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बच्चो के लिए जानलेवा हैं एडेनोवायरस :पश्चिम बंगाल के जिलों में सबसे ज्यादा मामले

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उर्यास्वती राय चौधरी 13 साल की थी। 15 फरवरी को उसे सांस लेने में तकलीफ हुई। उसे बुखार भी था। परिवारवालों ने बच्ची को अस्पताल में भर्ती कराया। जांच के बाद रिपोर्ट एडेनोवायरस पॉजिटिव आई। हालत सीरियस होने की वजह से उसे वेंटिलेटर पर रखा गया। 23 फरवरी को उर्यास्वती की मौत हो गई।

ये सिर्फ एक मामला है। कोलकाता समेत पश्चिम बंगाल के तमाम जिलों में सबसे ज्यादा एडेनोवायरस के मामले आ रहे हैं। अब तक वहां 12 बच्चों की मौत हो चुकी है।

कोरोना वायरस के खौफ से लोग अभी भी पूरी तरह से बाहर नहीं आ पाए हैं, और अब एडेनोवायरस की वजह से जान जा रही है। ICMR-NICED ने पश्चिम बंगाल के कुछ बच्चों का टेस्ट किया है। जिसमें सांस के इन्फेक्शन के कम से कम 32% नमूनों में वायरस पाया गया।

आखिर है क्या यह बीमारी। जो ज्यादातर बच्चों को ही अपना निशाना बना रही है। आपके शहर में भी इस वायरस का संक्रमण तो नहीं फैल रहा। यह जानेंगे जरूरत की खबर में। इसके साथ एडेनोवायरस के लक्षण और बचाव को भी समझेंगे।

हमारे एक्सपर्ट्स हैं- डॉ. विवेक शर्मा पीडियाट्रिशियन जयपुर, एम्स, जोधपुर बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अरुण कुमारेंदु सिंह, स्वास्थ्य सेवा निदेशक (डीएचएस) डॉ. सिद्धार्थ नियोगी, सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC), बंगाल के हेल्थ डिपार्टमेंट के चाइल्ड स्पेशलिस्ट।

सवाल: क्या है एडेनोवायरस?
जवाब: 
जैसे कि नाम से समझ आ रहा है कि यह एक वायरस है। इसका असर हल्का भी रह सकता है और स्थिति कई बार गंभीर भी हो जाती है।

सरल शब्दों में समझें तो यह सबसे पहले आपकी सांस को इफेक्ट करता है। इसके बाद दूसरी परेशानियां आपको घेरती हैं और इन्फेक्शन धीरे-धीरे फैलने लगता है।

सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के मुताबिक, ये वायरस आमतौर पर हल्की सर्दी या फ्लू जैसी बीमारी का कारण बनते हैं। एडेनोवायरस साल में किसी भी समय संक्रमित कर सकता है। आम तौर से सर्दियों के आखिरी में और वसंत ऋतु की शुरुआती समय में ये सबसे ज्यादा फैलता है।

सवाल: क्या एडेनोवायरस सिर्फ पश्चिम बंगाल के लोगों के लिए डेंजरस है, दूसरे राज्यों पर इसका खतरा नहीं है?
जवाब:
 नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है। इस गलतफहमी में आप न रहें। पश्चिम बंगाल के अलावा बाकी जगहों पर भी इस वायरस का उतना ही खतरा है। लोग डाॅक्टरों के पास पहुंच रहे हैं।

इसके सिम्टम्स भी पेशेंट्स में हैं लेकिन कई जगहों पर ये आसानी से क्योर भी हो रहा है। लोग घरों पर ही रहकर साफ-सफाई का और खाने-पीने का अच्छे से ध्यान रख रहे हैं। जिससे ये 5-6 दिन में पूरी तरह से सही हो जाता है।

सवाल: पश्चिम बंगाल में बड़ों की तुलना में बच्चों को एडेनोवायरस ज्यादा हाे रहा है, क्या बड़े इससे बचे रहेंगे?
जवाब:
 नहीं ऐसा नहीं है। ये सभी उम्र के लोगों यानी बच्चों से लेकर बुजुर्गों को अपनी चपेट में लेता है। यह टीबी, किडनी जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को आसानी से इन्फेक्ट करता है। जिन लोगों की इम्यूनिटी वीक है उन्हें भी इससे खतरा रहता है।

सवाल: छोटे बच्चों पर ही इस वायरस का सबसे ज्यादा खतरा क्यों है?
जवाब:
 सीडीसी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि ये वायरस सबसे ज्यादा 5 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए खतरनाक है। चूंकि इस उम्र में बच्चों की इम्यूनिटी थोड़ी कमजोर होती है इसलिए वे एडेनोवायरस की चपेट में जल्दी आ जाते हैं।

आमतौर पर ये वायरस न्यू बॉर्न बेबीज और छोटी उम्र के बच्चों की देखभाल करते समय फैलता है। क्योंकि एक बच्चे की साफ-सफाई के साथ ही दूसरे बच्चे को छूने या बच्चों के एक-दूसरे के संपर्क में आने से ये तेजी से स्प्रेड होता है।

वहीं क्लीवलैंड क्लिनिक की रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि बच्चे अपने खिलौनों को मुंह में डालते हैं फिर उन्हें इधर-उधर फेंक देते हैं। फिर थोड़ी देर बाद उससे खेलने लगते हैं। इससे उनके शरीर में बहुत से जर्म्स चले जाते हैं। जो वाकई में उनकी हेल्थ के लिए नुकसानदायक है।

इस बीच वेस्ट बंगाल के हेल्थ डिपार्टमेंट की टीम ने विशेष रूप से चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉक्टरों को एडवाइजरी जारी की है। जिसके अनुसार…

  • फ्लू जैसे लक्षण से ग्रस्त होने वाले बच्चों पर सबसे ज्यादा ध्यान दें।
  • बच्चों का टेस्ट कराएं, उनके हाल पर ध्यान दें।
  • घर में अगर किसी बड़े को सर्दी-जुकाम है तो वो बच्चों से दूर रहें।
  • खुद से इलाज न करें, डॉक्टर के अनुसार ही दवाइयां दें।

सवाल: क्या एडेनोवायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को भी हो सकता है?
जवाब:
 एक-दूसरे के सामने छींकने-खांसने से ये वायरस फैलता है। इससे संक्रमित व्यक्ति के कॉन्टैक्ट में आने से या मल की साफ-सफाई में लापरवाही बरतने पर इंफेक्ट होने के चांस बढ़ जाते हैं।

आंखों से भी इस वायरस के फैलने के चांस रहते हैं।

सीडीसी के मुताबिक, एडेनोवायरस एक इंफेक्टेड पर्सन से दूसरे पर्सन के संपर्क में आने से, छूने से, हाथ मिलाने से, संबंध बनाने से फैल सकता है।

सवाल: बच्चों में खांसी-बुखार होने के कितने दिनों के अंदर डॉक्टर को दिखा लें?
जवाब:
 अगर बच्चे को 3 दिन से ज्यादा बुखार-खांसी है या एडेनोवायरस जैसे कोई लक्षण दिख रहे हैं तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

सवाल: क्या पहले भी इस वायरस की वजह से संक्रमण फैल चुका है?
जवाब:
 जी हां, वैसे तो ये मौसमी संक्रमण यानी सीजनल इन्फेक्शन है। 2018 में भी बच्चों में एडेनोवायरस के फैलने के कई मामले देशभर से सामने आ चुके हैं।

सवाल: क्या कोरोना की तरह ये वायरस भी खतरनाक हो सकता है?
जवाब:
 नहीं, कोरोना बहुत ही ज्यादा घातक था। फिलहाल इस वायरस से घबराने की कोई बात नहीं है। ये वायरस हर साल सर्दियों से वसंत तक मौसम में होने वाले परिवर्तन की वजह से होता है। सावधानी बरतें और समय से इलाज करवाएं।

अगर खुद बीमार हैं, तो ऐसे रखें अपना ख्याल

  • खुद का ध्यान रखें और अपने घर पर ही रहें।
  • छींकने या खांसने पर रूमाल का इस्तेमाल करें न कि अपने कपड़ों और टिश्यू का।
  • जब तक आप सही नहीं हो जाते तब तक खाने-पीने के बर्तनों को दूसरों के साथ शेयर न करें।
  • बच्चों को किस करने से बचें।
  • टॉयलेट से आते वक्त साफ-सफाई का बहुत ध्यान रखें। हाथों को 20 सेकेंड तक धाेएं।

सवाल: अच्छा क्या एडेनोवायरस की कोई खास दवा या वैक्सीन है?
जवाब:
 वैसे तो इस वायरस से निजात पाने के लिए कोई खास दवा नहीं है। परेशानी को कम करने, लक्षणों को कंट्रोल करने के लिए और बुखार के लिए पेरासिटामोल ले सकते हैं।

इन्फेक्शन के दौरान पानी ज्यादा से ज्यादा पिएं। डॉक्टर को अपने लक्षणों के बारे में बताएं। जिससे समय से इलाज शुरू हो सके।

Ramswaroop Mantri

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