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आरोपी पुनीत ने पत्नी के रैपिड टेस्ट से बनाई अपनी फर्जी निगेटिव कोविड रिपोर्ट, फिर असली इंजेक्शन लाने के लिए फ्लाइट से गया मुंबई

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इंदौर

इंदौर में 1200 नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन बेचने वाले 4 आरोपियों को पुलिस बुधवार को सूरत से इंदौर लेकर आई। पुलिस ने इन चारों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया। उनका 7 दिन रिमांड मांगा था। बता दें, इंदौर में सुनील मिश्रा ने 700 इंजेक्शन दो दिन में बेचने की बात कही थी। पुलिस को शक है, आरोपियों ने इंदौर के साथ आसपास के जिलों में भी इन नकली इंजेक्शन को खपाया है। आरोपियों ने गुजरात में अभी तक 6 हजार नकली इंजेक्शन बेच चुके हैं।

अप्रैल माह में जैसे ही रेमडेसिविर इंजेक्शन की मांग देशभर में अचानक से बढ़ी। उसी समय पुनीत, कौशल और सुनील मिश्रा तीनों ने नकली इंजेक्शन बनाने का प्लान बनाया। पुनीत को मुंबई से इंजेक्शन खरीद कर लाने के लिए कहा, लेकिन अप्रैल में जहां एयरपोर्ट पर कोविड की निगेटिव रिपोर्ट अनिवार्य कर दी थी। इस कारण पुनीत ने पत्नी की कोविड रिपोर्ट की कॉपी कर उससे फर्जी रिपोर्ट तैयार की। जाली कोविड रिपोर्ट के साथ मुंबई गया। यहां उसने असली रेमडेसिविर खरीदा और सूरत आ गया।

गूगल की ली मदद

आरोपियों ने सूरत में बैठ कर इंटरनेट पर सर्च किया कि कोई भी मरीज जब अस्पताल जाता है, तो उसे प्राथमिक उपचार में क्या दिया जाता है। इसमें कई वीडियो में डॉक्टर द्वारा पहले ग्लूकोज की बोतल लगाता देख प्लान आया, असली रेमडेसिविर भी ग्लूकोज जैसे दिखता है। इसके बाद पुनीत को दोबारा मुंबई भेजा। यहां से नकली स्टीकर और हजारों कांच की शीशियाें का ऑर्डर दिया। गुजरात के मोरबी स्थित एक फॉर्म हाउस पर यह बनाना शुरू किया।

दलाल सुनील मिश्रा गुजरात और मध्यप्रदेश के बीच कड़ी है

इंदौर के दलाल सुनील मिश्रा ने बताया कि वह मास्क, सैनिटाइजर सप्लाई करता था। कोरोना के नए स्ट्रेन में रेमडेसिविर की मांग बढ़ी, तो आरोपी का कौशल वोरा और पुनीत शाह से संपर्क हुआ। दोनों 20 अप्रैल को उसे 700 नकली इंजेक्शन की पहली खेप दे दी थी। इसमें से 500 इंजेक्शन जबलपुर में सिटी अस्पताल के संचालक और विश्व हिंदू परिषद के नर्मदा डिवीजन के जिलाध्यक्ष सरबजीत मोखा को दे दिए थे।

रैकेट में कौशल और पुनीत दोनों 20 और 21 अप्रैल के समय इंदौर आए थे। अभी तक प्रदेश में कहां-कहां पर यह नकली इंजेक्शन दिए हैं, इसकी पूछताछ के लिए इंदौर पुलिस इन्हें प्रोटेक्शन वारंट पर ले आएगी।। सूत्रों ने बताया कि आरोपी 6 इंजेक्शन का सेट 35000 रुपए में बना कर देते थे।

स्टीकर मुंबई से प्रिंट करवाकर लाए थे

गिरोह ने पूछताछ में बताया, शीशी पर चिपकाने के लिए नकली स्टीकर मुंबई से प्रिंट करवाए थे। सभी आरोपी बिहार और महाराष्ट्र के हैं। पुलिस ने अभी आरोपियों के नाम का खुलासा नहीं किया है। पुलिस का कहना है कि इनके तार गुजरात के अन्य शहरों से भी जुड़े हैं। सभी जगह छापेमारी की जा रही है।

हवाला से भेजता था रुपए

आरोपी ने पूछताछ में बताया कि अब तक वह 15 लाख हवाले के माध्यम से गुजरात भेज चुका है। लगातार इंजेक्शन की डिमांड बढ़ने के बाद देश के कई जगह इसकी सप्लाई की गई है। आरोपी लंबे समय से गुजरात से इंदौर सड़क मार्ग से इंजेक्शन लाता ले जाता था। गाड़ी पर आपातकालीन सेवा लिखवा रखा था।

Ramswaroop Mantri

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