अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

उज्जैन की अभिजीता सिंह राठौर, जिसने अंगदान कर आठ लोगों को दिया नया जीवन

Share

उज्जैन के चिमनगंज मंडी क्षेत्र निवासी राठौर परिवार की बहू मानवता की मिसाल बनी। दरअसल पांच दिनों पहले बीमार होने पर चिमनगंज मंडी में रहने वाले रेलवे ठेकेदार प्रवीण राठौर की पत्नी हाईकोर्ट एडवोकेट 35 वर्षीय अभिजीता राठौर को इंदौर के जुपिटर हॉस्पिटल में पांच दिनों पहले भर्ती किया गया था, जिन्हें डॉक्टरों की पैनल ने ब्रेन डेथ घोषित कर दिया था। उसके बाद हॉस्पिटल के डॉक्टर, इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव एवं मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के आग्रह के बाद परिवारजनों ने प्रिया राठौर के अंगदान करने का निर्णय लिया।चिकित्सको के मुताबिक राठौर परिवार की बहू का इंफेक्शन तो खत्म हो गया था, लेकिन ब्रेन हेमरेज के बाद उन्हें ब्रेन डेथ घोषित कर दिया गया। चिकित्सा पैनल के अनुसार अभिजीता के बाकी अंग स्वस्थ थे। जिन्हें दान देकर जरूरतमंद मरीजों की जान बचाई जा सकती थी। चिकित्सक टीम ने अंग दान देने का प्रस्ताव जब परिवार को दिया तो सभी ने सहर्ष स्वीकार कर अंग दान देने की सहमति दे दी।



डॉक्टरों की पैनल ने जांच के पश्चात अंगदान हेतु परिवारजनों से सहमति ली। उसके पश्चात राठौर के दिल, लीवर, गुर्दे, फेफड़े, किडनी निकालकर इंदौर में ग्रीन कॉरिडोर बनाकर प्रशासन द्वारा देश के विभिन्न शहरों में जरूरतमंद मरीजों तक पहुंचाए गए। राठौर परिवार के इस सराहनीय कार्य से आठ लोगों को नया जीवन मिला है। पदमवंशी मारवाड़ी सर्व राठौर समाज, राठौर क्षत्रिय महासभा द्वारा उज्जैन के इस परिवार की अनुकरणीय पहल का स्वागत किया गया है। इंदौर जिला प्रशासन द्वारा गॉड ऑफ ऑनर के माध्यम से स्वर्गीय श्रीमती अभिजीता सिंह राठौर को सलामी भी दी गई।

अंग स्वस्थ थे इसीलिए लिया फैसला
चिकित्सको के मुताबिक राठौर परिवार की बहू का इंफेक्शन तो खत्म हो गया था, लेकिन ब्रेन हेमरेज के बाद उन्हें ब्रेन डेथ घोषित कर दिया गया। चिकित्सा पैनल के अनुसार अभिजिता के बाकी अंग स्वस्थ थे। जिन्हें दान देकर जरूरतमंद मरीजों की जान बचाई जा सकती थी। चिकित्सक टीम ने अंग दान देने का प्रस्ताव जब परिवार को दिया तो सभी ने सहर्ष स्वीकार कर अंग दान देने की सहमति दे दी। हॉस्पिटल मैनेजमेंट ने औपचारिकता पूरी करने क़े बाद जिला प्रशासन की मदद से अभिजिता के दिल, लीवर, गुर्दे फेफड़े, किडनी, स्किन सहित आठ अंगों को सुरक्षित निकाले गए और देश के विभिन्न क्षेत्रों में ग्रीन कार्ड कॉरिडोर बनाकर जरूरतमंद मरीजों को लगाने के लिए भेज दिए गए।

यह हुए अंतिम यात्रा में शामिल
अखिल भारतीय राठौर महासभा के संगठन मंत्री राजेंद्र राठौड़ ने बताया कि अभिजीता इंदौर के शासकीय लोक अभियोजक अभिजीत राठौर की बहन तथा अखिल भारतीय राठौर महासभा के पूर्व अध्यक्ष समाजरत्न रतन सिंह राठौर की पुत्री थीं। निज निवास से राठौर की अंतिम यात्रा में मध्य प्रदेश शासन के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, विधायक रमेश मेंदोला, महापौर पुष्यमित्र भार्गव सहित सैकड़ों राजनेता, समाजसेवी तथा एडवोकेट शामिल हुए। जिला प्रशासन ने अभिजिता को सलामी देकर बिदाई दी।

15 साल पहले हुआ था विवाह
अभिजीता अभियंता के साथ एलएलबी, एलएलएम की डिग्री के बाद उच्च न्यायालय में वकालत करती थीं। उनका विवाह 15 साल पूर्व उज्जैन के कृषि उपज मंडी व्यापारी राजेंद्र राठौर के परिवार में रेलवे ठेकेदार प्रवीण राठौर के साथ हुआ था। अभिजिता सामाजिक तथा धार्मिक कार्य में भी सक्रिय भूमिका निभाती थीं। इंदौर शहर में जरूरतमंद लोगों को निशुल्क न्याय दिलाने में हमेंशा आगे रहती थीं। 

कानूनी जगत में बनाई थी अलग पहचान
अभिजीता राठौर ने अपने भाई की मदद से जिला कोर्ट और हाईकोर्ट में वकालत की शुरुआत की थी। अपनी सादगी, मेहनत और कानूनी ज्ञान से उन्होंने वकालत जगत में अलग पहचान बनाई। उनके पति प्रवीण राठौर रेलवे कॉन्ट्रेक्टर हैं। परिवार में 13 वर्षीय बेटी पर्णिका और 5 वर्षीय बेटा अभिरत्न है। उनके बड़े भाई अभिजीत सिंह राठौर इंदौर में लोक अभियोजक हैं, जबकि पिता रतन सिंह राठौर लोक अभियोजन विभाग में डिप्टी डायरेक्टर रह चुके हैं। माता गिरिबाला राठौर शिक्षाविद हैं।

Ramswaroop Mantri

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें