हैं. ऐसे चित्र आप भी देखे होंगे. जगत के पालनहार जब निद्रा में ही रहते हैं तो फिर इस जगत का पालन कैसे करते हैं? कौन है वह शक्ति जिसके माध्यम से विष्णु शयन करते हुए भी इस सृष्टि का पालन करते हैं?

     मार्कण्डेय पुराण और दुर्गा-सप्तशती के प्रथम अध्याय में इस सवाल का जबाब दिया गया है।

 जब विष्णु के कानों के मैल से मधु और कैटभ नामक दो महादैत्य प्रकट होते हैं और ब्रम्हा को मारने के लिए आगे बढ़ते हैं तो ब्रह्मा किन्ही योगमाया शक्ति का आह्वान करते हैं।

   ब्रह्मा उन योगमाया शक्ति का आह्वान करते हुए कहते है कि हे योगमाया! आपने विष्णु को निद्रा में सुला रखा है। आपने ही उन्हें इस प्रकार विमोहित कर रखा है कि वो संसार को लय में जानकर संसार के पालन से विमुख हो गए हैं।

    ब्रह्मा योगमाया की स्तुति करते हुए उन्हें अर्धमात्रा स्थिता, जगत का आधार और संसार का पालन करने वाली माया शक्ति के रुप में संबोधित करते हैं।

    ब्रह्मा कहते हैं कि हे योगमाया आपकी माया के प्रभाव से ही इस संसार की उत्पत्ति, पालन और संहार का कार्य होता है। आपने ही इस चराचर जगत के हरेक प्राणी को विमोहित कर रखा है ।

    आपके ही प्रभाव से सभी दुखो, सुखों का अनुभव करते हैं। हे देवी आप विष्णु के हदय में वास करती हैं। कृपा करके आप विष्णु को उनकी निद्रा से मुक्त करिए और मधु कैटभ के वध का माध्यम बनिए।

   ब्रह्मा की  स्तुति से पश्चात योगमाया विष्णु के नेत्रों, नासिका और हृदय से निकलती हैं।

    योगमाया जिस स्वरुप में निकलती हैं, वो महाकाली का वो स्वरुप है जिनकी दश भुजाएं और दश पैर हैं।

    वस्तुत: महाकाली ही महामाया के रुप में विष्णु को विमोहित करती हैं और विष्णु को निद्रा में सुला कर खुद संसार का पालन कार्य करती हैं। 

 योगमाया द्वापर युग में कृष्ण की सगी बहन के रुप में अवतरित होती हैं. जब कंस उनका वध करने का प्रयास करता है तो वो उसके हाथो से निकल कर उसे शाप देती हैं कि उसे मारने वाला पैदा हो चुका है। 

   इसके बाद योगमाया के शरीर जिसे कंस ने कारागार की दिवारों पर फेंका था उसका धड़ उत्तरप्रदेश विंध्याचल में जा गिरता है. सिर वर्तमान दिल्ली के महरौली स्थित में जा गिरता है। इन दोनों ही स्थानों पर योगमाया सिद्ध शक्तिपीठ के रूप में पूज्य हैं।

    द्वापर में वे द्रौपदी को भी माध्यम बना कर महाकाली के रूप में प्रगट होती हैं और कौरवो के वध का माध्यम बनती हैं।

    योगमाया महाकाली का वो स्वरुप हैं जिससे इस सृष्टि का पालन कार्य होता है। ये विष्णु की परा और अपरा दोनों ही शक्ति मानी गई हैं। 

    विष्णु इनकी शक्ति के बिना उसी तरह से निष्क्रिय हो जाते हैं जैसे शिव महासती की शक्ति के बिना शव हो जाते हैं।

   योगमाया शक्ति महाकाली रूपी वो शक्ति हैं जो हमारी इच्छाओं को नियंत्रित करती हैं। हम जिस भी प्रकार के मोह में बंधे होते हैं वो योगमाया शक्ति की वजह से ही होते हैं। इसी लिए इस संसार के मोह के बंधन से मुक्त होने के लिए महाकाली के योगमाया स्वरुप की पूजा की जाती है।

Ramswaroop Mantri

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