शशिकांत गुप्ते इंदौर
हाल ही भारतीय क्रिकेट टीम कोई एक मैच हार गई।
भारतीय टीम की जीत को लेकर तकरीबन एक दर्जन भर भविष्य वक्ताओं ने भविष्यवाणी की थी।
यह भविष्यवाणी ग्रह,नक्षत्र और राशियों के आधार पर की गई थी।
गलती से Mistake हो गई।
भविष्यवाणी को सत्य साबित करने के लिए,सम्भवतः जो भी उपाय किए गए होंगे उनमें कुछ कमी रह गई होगी? अन्यथा कोई भी देश,भारतीय क्रिकेट टीम को हरा नहीं सकता था?
इस मुद्दे पर सीतारामजी ने टिप्पणी प्रकट करते हुए कहा,हमारे देश के भविष्यवक्ता सिर्फ भविष्यवाणी ही नहीं करतें हैं।
ग्रह,नक्षत्रों को शांत करने के लिए विविध उपाय भी बतातें हैं।
हमारे भविष्य वक्ताओं में इतनी क्षमता है कि, भूगोल पर बैठ कर अंतरिक्ष चलने वाले ग्रह,नक्षत्रों को शांत कर देतें है।
कभी मंत्रोच्चार कर,कभी हवन पूजन कर,कभी कोई यंत्र बनाकर उसकी पूजा अर्चना कर, कभी महंगा अनुष्ठान सपन्न कर ग्रहों, नक्षत्रों और राशियों के अशुभ परिणामों को शुभ परिणामो में बदल ने की चेष्ठा करतें हैं।
लोगों के भाग्य बदलने के लिए शर्तिया उपायों के विज्ञापनों की भरमार समाचार मध्यमों में होती है।
लोगों के भाग्य बदलने के विज्ञापनों को पढ़कर,देखकर सियासतदानों के द्वारा किए गए वादों में साम्यता दिखाई देती है।
उदाहरणार्थ प्रति वर्ष दो करोड़ बेरोजगारों रोजगार,महंगाई पर नियंत्रण, भुखमरी से निजात,आतंकवाद से मुक्ति,कालेधन को नेस्तनाबूत करना,रुपयों के अवमूल्यन पर रोक आदि आदि वादों में और उन विज्ञापनों बहुत साम्यता होती है।
सियासतदानों को वादों को दावों के साथ घोषित करने की छूट है।
भाग्यबदलने वालों को लोकलुभावन विज्ञापन करने के लिए छूट है।
इस मुद्दे पर ईडी, आयकर,सीबीई वगौरह जाँच एजेंसियों के पास कोई प्रावधान नहीं है? बुलडोजर संस्कृति के पास कोई ईंधन नहीं है? यह अनुत्तरित प्रश्न है।
दिमागी पिंजरा खुलना जरूरी है।
अन्यथा बीस,से पच्चीस कार्ड में बंद है दुनियाभर के लोगों का भाग्य जिसे मिठ्ठू पिंजरे की कैद से निकल कर बताता है।
शशिकांत गुप्ते इंदौर





