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क्या ऑनलाइन शापिंग में उपयोग होने वाले पैकेजिंग कॉर्टन असर डाल सकती है पर्यावरण पर ?

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रमेश शर्मा

आधुनिक उपभोक्तावाद के युग में तेजी से बढ़ता ऑनलाइन शॉपिंग बाजार ग्राहकों के लिए तो काफी सुविधाजनक हो रहा है, मगर यह भी एक सच्चाई है कि इस क्षेत्र में उपयोग होने वाले पैकेजिंग कॉर्टन बनाने में करोड़ों वृक्षों की बलि चढ़ जाती है। कोविड की महाभारी के साथ पूरी दुनिया में जिस तेजी से ऑनलाइन शॉपिंग का चलन बढ़ा है, उसने नए-नए रिकार्ड कायम कर दिए हैं। खास बात तो यह है कि कोविड के बाद भी ऑन- लाइन शॉपिंग के चलन ने बेहिसाब तरक्की हासिल की है। अभी भी इस सेक्टर ने अपनी गति बनाई रखी है। हालात तो ये है कि अब ऑनलाइन शॉपिंग लोगो की लत बन चुकी है।

पिछले एक दशक से तो ऑन लाइन शॉपिंग ने वैश्विक स्तर पर बढ़ी तेजी से प्रगति हासिल की है। अमेजान, वालमार्ट इत्यादि बड़ी कंपनियों के साथ-साथ कई छोटी बड़ी कंपनियों ने ऑनलाइन व्यवसाय को अपनाकर रिकार्ड तोड़ विक्री हासिल की है और करती जा रही हैं। डिजीटल क्रांति के दम पर फैलता बाजार पूरी दुनिया में एक अलग मुकाम हासिल कर रहा है। कुछ साल पहले का परिदृश्य देखें तो वैश्विक स्तर पर जून 2020 में वैश्विक खुदरा ई-वाजार 26 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया था। इसके बाद आने वाले वर्षों में भी इसमें कमी नही आई क्योंकि 2020 के बाद से ई- कॉमर्स मार्केट से खरीदना लोगो की लत मे तब्दील हो चुका है। – बढ़ता ई- कामर्स बाजार, मगर पर्यावरण के लिए नुकसानदेह यह बाजार आर्थिक नजरिए से तो से काफी अच्छा है, मगर इसकी पृष्ठभूमि में जाएं तो हमारे पृथ्वी ग्रह के पर्यावरण के लिए ये बाजार बहुत नुकसान-देह है। प्रोडक्ट पैकेजिंग काफी तादाद में कार्बन डाई ऑक्साइड का उत्सर्जन करती है। शिपिंग कार्टन की अगर 240 मिलियन टन का निर्माण होता है तो उसमें 30 करोड़ पेड़ो को गूदे में बदल दिया जाता है। अगर 86 मिलियन टन प्लास्टिक पैकेजिंग का निर्माण किया जाए तो उसमें से बमुश्किल 14 फीसदी ही रिसाइकल किया जाता है। वैश्विक स्तर के ये आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं। अब अगर शिपिंग उत्सर्जन को देखें, तो ऑनलाइन शॉपिंग के जरिए ये हमारे पर्यावरण पर भारी नुकसान करता है। ई-कॉमर्स गुड्स के परिवहन पर अगर वैश्विक स्तर पर दृष्टि डालें तो इस परिवहन से बेहिसाब मात्रा में कार्बन डाइ आक्साइड का उत्सर्जन होता है। वर्ष 2020 में शिपिंग और उत्पाद वापसी में कुल ग्रीन हाऊस गैस उत्सर्जन का 97 प्रतिशत हिस्सा था। ग्राहकों की सुविधा लेने की आदत ऐसी ही रही तो 2030 तक डिलीवरी करने वाली गाड़ियों की संख्या 7.2 मिलीयन वाहनों तक पहुंच जाएगी। नतीजा ऐसा होगा कि 6 मिलियन टन से ज्यादा कार्बन डाइ आक्साइड गैस उत्सर्जित होगी जो पूरी दुनिया के पर्यावरण को भारी मात्रा में प्रदूषित करेगी। ग्राहकों की ऑनलाइन शापिंग की लत में तो कभी नहीं आएगी, मगर शिपिंग मात्र ही एक समस्या नही है। समस्या प्रोडक्ट रिटर्न की भी है। अगर 2030 के आने वाले आंकड़ों को नजर अंदाज किया गया और ऑनलाइन शापिंग के चलन में प्रोडक्ट पैकेजिंग पर ध्यान ना देकर किसी विकल्प की तलाश नहीं करी गई तो पूरी दुनिया को भारी प्रदूषण का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा, क्योंकि हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि वायु प्रदूषण से दस में से एक व्यक्ति की मौत होती है। (बॉक्स) वर्ष 2020 में ई कॉमर्स मार्केट वैश्विक स्तर पर तकरीबन 26 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया था। अभी ऑनलाइन शॉपिंग ग्राहकों की आदत नही लत में बदल चुकी है। मगर भयावह सच्चाई यह भी है, कि ऑनलाइन शॉपिंग में इस्तेमाल होने वाला कार्टन करोड़ो पेड़ों की बलियां लेता है। वहीं दूसरी तरह टनों की मात्रा में जहरीली गैस उत्सर्जित करता है।

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